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Economic Slowdown: आर्थिक मंदी का असर नहीं, तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना भारत, यूं कम हुई बेरोजगारी
Tue, 25 Mar 2025 06:16 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 25 Mar 2025 06:16 PM IST
सार
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया, कम वैश्विक मांग और निरंतर भू राजनीतिक अनिश्चिताओं, जिनसे निर्यात तथा औद्योगिक विकास प्रभावित होते हैं, के बावजूद भारत द्वारा वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर हासिल किए जाने का अनुमान है।
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वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
भले ही दुनिया के दूसरे मुल्क आर्थिक मंदी से चिंतित हों, लेकिन भारत में इसका असर देखने को नहीं मिल रहा। सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बताया कि कम वैश्विक मांग और निरंतर भू राजनीतिक अनिश्चिताओं, जिनसे निर्यात तथा औद्योगिक विकास प्रभावित होते हैं, के बावजूद भारत द्वारा वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर हासिल किए जाने का अनुमान है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु (सामान्य स्थिति) के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 2017-18 में 6 प्रतिशत से लगातार कम होकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है।
संसद सत्र में मंगलवार को राज्यसभा सदस्य रजनी अशोकराव पाटिल ने आर्थिक मंदी को लेकर सवाल पूछा था कि हाल ही में आई आर्थिक मंदी के कारण आम नागरिकों की आजीविका पर क्या असर पड़ा है। इससे कितने की नौकरी छूटी है और इससे आर्थिक विकास में कितनी गिरावट आई है। इसका ब्यौरा क्या है। दूसरा, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और विशेष रूप से महाराष्ट्र में नए रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं। तीसरा, आर्थिक मंदी से प्रभावित लोगों की सहायता और राहत प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों का राज्यवार और वर्ष वार ब्यौरा क्या है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उक्त सवाल के जवाब में बताया, कम वैश्विक मांग और निरंतर भू राजनीतिक अनिश्चिताओं, जिनसे निर्यात तथा औद्योगिक विकास प्रभावित होते हैं, के बावजूद भारत द्वारा वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर हासिल किए जाने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने फरवरी 2025 में प्रकाशित अपनी अनुच्छेद 4 रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि भारत की विवेकपूर्ण व्यापक आर्थिक नीतियों और सुधार संचालित दृष्टिकोण ने इसे सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है।
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आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु (सामान्य स्थिति) के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 2017-18 में 6 प्रतिशत से लगातार कम होकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही श्रम बल भागीदारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात में भी वृद्धि हुई है।
सरकार ने समग्र आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सुदृढ़ पूंजीगत व्यय, अवसंरचनात्मक ढांचे का निर्माण, वित्तीय क्षेत्र में सुधार, व्यापार करने में आसानी, कृषि, शिक्षा, कौशल विकास और लघु एवं सूक्ष्म उद्यम जैसी विभिन्न पहलें की हैं।
बजट 2025-26 में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बहुक्षेत्रीय एजेंडा प्रस्तावित किया गया है। इसमें कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात को विकास के इंजन के तौर पर प्रस्तुत किया गया है तथा इनके लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं।
इसके अलावा सरकार ने देश भर में रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के लिए रोजगार सृजन कार्यक्रम, रोजगार गारंटी योजनाएं, कौशल विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के उपाय, स्वरोजगार की सुविधा, करियर संबंधी सेवाओं के लिए पोर्टल उपलब्ध कराना तथा समावेशी मानव संसाधन विकास जैसी कई पहलें की हैं। इन प्रयासों से महाराष्ट्र सहित पूरे देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। सरकार ने सृदृढ़ सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाकर विकास के प्रति समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है। सरकार हमेशा से ही कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान करके तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) अथवा केंद्रीय क्षेत्र (सीएस) की योजनाओं के रूप में क्रियान्वित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यमों से नागरिकों के समग्र कल्याण में सुधार लाने के लिए प्रयासरत रही है।
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संसद सत्र में मंगलवार को राज्यसभा सदस्य रजनी अशोकराव पाटिल ने आर्थिक मंदी को लेकर सवाल पूछा था कि हाल ही में आई आर्थिक मंदी के कारण आम नागरिकों की आजीविका पर क्या असर पड़ा है। इससे कितने की नौकरी छूटी है और इससे आर्थिक विकास में कितनी गिरावट आई है। इसका ब्यौरा क्या है। दूसरा, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और विशेष रूप से महाराष्ट्र में नए रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं। तीसरा, आर्थिक मंदी से प्रभावित लोगों की सहायता और राहत प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों का राज्यवार और वर्ष वार ब्यौरा क्या है।
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वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उक्त सवाल के जवाब में बताया, कम वैश्विक मांग और निरंतर भू राजनीतिक अनिश्चिताओं, जिनसे निर्यात तथा औद्योगिक विकास प्रभावित होते हैं, के बावजूद भारत द्वारा वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर हासिल किए जाने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने फरवरी 2025 में प्रकाशित अपनी अनुच्छेद 4 रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि भारत की विवेकपूर्ण व्यापक आर्थिक नीतियों और सुधार संचालित दृष्टिकोण ने इसे सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है।
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आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु (सामान्य स्थिति) के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 2017-18 में 6 प्रतिशत से लगातार कम होकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही श्रम बल भागीदारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात में भी वृद्धि हुई है।
सरकार ने समग्र आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सुदृढ़ पूंजीगत व्यय, अवसंरचनात्मक ढांचे का निर्माण, वित्तीय क्षेत्र में सुधार, व्यापार करने में आसानी, कृषि, शिक्षा, कौशल विकास और लघु एवं सूक्ष्म उद्यम जैसी विभिन्न पहलें की हैं।
बजट 2025-26 में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बहुक्षेत्रीय एजेंडा प्रस्तावित किया गया है। इसमें कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात को विकास के इंजन के तौर पर प्रस्तुत किया गया है तथा इनके लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं।
इसके अलावा सरकार ने देश भर में रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के लिए रोजगार सृजन कार्यक्रम, रोजगार गारंटी योजनाएं, कौशल विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के उपाय, स्वरोजगार की सुविधा, करियर संबंधी सेवाओं के लिए पोर्टल उपलब्ध कराना तथा समावेशी मानव संसाधन विकास जैसी कई पहलें की हैं। इन प्रयासों से महाराष्ट्र सहित पूरे देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। सरकार ने सृदृढ़ सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाकर विकास के प्रति समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है। सरकार हमेशा से ही कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान करके तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) अथवा केंद्रीय क्षेत्र (सीएस) की योजनाओं के रूप में क्रियान्वित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यमों से नागरिकों के समग्र कल्याण में सुधार लाने के लिए प्रयासरत रही है।