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मुंढवा जमीन सौदा: पुलिस ने दर्ज किए आरोपी तेजवानी के बयान, कहा- 272 पूर्व मालिकों को भी दिया नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 19 Nov 2025 07:18 PM IST
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सार
तेजवानी ने कथित तौर पर 40 एकड़ जमीन पार्थ पवार और दिग्विजय पाटिल की कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज (एलएलपी) को बेचने का सौदा किया। इसके साथ ही उसने खुद जमीन के 272 पूर्व मालिकों के तौर पावर ऑफ अटॉर्नी देने का काम किया।
पुणे पुलिस
- फोटो : PTI
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विस्तार
पुणे पुलिस ने मुंढवा जमीन सौदे की आरोपी शीतल तेजवानी का बयान दर्ज किया। ये मामला महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ से जुड़ी कंपनी को अवैध तरीके से सरकारी जमीन बेचने से जुड़ा है।
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एक अधिकारी ने बताया कि तेजवानी से मंगलवार को खड़क पुलिस थाने में दर्ज मामले में पूछताछ की गई। इस मामले में तेजवानी के अलावा पार्थ पवार के बिजनेस सहयोगी दिग्विजय पाटिल और निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येओले भी आरोपी हैं।
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निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत ने अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हुए भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) को बेदखली का नोटिस जारी किया था। पुलिस ने कहा कि इस मामले में पार्थ पवार आरोपी नहीं हैं, क्योंकि उनका नाम खरीद समझौते में सामने नहीं आया था।
तेजवानी ने कथित तौर पर 40 एकड़ जमीन पार्थ पवार और दिग्विजय पाटिल की कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज (एलएलपी) को बेचने का सौदा किया। इसके साथ ही उसने खुद जमीन के 272 पूर्व मालिकों के तौर पावर ऑफ अटॉर्नी देने का काम किया। यह जमीन सरकार के स्वामित्व में है, जिसने इसे बीएसआई को पट्टे पर दिया है।
पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा कि शीतल तेजवानी को अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा, "अब बयान की जांच की जाएगी। हमने दस्तावेज़ों का सत्यापन कर लिया है और जांच अपने तरीके से आगे बढ़ेगी, जिसमें सभी संभावित पहलुओं को शामिल किया जाएगा। जांच दल उल्लंघनों का पता लगाने और अब तक एकत्र किए गए सबूतों की पुष्टि करने के लिए अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने की दिशा में काम कर रहा है।"
उन्होंने ये भी कहा कि मामले में अभी और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाने हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोगों के बयान दर्ज हो जाने के बाद हम इस बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने की स्थिति में होंगे कि क्या हुआ और क्या उल्लंघन हुए।" उन्होंने बताया कि दिग्विजय पाटिल को भी अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि 272 मूल वतनदारों (जिन्हें महार वतन परंपरा के तहत जमीन पर मालिकाना हक दिया गया था) को भी नोटिस जारी किए गए हैं और उनमें से कुछ ने पहले ही अपने बयान दर्ज करा दिए हैं।
संयुक्त महानिरीक्षक पंजीयन (आईजीआर) राजेंद्र मुथे ने मंगलवार को अपनी अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। इस रिपोर्ट में उप-पंजीयक आर. बी. तारू, पाटिल और तेजवानी को अवैध लेनदेन के लिए दोषी ठहराया गया है।