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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: MBBS ग्रेजुएट्स के लिए एक साल का अनिवार्य सर्विस बॉन्ड खत्म, बताई ये वजह

Fri, 24 Jul 2026 03:15 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 24 Jul 2026 03:15 PM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों के MBBS स्नातकों के लिए एक वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा समाप्त कर दी है। सरकार का कहना है कि सीमित सरकारी पदों और बढ़ते मेडिकल स्नातकों के कारण यह व्यवस्था प्रभावी नहीं रह गई थी। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने इस फैसले का स्वागत किया है।

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Maharashtra govt scraps mandatory one-year service bond for MBBS graduates
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस - फोटो : ANI Photos

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस (MBBS) करने वाले छात्रों के लिए एक साल का अनिवार्य सेवा बॉन्ड (सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी सर्विस) समाप्त कर दिया है। सरकार ने यह फैसला सरकारी पदों की सीमित संख्या और पास होने वाले डॉक्टरों की अधिक संख्या के बीच के असंतुलन को देखते हुए लिया है। इस फैसले का फायदा सरकारी, सहायता प्राप्त, नगर निगम (बीएमसी) और निजी गैर-सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों के सभी एमबीबीएस स्नातकों को मिलेगा।
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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
23 जुलाई को जारी सरकारी आदेश (GR) में बताया गया कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों और पास होने वाले डॉक्टरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसकी तुलना में विभिन्न सरकारी विभागों में बॉन्ड सेवा के लिए पद बहुत सीमित हैं। इस असंतुलन की वजह से समय पर डॉक्टरों को तैनाती नहीं मिल पाती थी। नतीजतन, योग्य होने के बावजूद कई डॉक्टर स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनिवार्य पात्रता को समय पर पूरा नहीं कर पाते थे, जिससे उनकी आगे की पढ़ाई में बाधा आती थी।
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आदेश में यह भी कहा गया कि नए डॉक्टर केवल पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले की पात्रता पाने के लिए ही बॉन्ड पूरा करते थे, जिससे वे अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं करते थे। साथ ही, तुरंत एमबीबीएस पास करने के कारण वे आपातकालीन सेवाएं देने के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं होते थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 9 जुलाई 2025 को इस नीति पर पुनर्विचार के लिए चिकित्सा शिक्षा एवं औषधि विभाग को प्रस्ताव भेजा था।
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बॉन्ड से किसे मिली छूट और क्या हैं नियम?
सरकार के नए नियमों के तहत-
  • केवल वही स्नातक बॉन्ड सेवा पूरी करेंगे, जो जीआर जारी होने से पहले अपनी आवंटित तैनाती पर ड्यूटी जॉइन कर चुके हैं।
  • जिन्हें कोई पद आवंटित नहीं हुआ है या आवंटन के बावजूद जिन्होंने अब तक जॉइन नहीं किया है, उन्हें बॉन्ड सेवा से पूरी तरह छूट दी गई है।
  • बॉन्ड सेवा के लिए अब कोई नया पद आवंटित नहीं होगा और इसके ऑनलाइन पोर्टल को तुरंत बंद कर दिया जाएगा।
  • जिन डॉक्टरों ने पहले बॉन्ड से छूट पाने के लिए निर्धारित जुर्माना भरा था, उन्हें वह पैसा वापस नहीं मिलेगा।
'मार्ड' ने फैसले का स्वागत किया, बुनियादी ढांचे पर जोर
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से लंबित एक प्रगतिशील निर्णय बताया है। मार्ड का कहना है कि इससे युवा डॉक्टरों को पीजी की पढ़ाई और करियर में बिना किसी देरी के आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही सेंट्रल मार्ड ने सरकार से मांग की है कि केवल एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के बजाय अब राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाए, क्योंकि बिना बुनियादी ढांचे के सीटें बढ़ाने से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और मरीजों की देखभाल पर बुरा असर पड़ता है।
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