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India-France Ties: 114 राफेल विमानों की बड़ी डील पर अहम बैठक; मैक्रों के भारत दौरे से पहले लग सकती है मुहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 08 Feb 2026 09:07 AM IST
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सार
भारत का 5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एएमसीए अभी शुरुआती चरण में है। वहीं एचएएल का तेजस एमके-आईए प्रोजेक्ट भी अमेरिकी कंपनी जीई के इंजन पर निर्भर होने की वजह से धीमी रफ्तार से चल रहा है। ऐसे में राफेल डील को वायुसेना की तात्कालिक जरूरतों के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।
राफेल विमानों की खरीद पर DAC की अहम बैठक जल्द
- फोटो : ANI
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विस्तार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 18 से 20 फरवरी के भारत दौरे से पहले रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। वे इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक फरवरी के दूसरे हफ्ते में होने की संभावना है।
114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर मुहर?
इस बैठक में सबसे अहम प्रस्ताव 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़ा होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सौदे को आवश्यकता की मंजूरी दी जा सकती है। इस पूरी डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
यह भी पढ़ें - ड्रैगन की साजिश का खुलासा!: गलवान तनाव के सात दिन बाद चीन ने किया था परमाणु परीक्षण, अमेरिका के आरोपों से हलचल
कैसे होगी खरीद?
इस डील के तहत भारतीय वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर राफेल विमान मिलेंगे। इस परियोजना में फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी कंपनियों के बीच साझेदारी होगी। यह प्रस्ताव पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड से पहले ही मंजूरी पा चुका है। अब डीएसी से हरी झंडी मिलने के बाद तकनीकी और व्यावसायिक बातचीत शुरू होगी। वहीं माना जा रहा है कि मैक्रों के भारत दौरे के दौरान ही इस सौदे को अंतिम रूपदिया जा सकता है।
क्यों जरूरी है यह डील?
इस समय भारतीय वायुसेना (आईएएफ)के पास सिर्फ करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। दूसरी ओर पाकिस्तान और चीन से खतरे बढ़ रहे हैं, पाकिस्तान-बांग्लादेश और पाकिस्तान-चीन की रणनीतिक नजदीकियां भी चिंता का कारण हैं।
यह भी पढ़ें - India-US Trade Deal: चीन पर भारी पड़ सकता है मेड इन इंडिया, व्यापार समझौते से भारतीय उद्योग को सीधी बढ़त
राफेल की ताकत
हाल के सैन्य अभियानों में राफेल की भूमिका बेहद अहम रही है। इसे '4.5 जेनरेशन का राजा' कहा जाता है। इसमें मेटियोर मिसाइल (लंबी दूरी की हवा-से-हवा मार करने वाली), स्कल्प मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम शामिल हैं। ये सभी इसे बेहद घातक और भरोसेमंद लड़ाकू विमान बनाते हैं।
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114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर मुहर?
इस बैठक में सबसे अहम प्रस्ताव 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़ा होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सौदे को आवश्यकता की मंजूरी दी जा सकती है। इस पूरी डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
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कैसे होगी खरीद?
- 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से फ्लाई-अवे कंडीशन में खरीदे जाएंगे
- बाकी 96 विमान भारत में बनाए जाएंगे
- इनमें करीब 60% स्वदेशी सामग्री शामिल होगी
- कुल 114 में से लगभग 80% राफेल भारत में बनाए जाएंगे
इस डील के तहत भारतीय वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर राफेल विमान मिलेंगे। इस परियोजना में फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी कंपनियों के बीच साझेदारी होगी। यह प्रस्ताव पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड से पहले ही मंजूरी पा चुका है। अब डीएसी से हरी झंडी मिलने के बाद तकनीकी और व्यावसायिक बातचीत शुरू होगी। वहीं माना जा रहा है कि मैक्रों के भारत दौरे के दौरान ही इस सौदे को अंतिम रूपदिया जा सकता है।
क्यों जरूरी है यह डील?
इस समय भारतीय वायुसेना (आईएएफ)के पास सिर्फ करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। दूसरी ओर पाकिस्तान और चीन से खतरे बढ़ रहे हैं, पाकिस्तान-बांग्लादेश और पाकिस्तान-चीन की रणनीतिक नजदीकियां भी चिंता का कारण हैं।
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राफेल की ताकत
हाल के सैन्य अभियानों में राफेल की भूमिका बेहद अहम रही है। इसे '4.5 जेनरेशन का राजा' कहा जाता है। इसमें मेटियोर मिसाइल (लंबी दूरी की हवा-से-हवा मार करने वाली), स्कल्प मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम शामिल हैं। ये सभी इसे बेहद घातक और भरोसेमंद लड़ाकू विमान बनाते हैं।
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