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मणिपुर में बंद से जनजीवन प्रभावित, चुराचांदपुर में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:50 AM IST
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सार
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में दो आदिवासी संगठनों ने बंद बुलाया है। यह बंद दो कुकी-जो विधायकों के सरकार बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने के विरोध में किया गया है। बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों से झड़प भी हुई।
मणिपुर में फिर तनावपूर्ण माहौल
- फोटो : ANI
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विस्तार
Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार बनने के बाद एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। राज्य के चुराचांदपुर जिले में दो विधायकों के सरकार बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने से कुछ आदिवासी संगठन नाराज हैं। इसके विरोध में शुक्रवार को संपूर्ण बंद का एलान किया गया। इस बंद के कारण कुकी-जो बहुल जिले में जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित है। जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
आदिवासी संगठनों ने बुलाया बंद
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने शुक्रवार आधी रात से 24 घंटे के बंद का एलान किया था। वहीं, एक अन्य संगठन 'ज्वाइंट फोरम आफ सेवन' ने भी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद बुलाया। बंद के कारण बाजार पूरी तरह बंद रहे और सड़कों पर गाड़ियां नहीं चलीं। सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में भी बहुत कम लोग पहुंचे। बंद का सबसे ज्यादा असर जिला मुख्यालय के तुइबोंग इलाके में दिखा। जिले में तनाव को देखते हुए अहम जगहों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। शुक्रवार सुबह बंद का समर्थन कर रहे लोग हाथों में लाठियां लेकर सड़कों पर उतर आए। इस बीच, कुकी महिला मानवाधिकार संगठन ने भी विधायकों के विरोध में शुक्रवार दोपहर एक बड़ी रैली निकालने की घोषणा की है।
एक दिन पहले हुई थी झड़प
इससे पहले गुरुवार शाम को तुइबोंग फारेस्ट गेट के पास भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई थी। भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके, जिसके बाद उन्हें हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। यह झड़प शुक्रवार सुबह 3 बजे तक चली, जिसमें दो प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है।
यह भी पढ़ें: मणिपुर में नई सरकार के गठन के 24 घंटे के अंदर भड़की हिंसा: चुराचांदपुर में तनाव, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
क्यों शुरू हुआ यह विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक एन सनाटे और एल एम खाउते बुधवार को इंफाल पहुंचे थे। वे सरकार बनाने का दावा पेश करने वाली एनडीए टीम का हिस्सा थे। इन दोनों विधायकों ने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के साथ गुरुवार को विधानसभा सत्र में वर्चुअली हिस्सा भी लिया था। इसी बात से कुछ संगठन नाराज हैं।
वहीं, इंडिजिनस ट्राइब्स एडवोकेसी कमेटी ने चेतावनी दी है। कमेटी ने कहा है कि विधायक एन सनाटे को डराने या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को फेरजावल और जिरीबाम जिलों के आदिवासियों का अपमान माना जाएगा। कमेटी ने यह भी कहा कि इस घटना से हमार, कुकी और जोमी जनजातियों के बीच दुश्मनी नहीं होनी चाहिए।
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आदिवासी संगठनों ने बुलाया बंद
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने शुक्रवार आधी रात से 24 घंटे के बंद का एलान किया था। वहीं, एक अन्य संगठन 'ज्वाइंट फोरम आफ सेवन' ने भी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद बुलाया। बंद के कारण बाजार पूरी तरह बंद रहे और सड़कों पर गाड़ियां नहीं चलीं। सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में भी बहुत कम लोग पहुंचे। बंद का सबसे ज्यादा असर जिला मुख्यालय के तुइबोंग इलाके में दिखा। जिले में तनाव को देखते हुए अहम जगहों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। शुक्रवार सुबह बंद का समर्थन कर रहे लोग हाथों में लाठियां लेकर सड़कों पर उतर आए। इस बीच, कुकी महिला मानवाधिकार संगठन ने भी विधायकों के विरोध में शुक्रवार दोपहर एक बड़ी रैली निकालने की घोषणा की है।
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एक दिन पहले हुई थी झड़प
इससे पहले गुरुवार शाम को तुइबोंग फारेस्ट गेट के पास भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई थी। भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके, जिसके बाद उन्हें हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। यह झड़प शुक्रवार सुबह 3 बजे तक चली, जिसमें दो प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है।
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क्यों शुरू हुआ यह विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक एन सनाटे और एल एम खाउते बुधवार को इंफाल पहुंचे थे। वे सरकार बनाने का दावा पेश करने वाली एनडीए टीम का हिस्सा थे। इन दोनों विधायकों ने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के साथ गुरुवार को विधानसभा सत्र में वर्चुअली हिस्सा भी लिया था। इसी बात से कुछ संगठन नाराज हैं।
वहीं, इंडिजिनस ट्राइब्स एडवोकेसी कमेटी ने चेतावनी दी है। कमेटी ने कहा है कि विधायक एन सनाटे को डराने या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को फेरजावल और जिरीबाम जिलों के आदिवासियों का अपमान माना जाएगा। कमेटी ने यह भी कहा कि इस घटना से हमार, कुकी और जोमी जनजातियों के बीच दुश्मनी नहीं होनी चाहिए।
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