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'दुश्मनी निभाओ, लेकिन मर्यादा मत लांघो': कीर्ति आजाद ने निशिकांत को दी नसीहत, कहा- काकोली भी होंगी बेनकाब
Fri, 12 Jun 2026 03:41 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 12 Jun 2026 03:41 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों और कई विधायकों के बागी होने से पार्टी टूटने के कगार पर है। इसी बीच टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पर 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए डराने-धमकाने और रिश्वत देकर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि दुबे ने पुराना पारिवारिक नाता याद दिलाते हुए आरोपों को खारिज किया है।
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कीर्ति आजाद, टीएमसी सांसद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची रार अब दिल्ली के सियासी गलियारों में पूरी तरह भड़क गई है। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने देश की राजनीति को गरमा दिया है। हालांकि, इस भारी तनाव के बीच कीर्ति आजाद ने एक बेहद सुलझा हुआ रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर निशिकांत दुबे को 'छोटा भाई' बताते हुए उन्हें राजनीतिक लड़ाई में मर्यादा न लांघने की नसीहत दी है।
मतभेदों को व्यक्तिगत रंजिश में न बदलें
कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशिकांत दुबे के एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि आपके साथ मेरा कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है। उन्होंने लिखा, 'आपको मेरा आशीर्वाद है। मेरा सिर्फ एक सुझाव है कि दुश्मनी उतनी ही निभाओ जिससे आपसी मतभेद व्यक्तिगत रंजिश में न बदलें।' इसके साथ ही आजाद ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की तरफ से चलाए जा रहे 'ऑपरेशन लोटस' की पुष्टि करने का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि पहले भूपेंद्र यादव, फिर शुभेंदु अधिकारी और अब मेरे छोटे भाई निशिकांत दुबे सक्रिय हैं। प्रत्यक्ष को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है। हम सब संसद में मिलेंगे।
निशिकांत दुबे का पलटवार और पुराना नाता
इससे पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कीर्ति आजाद के उन आरोपों का खंडन किया था, जिसमें उनके घर को दलबदल का केंद्र बताया गया था। दुबे ने कीर्ति आजाद को चुनौती देते हुए कहा कि आप मेरे घर के बाहर या अंदर कहीं भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। दुबे ने अपने पुराने रिश्तों की दुहाई देते हुए कहा कि मैं दस साल तक भाजपा में आपके साथ सांसद रहा हूं। आपके दिवंगत पिता मेरे अभिभावक थे। इसके अलावा आपका पैतृक गांव गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में आता है, जहां के मतदाताओं ने 2009 से 2024 तक मुझे हमेशा 99 फीसदी वोट दिए हैं। इसलिए मेरे घर पर आपका पूरा अधिकार है। यह सरकारी आवास गोड्डा की जनता का उपहार है।
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टीएमसी में ऐतिहासिक फूट और दलबदल का खेल
यह पूरा विवाद टीएमसी के भीतर बड़े विद्रोह से जुड़ा है। पार्टी के 19 बागी सांसदों ने 18 मई को लोकसभा स्पीकर को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए नाम सौंपे हैं, जिससे पार्टी में टूट तय मानी जा रही है। इस सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मलिया और पार्थ भौमिक जैसे बड़े नाम शामिल हैं। हाल ही में दिल्ली के 20 राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित पार्थ भौमिक के आवास से टीएमसी के पोस्टर हटाकर राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के घर भेज दिए गए हैं। इसके अलावा राज्यसभा से सुस्मिता देव (10 जून), सुखेंदु शेखर राय (8 जून) और प्रकाश चिक बड़ाइक (11 जून) इस्तीफा दे चुके हैं। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी का गुट 64 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है। इन बागी नेताओं की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शुभेंदु अधिकारी से मुलाकातों ने एनडीए में शामिल होने की अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, दलबदल कानून की दसवीं अनुसूची के तहत कानूनी मान्यता के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।
यह भी पढ़ें: RS Poll Row: कांग्रेस नेता नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प अभी भी कायम
भ्रष्टाचार और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप
इस राजनीतिक दंगल में कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेता काकोली घोष दस्तीदार को पहले पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते कैमरे में पकड़ा गया था। आज वे किस मुंह से ममता बनर्जी पर सवाल उठा रही हैं। आजाद ने दावा किया कि वे बहुत जल्द इन सभी बागियों का पर्दाफाश करेंगे और उन्हें 10 लाख रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ेंगे, क्योंकि जानकारी उनके अपने खेमे से ही आएगी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी पर भी निशाना साधा और कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी से अश्लील वीडियो विवाद में निकाले जाने के बाद वे युवराज अभिषेक बनर्जी के चक्कर काटते थे। उन्हें सांसद, विधायक और ट्रेड यूनियन अध्यक्ष बनाया गया, फिर भी वे अहसानफरामोश निकले। कल्याण बनर्जी के बयान पर उन्होंने कहा कि वे भावुक व्यक्ति हैं, लेकिन दीदी से उनके संबंध अच्छे हैं।
