फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Parliament Monsoon Session discussion under Rule 267 Demand used 11 times in 36 years why Opposition adamant

Parliament: नियम 267 के तहत चर्चा की मांग, 36 वर्षों में सिर्फ 11 बार इस्तेमाल; क्यों अड़ा है विपक्ष?

Wed, 29 Jul 2026 09:58 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 29 Jul 2026 09:58 AM IST
सार

  • संसद के मानसून सत्र के दौरान हंगामे का दौर जारी है।
  • विपक्षी दल नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़े हैं।
  • विपक्ष की दलील है कि 36 वर्षों में सिर्फ 11 बार इसका इस्तेमाल हुआ है।
  • आखिरी बार 2016 में नोटबंदी पर राज्यसभा में इस नियम के तहत हुई थी चर्चा।

विज्ञापन
Parliament Monsoon Session discussion under Rule 267 Demand used 11 times in 36 years why Opposition adamant
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हंगामा (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में करीब डेड़ हफ्ते से जारी गतिरोध की सबसे बड़ी वजह नियम 267 बना हुआ है। विपक्ष रोज इसी नियम के तहत नोटिस देकर 20 जुलाई के छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सभापति उन्हें स्वीकार करने से इन्कार कर रहे हैं। तो ऐसा क्या है जिसके कारण इस नियम के तहत सभापति चर्चा कराने से इन्कार कर रहे हैं, आइए जानते हैं...

विज्ञापन


36 साल में केवल 11 बार चर्चा, क्या है इतिहास?
करीब 36 वर्षों में राज्यसभा में नियम 267 के तहत केवल 11 बार चर्चा की अनुमति मिली है। 1990-92 के बीच तत्कालीन सभापति शंकर दयाल शर्मा के कार्यकाल में चार बार, भैरों सिंह शेखावत (2002-07) के कार्यकाल में तीन बार और हामिद अंसारी (2007-17) के कार्यकाल में चार बार इस नियम के तहत चर्चा हुई। आखिरी बार 2016 में नोटबंदी पर राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने इस नियम के तहत चर्चा कराई थी। इससे पहले, 2015 में बेमौसम बारिश और कृषि संकट, 2013 में निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा, 2012 में विदेश में काला धन और 2004 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली व खाद्य तेल आयात में अनियमितताओं पर इसी नियम के तहत बहस कराई गई थी। 1990 में खाड़ी युद्ध से उत्पन्न परिस्थितियों पर चर्चा के लिए भी इस विशेष प्रावधान का इस्तेमाल किया गया था।
विज्ञापन


आखिर क्यों इसी नियम के तहत चर्चा पर अड़ा विपक्ष
दरअसल, नियम 267 राज्यसभा की कार्यवाही का सबसे असाधारण संसदीय प्रावधान माना जाता है। इसके तहत सभापति यदि अनुमति दे दें तो उस दिन सूचीबद्ध पूरा सरकारी और विधायी काम स्थगित कर केवल उसी मुद्दे पर चर्चा होती है। इसके विपरीत नियम 176 के तहत केवल करीब ढाई घंटे की अल्पकालिक चर्चा का प्रावधान है। इससे सदन का अन्य काम प्रभावित नहीं होता। विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है और इसलिए सामान्य अल्पकालिक चर्चा पर्याप्त नहीं होगी। विपक्ष इसे दुर्लभ से दुर्लभतम स्थिति बताते हुए इसी प्रक्रिया के तहत चर्चा पर अड़ा है। दूसरी तरफ, सभापति का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां इतनी असाधारण नहीं हैं कि इस नियम का सहारा लिया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed