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NEET Row: 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार, लाठीचार्ज सही नहीं', पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Mon, 27 Jul 2026 11:45 AM IST
Pavan पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 27 Jul 2026 11:45 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी हाल में नकारा नहीं जा सकता। प्रदर्शन के लिए उचित स्थान तय किए जाएं और अनावश्यक प्रतिबंध न लगाए जाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया है।

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NEET row: Right to peaceful protest guaranteed, says SC, fixes pleas for hearing on Tuesday
पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस ज्यादती के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी हाल में नकारा नहीं जा सकता। साथ ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने कहा कि केवल प्रदर्शन होने भर से पुलिस की ओर से लाठीचार्ज या अत्यधिक बल प्रयोग को सही नहीं ठहराया जा सकता।
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पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों की सुरक्षा जरूरी
इस सुनवाई के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के परिजनों की ओर से दायर याचिका का भी जिक्र हुआ। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मियों पर भी हमला हुआ था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है, चाहे वह प्रदर्शनकारी हो या पुलिसकर्मी।
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प्रदर्शन के लिए तय हो एक समान व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एक समान प्रोटोकॉल (व्यवस्था) होना चाहिए। प्रदर्शन के लिए उचित स्थान तय किए जाएं और अनावश्यक प्रतिबंध न लगाए जाएं। यदि प्रदर्शन में असामाजिक तत्व शामिल हो जाते हैं तो उनसे अलग तरीके से निपटा जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह केवल दिल्ली का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश में प्रदर्शन को लेकर एक समान व्यवस्था बनाने की जरूरत है।


लोकतंत्र में अनुशासन भी जरूरी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए स्वअनुशासन भी जरूरी है। उन्होंने सभी पक्षों से अदालत की निष्पक्ष तरीके से सहायता करने की अपील की। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह इस मामले में निष्पक्ष रूप से अदालत की सहायता करेंगे।

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क्या है पूरा मामला?
नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में देश के कई राज्यों में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। 20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी। आरोप है कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। प्रदर्शनकारी तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसी घटना के बाद छात्रों ने पुलिस की कथित ज्यादती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिस पर अब मंगलवार को विस्तृत सुनवाई होगी।
 
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