आजाद ने भाजपा पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि पहली बार सांसद बने बापी हलदार और ग्रामीण पृष्ठभूमि की मिताली बाग जैसे सीधे-साधे नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई है। उनके परिवारों को डरा-धमकाकर, सुरक्षा हटाकर और पुलिस का पहरा बिठाकर जबरन दलबदल के कागज पर दस्तखत कराए जा रहे हैं। सूची में 14 से 18 नंबर के नाम अलग स्याही में हैं, जिनमें तीन मुस्लिम सांसद भी शामिल हैं, क्योंकि भाजपा को दो-तिहाई बहुमत जुटाना है। आज़ाद ने कहा कि उनकी अपनी सुरक्षा भी हटा ली गई है, लेकिन वे इन हरकतों के आगे नहीं झुकेंगे।
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मतभेदों को व्यक्तिगत रंजिश में न बदलें
कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशिकांत दुबे के एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि आपके साथ मेरा कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है। उन्होंने लिखा, 'आपको मेरा आशीर्वाद है। मेरा सिर्फ एक सुझाव है कि दुश्मनी उतनी ही निभाओ जिससे आपसी मतभेद व्यक्तिगत रंजिश में न बदलें।' इसके साथ ही आजाद ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की तरफ से चलाए जा रहे 'ऑपरेशन लोटस' की पुष्टि करने का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि पहले भूपेंद्र यादव, फिर शुभेंदु अधिकारी और अब मेरे छोटे भाई निशिकांत दुबे सक्रिय हैं। प्रत्यक्ष को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है। हम सब संसद में मिलेंगे।
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निशिकांत दुबे का पलटवार और पुराना नाता
इससे पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कीर्ति आजाद के उन आरोपों का खंडन किया था, जिसमें उनके घर को दलबदल का केंद्र बताया गया था। दुबे ने कीर्ति आजाद को चुनौती देते हुए कहा कि आप मेरे घर के बाहर या अंदर कहीं भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। दुबे ने अपने पुराने रिश्तों की दुहाई देते हुए कहा कि मैं दस साल तक भाजपा में आपके साथ सांसद रहा हूं। आपके दिवंगत पिता मेरे अभिभावक थे। इसके अलावा आपका पैतृक गांव गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में आता है, जहां के मतदाताओं ने 2009 से 2024 तक मुझे हमेशा 99 फीसदी वोट दिए हैं। इसलिए मेरे घर पर आपका पूरा अधिकार है। यह सरकारी आवास गोड्डा की जनता का उपहार है।
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टीएमसी में ऐतिहासिक फूट और दलबदल का खेल
यह पूरा विवाद टीएमसी के भीतर बड़े विद्रोह से जुड़ा है। पार्टी के 19 बागी सांसदों ने 18 मई को लोकसभा स्पीकर को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए नाम सौंपे हैं, जिससे पार्टी में टूट तय मानी जा रही है। इस सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मलिया और पार्थ भौमिक जैसे बड़े नाम शामिल हैं। हाल ही में दिल्ली के 20 राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित पार्थ भौमिक के आवास से टीएमसी के पोस्टर हटाकर राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के घर भेज दिए गए हैं। इसके अलावा राज्यसभा से सुस्मिता देव (10 जून), सुखेंदु शेखर राय (8 जून) और प्रकाश चिक बड़ाइक (11 जून) इस्तीफा दे चुके हैं। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी का गुट 64 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है। इन बागी नेताओं की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शुभेंदु अधिकारी से मुलाकातों ने एनडीए में शामिल होने की अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, दलबदल कानून की दसवीं अनुसूची के तहत कानूनी मान्यता के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।
यह भी पढ़ें: RS Poll Row: कांग्रेस नेता नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प अभी भी कायम
भ्रष्टाचार और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप
इस राजनीतिक दंगल में कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेता काकोली घोष दस्तीदार को पहले पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते कैमरे में पकड़ा गया था। आज वे किस मुंह से ममता बनर्जी पर सवाल उठा रही हैं। आजाद ने दावा किया कि वे बहुत जल्द इन सभी बागियों का पर्दाफाश करेंगे और उन्हें 10 लाख रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ेंगे, क्योंकि जानकारी उनके अपने खेमे से ही आएगी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी पर भी निशाना साधा और कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी से अश्लील वीडियो विवाद में निकाले जाने के बाद वे युवराज अभिषेक बनर्जी के चक्कर काटते थे। उन्हें सांसद, विधायक और ट्रेड यूनियन अध्यक्ष बनाया गया, फिर भी वे अहसानफरामोश निकले। कल्याण बनर्जी के बयान पर उन्होंने कहा कि वे भावुक व्यक्ति हैं, लेकिन दीदी से उनके संबंध अच्छे हैं।
आजाद ने भाजपा पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि पहली बार सांसद बने बापी हलदार और ग्रामीण पृष्ठभूमि की मिताली बाग जैसे सीधे-साधे नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई है। उनके परिवारों को डरा-धमकाकर, सुरक्षा हटाकर और पुलिस का पहरा बिठाकर जबरन दलबदल के कागज पर दस्तखत कराए जा रहे हैं। सूची में 14 से 18 नंबर के नाम अलग स्याही में हैं, जिनमें तीन मुस्लिम सांसद भी शामिल हैं, क्योंकि भाजपा को दो-तिहाई बहुमत जुटाना है। आज़ाद ने कहा कि उनकी अपनी सुरक्षा भी हटा ली गई है, लेकिन वे इन हरकतों के आगे नहीं झुकेंगे।