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फंड पर रार: केरल को नहीं मिले आपदा राहत के ₹312 करोड़, संसद में बोलीं वित्त मंत्री- मदद की अर्जी ही नहीं दी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 23 Mar 2026 01:29 PM IST
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सार
केरल की लापरवाही से आपदा राहत कोष रुका है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में यह बात कही है। उन्होंने कहा कि मदद के लिए अभी तक अर्जी ही नहीं दी गई है। विपक्षी सांसदों ने केरल के बकाये को लेकर सवाल उठाए थे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : ANI
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विस्तार
Kerala Disaster Relief Fund: केंद्र और केरल सरकार के बीच जारी 'फंड की जंग' में एक नया मोड़ आ गया है। सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ-साफ कहा कि केरल को मिलने वाले 311.95 करोड़ रुपए के आपदा कोष पर रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने कहा कि केरल की ओर से मदद के लिए अभी तक अर्जी ही नहीं डाली गई है।
मंजूरी और अर्जी के बीच का पेंच
संसद में विपक्षी सांसदों ने केरल के बकाये को लेकर सवाल उठाए थे। इसी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर समझाया। उन्होंने कहा, "केंद्र की ओर से किसी अनुदान को मंजूरी देना एक बात है और उस राशि के लिए दावा पेश करना दूसरी बात।" सीतारमण के मुताबिक, 311.95 करोड़ रुपए की यह राशि केंद्र सरकार के पास उपलब्ध है। लेकिन, केरल सरकार ने इसे पाने के लिए आवेदन नहीं दिया है।
यह भी पढ़ें: बंगाल का सियासी रण: सिलीगुड़ी से आगाज, भवानीपुर में आखिरी प्रहार; BJP ने बनाया पीएम की रैलियों का मास्टरप्लान
यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट की बड़ी बाधा
अक्सर केंद्र-राज्य के बीच विवाद की जड़ 'यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट' यानी उपयोगिता प्रमाण पत्र बनता है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी नियम के मुताबिक, पिछली दी गई राशि कहां और कैसे खर्च हुई, इसका हिसाब दिए बिना अगली किस्त जारी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य पिछली परियोजनाओं का हिसाब नहीं देते, तब तक फंड जारी करना संभव नहीं होता।
केरल सरकार का आरोप
केरल लगातार केंद्र पर 'आर्थिक नाकेबंदी' का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में वित्त मंत्री का यह बयान राज्य के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। यह मामला आपदा प्रबंधन से जुड़ा है। आपदा शमन कोष का इस्तेमाल बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के किया जाना था। हालांकि, अब यह अधर में लटकी नजर आ रही हैं। गेंद अब केरल सरकार के पाले में है। यदि राज्य इन फंडों को हासिल करना चाहता है, तो उसे पाई-पाई का हिसाब देना होगा।
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मंजूरी और अर्जी के बीच का पेंच
संसद में विपक्षी सांसदों ने केरल के बकाये को लेकर सवाल उठाए थे। इसी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर समझाया। उन्होंने कहा, "केंद्र की ओर से किसी अनुदान को मंजूरी देना एक बात है और उस राशि के लिए दावा पेश करना दूसरी बात।" सीतारमण के मुताबिक, 311.95 करोड़ रुपए की यह राशि केंद्र सरकार के पास उपलब्ध है। लेकिन, केरल सरकार ने इसे पाने के लिए आवेदन नहीं दिया है।
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यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट की बड़ी बाधा
अक्सर केंद्र-राज्य के बीच विवाद की जड़ 'यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट' यानी उपयोगिता प्रमाण पत्र बनता है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी नियम के मुताबिक, पिछली दी गई राशि कहां और कैसे खर्च हुई, इसका हिसाब दिए बिना अगली किस्त जारी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य पिछली परियोजनाओं का हिसाब नहीं देते, तब तक फंड जारी करना संभव नहीं होता।
केरल सरकार का आरोप
केरल लगातार केंद्र पर 'आर्थिक नाकेबंदी' का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में वित्त मंत्री का यह बयान राज्य के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। यह मामला आपदा प्रबंधन से जुड़ा है। आपदा शमन कोष का इस्तेमाल बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के किया जाना था। हालांकि, अब यह अधर में लटकी नजर आ रही हैं। गेंद अब केरल सरकार के पाले में है। यदि राज्य इन फंडों को हासिल करना चाहता है, तो उसे पाई-पाई का हिसाब देना होगा।