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Hindi News ›   India News ›   Parliament Monsoon Session: Rajya Sabha Adjourned 46 Times, Lok Sabha 42 Times; What Impact Did It Have?

Parliament: संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट, राज्यसभा 46 और लोकसभा 42 बार स्थगित; कामकाज पर क्या असर पड़ा?

Mon, 10 Aug 2026 06:28 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Mon, 10 Aug 2026 06:28 AM IST
सार

संसद के मानसून सत्र की 15 बैठकों में सरकार और विपक्ष के टकराव का असर सीधे कामकाज पर पड़ा है। राज्यसभा की कार्यवाही 46 बार और लोकसभा की 42 बार स्थगित हुई। दोनों सदनों में रोजाना 7-8 घंटे के बजाय करीब एक घंटे ही काम हो सका। लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल भी नहीं हो पाया। ऐसे में सवाल है कि आखिर संसद में चर्चा से ज्यादा हंगामा क्यों हावी रहा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Parliament Monsoon Session: Rajya Sabha Adjourned 46 Times, Lok Sabha 42 Times; What Impact Did It Have?
सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख पर क्यों अड़े? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का असर संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। सत्र की अब तक हुई 15 बैठकों में दोनों सदनों की कार्यवाही कुल 88 बार स्थगित हो चुकी है। राज्यसभा 46 बार और लोकसभा 42 बार स्थगित हुई। सामान्य तौर पर दोनों सदनों में प्रतिदिन 7 से 8 घंटे कामकाज की उम्मीद रहती है, लेकिन इस सत्र में औसतन करीब एक-एक घंटे ही काम हो सका। इससे संसद के कामकाज और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल क्यों नहीं हो सके?

कामकाज के आंकड़े बताते हैं कि लोकसभा में इन 15 बैठकों के दौरान एक बार भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पाया। प्रश्नकाल में सांसद सरकार से सीधे सवाल पूछते हैं, जबकि शून्यकाल में जरूरी और तत्काल सार्वजनिक मुद्दे उठाए जाते हैं। दोनों सदनों में कुल 10 विधेयक पारित हुए, लेकिन हंगामे के कारण विपक्ष की ओर से लाए गए स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। यानी सदन में कानून बनाने का काम तो हुआ, लेकिन कई मुद्दों पर विस्तार से बहस का अवसर नहीं मिल सका। इससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय कामकाज को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
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नीट पेपर लीक पर चर्चा हुई तो फिर विवाद क्यों नहीं थमा?

नीट पेपर लीक का मुद्दा इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा कारण रहा। दोनों सदनों में इस मामले पर करीब 20 घंटे चर्चा हुई। हालांकि, आरोप है कि चर्चा के दौरान गिने-चुने सांसदों को छोड़कर ज्यादातर वक्त सियासी आरोप और प्रत्यारोप में चला गया। सरकार का कहना है कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है और सदन में हंगामा करना उसका एजेंडा बन गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधेयकों पर सहमति देता है, लेकिन सदन में हंगामा करता है। वहीं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार को टकराव के लिए जिम्मेदार ठहराया और नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान हुई ज्यादतियों पर जवाब की मांग की।
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सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख पर क्यों अड़े हैं?

सरकार का आरोप है कि विपक्ष सदन में चर्चा के बजाय लगातार हंगामा कर रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार विपक्ष बीएसी की बैठक में विधेयकों पर सहमति देता है और फिर सदन में हंगामा करता है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि सरकार जरूरी मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने नीट पेपर लीक आंदोलन में हुई कथित ज्यादतियों पर जवाब मांगते हुए गृह मंत्री के सदन में बयान की मांग उठाई है। विपक्ष का सवाल है कि जब किसी मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा जा रहा है तो उसे सदन में रखने का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा। इस तरह दोनों पक्षों के बीच आरोपों का सिलसिला जारी है।

88 बार स्थगन के बाद संसद के कामकाज पर क्या असर पड़ा?

15 बैठकों में कामकाज की तस्वीर: राज्यसभा की कार्यवाही 46 बार स्थगित हुई, लोकसभा 42 बार स्थगित हुई और दोनों सदनों को मिलाकर 88 बार कार्यवाही रोकी गई। दोनों सदनों में प्रतिदिन अपेक्षित 7-8 घंटे के मुकाबले करीब एक-एक घंटे काम हो सका। लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पाया। 10 विधेयक पारित हुए, लेकिन विपक्ष के स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। नीट पेपर लीक पर करीब 20 घंटे चर्चा के बावजूद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हावी रहे। ऐसे में मानसून सत्र का बड़ा हिस्सा सरकार और विपक्ष के टकराव में निकलता दिख रहा है। सवाल अब यही है कि क्या बाकी बैठकों में दोनों पक्ष गतिरोध तोड़कर महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित के मुद्दों पर सामान्य तरीके से चर्चा कर पाएंगे।
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