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किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश में लगे खालिस्तानियों को 'कमजोर कड़ी' की तलाश!

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 06 Feb 2021 05:20 PM IST
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सार

  • पिछले एक साल में दिल्ली-पंजाब में गिरफ्तार हो चुके हैं दो दर्जन से ज्यादा खालिस्तानी आतंकी
  • जनता का साथ न मिलने से अब तक सफल नहीं हो पाईं चरमपंथियों की कोशिशें
  • लेकिन सतर्क रहने की जरूरत बता रहे हैं सुरक्षा विशेषज्ञ

Khalistanis are looking for weak link to defame the country and farmers protest
लाल किला पर खालिस्तानी झंडे के साथ एक प्रदर्शनकारी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI (File)
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विस्तार

किसान आंदोलन में खालिस्तान कनेक्शन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आरोप है कि कनाडा में बैठा चरमपंथी मो. धालीवाल किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तान का एजेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है। उसी ने 'पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन' के जरिए स्विडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग को वह टूलकिट उपलब्ध कराई, जिसमें किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शन में शामिल होने, हिंसा करने और सोशल मीडिया पर मुहिम चलाने की पूरी योजना बताई गई थी।

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इसके पहले भी 10 दिसंबर को किसान आंदोलन में खालिस्तान के पक्ष में नारेबाजी हुई थी। आरोप लगने के बाद किसान नेताओं ने इससे खुद को अलग कर लिया था। लेकिन बाद में 26 जनवरी को इसी किसान आंदोलन की आड़ लेते हुए कथित खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने लाल किला पर एक धार्मिक झंडा लहरा दिया था।
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इसके पहले पिछले साल 15 अगस्त को खालिस्तानी आतंकियों इंदरजीत सिंह (31 वर्ष) और जसपाल सिंह (27 वर्ष) ने पंजाब के मोगा जिले के मुख्यालय पर खालिस्तान का झंडा फहरा दिया था। आतंकियों की योजना इसी दिन लाल किला पर झंडा फहराने की थी, जो सुरक्षा बलों की सतर्कता के कारण पूरी नहीं हो पाई थी। यह योजना इस साल किसान आंदोलन के पीछे छिपकर पूरी की गई। सुरक्षा बलों के मुताबिक पिछले एक वर्ष में पंजाब खालिस्तान से जुड़ी गतिविधियों के आरोप में दो दर्जन से ज्यादा खालिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

तो क्या खालिस्तानी आतंकवाद देश में दोबारा से जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है? जनता से समर्थन न मिलने और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण यह कोशिश अभी तक सफल नहीं हो पाई है लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है अन्यथा आने वाले समय में यह देश के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है। उन्हें किसान आंदोलन जैसी कोई कमजोर कड़ी नहीं मिलनी चाहिए, जिससे वे अपनी सोच को कामयाब बना सकें।

क्या कहते हैं सुरक्षा अधिकारी

मोगा जिला मुख्यालय पर झंडा फहराने के आरोपियों को पाकिस्तान भागने की कोशिश करते हुए दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। इन आतंकियों को गिरफ्तार करने वाले दिल्ली पुलिस के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया था कि पाकिस्तान देश में खालिस्तान आंदोलन को हवा देने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह खालिस्तानी आतंकियों को आर्थिक मदद, हथियार उपलब्ध कराने के साथ-साथ संरक्षण देने का काम भी करता है। गोपाल चावला नाम के खालिस्तानी आतंकी की मदद से वह पंजाब के युवाओं को भड़काने की कोशिश करता रहता है। पाकिस्तान के साथ कुछ अन्य देश भी भारत को अस्थिर करने की साजिश में शामिल हो सकते हैं।

सोशल मीडिया से साध रहे संपर्क

खालिस्तानी चरमपंथी पंजाब के भोले-भाले गरीब युवाओं को अपने प्रभाव में लाने की कोशिश करते रहते हैं। इसके लिए वे यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के मंचों पर युवाओं से संपर्क करते हैं। थोड़ी सी बातचीत के दौरान जो भी युवा उनकी चाल में फंस जाते हैं, वे उनके जरिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचना शुरू कर देते हैं। मोगा की घटना में शामिल आतंकी दसवीं-बारहवीं तक पढ़े सामान्य युवा थे, जो ज्यादा पैसा कमाने की लालच में सोशल मीडिया के माध्यम से खालिस्तानी आतंकियों के संपर्क में आ गए थे।

नशे के कारोबार से भी आतंकियों को मिलती है मदद

सुरक्षा बलों के मुताबिक नशे की गिरफ्त में फंसे युवा पाकिस्तानी-खालिस्तानी सोच को आगे बढ़ाने में आसान शिकार बन जाते हैं। इसके जरिए नशे के कारोबार में जुटे आतंकी अपना कारोबार भी बढ़ाने की कोशिश करते हैं और साथ ही इस कमाई से मिले पैसों का इस्तेमाल खालिस्तानी सोच को आगे बढ़ाने के लिए की जाती है। सरकार को इसे कई स्तरों पर निबटने की जरूरत है।

किसान आंदोलन की छवि पर पड़ा असर

किसान नेता बीरपाल सिंह ने अमर उजाला से कहा कि जिस तरह बार-बार किसान आंदोलन में खालिस्तान का नाम आने से आंदोलन की बदनामी हो रही है, इससे किसान नेताओं और आंदोलन दोनों की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। सरकार को विदेशी सरकारों से बातचीत कर इसका प्रयास करना चाहिए कि उनकी जमीन भारत विरोध के लिए इस्तेमाल न की जा सके।

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