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Parliament: संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट, राज्यसभा 46 और लोकसभा 42 बार स्थगित; कामकाज पर क्या असर पड़ा?
सार
संसद के मानसून सत्र की 15 बैठकों में सरकार और विपक्ष के टकराव का असर सीधे कामकाज पर पड़ा है। राज्यसभा की कार्यवाही 46 बार और लोकसभा की 42 बार स्थगित हुई। दोनों सदनों में रोजाना 7-8 घंटे के बजाय करीब एक घंटे ही काम हो सका। लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल भी नहीं हो पाया। ऐसे में सवाल है कि आखिर संसद में चर्चा से ज्यादा हंगामा क्यों हावी रहा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख पर क्यों अड़े?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का असर संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। सत्र की अब तक हुई 15 बैठकों में दोनों सदनों की कार्यवाही कुल 88 बार स्थगित हो चुकी है। राज्यसभा 46 बार और लोकसभा 42 बार स्थगित हुई। सामान्य तौर पर दोनों सदनों में प्रतिदिन 7 से 8 घंटे कामकाज की उम्मीद रहती है, लेकिन इस सत्र में औसतन करीब एक-एक घंटे ही काम हो सका। इससे संसद के कामकाज और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल क्यों नहीं हो सके?
कामकाज के आंकड़े बताते हैं कि लोकसभा में इन 15 बैठकों के दौरान एक बार भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पाया। प्रश्नकाल में सांसद सरकार से सीधे सवाल पूछते हैं, जबकि शून्यकाल में जरूरी और तत्काल सार्वजनिक मुद्दे उठाए जाते हैं। दोनों सदनों में कुल 10 विधेयक पारित हुए, लेकिन हंगामे के कारण विपक्ष की ओर से लाए गए स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। यानी सदन में कानून बनाने का काम तो हुआ, लेकिन कई मुद्दों पर विस्तार से बहस का अवसर नहीं मिल सका। इससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय कामकाज को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
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नीट पेपर लीक पर चर्चा हुई तो फिर विवाद क्यों नहीं थमा?
नीट पेपर लीक का मुद्दा इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा कारण रहा। दोनों सदनों में इस मामले पर करीब 20 घंटे चर्चा हुई। हालांकि, आरोप है कि चर्चा के दौरान गिने-चुने सांसदों को छोड़कर ज्यादातर वक्त सियासी आरोप और प्रत्यारोप में चला गया। सरकार का कहना है कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है और सदन में हंगामा करना उसका एजेंडा बन गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधेयकों पर सहमति देता है, लेकिन सदन में हंगामा करता है। वहीं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार को टकराव के लिए जिम्मेदार ठहराया और नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान हुई ज्यादतियों पर जवाब की मांग की।
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