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PM In Lok Sabha: संविधान में संशोधनों पर प्रधानमंत्री की अपील- इस अवसर को जाने न दें, इस मंथन से अमृत निकलेगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 16 Apr 2026 03:04 PM IST
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सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक यानी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चर्चा के दौरान इसे भारत की विकास यात्रा का एक निर्णायक पड़ाव बताया। पीएम ने कहा कि यह विधेयक देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर लोकतंत्र को और अधिक समृद्ध बनाएगा।

PM Modi in Lok Sabha Speech Update Constitution Amendment Nari Shakti Vandan Act Delimitation and other issues
पीएम मोदी - फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार

संसद के विशेष सत्र के दौरान आज लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'महिला आरक्षण विधेयक' यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम खुशकिस्मत हैं कि हम इस पल के साक्षी बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि इस मंथन से अमृत निकलेगा और यह मंथन देश की दिशा और दशा तय करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के लिए महत्वपूर्ण दिन है। यह 20-25 वर्ष पहले हो जाना चाहिए था, समय-समय पर इसमें सुधार होते रहते। सदन के सभी साथियों को यह अवसर मिला है।

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पीएम मोदी ने आगे कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं, उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। मैं समझता हूं कि संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। जरूरत महसूस हुई होती तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते। हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहे हैं। हमारी हजार वर्ष की विकास यात्रा रही है।
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जो विरोध करेंगे उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी - पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक जीवन में जो लोग सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25 से 30 वर्ष में ग्रासरूट लेवल यानी जमीनी स्तर पर महिलाएं लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33 फीसदी का सामर्थ्य नहीं है, बल्कि वे आपके फैसलों को भी प्रभावित करने वाली हैं। इसलिए जो आज विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। राजनीतिक समझदारी इसी में है कि हम जमीनी स्तर पर महिलाओं की जो राजनीतिक लीडरशिप खड़ी हुई है, उसे संदर्भ में लें।



पीएम मोदी बोले- मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आप महिलाओं की समझदारी पर भरोसा करो। उन्हें निर्णय लेने दो कि किस वर्ग को आरक्षण देना है, किस वर्ग को नहीं। उन्हें आने तो दो। मैं अति-पिछड़े समाज से आता हूं। संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है। यह संविधान की ही ताकत है जिसने मुझे यहां तक आने का मौका दिया है। मैं संविधान निर्माताओं का ऋणी हूं। इतना बड़ा सामर्थ्य है, उसे हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं?

उन्होंने कहा कि उनके जुड़ने से सामर्थ्य बढ़ने वाला है। इसे राजनीति के तराजू से मत तौलिए। इस मामले को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर 'विकसित भारत' बनाने में हमारी नारी शक्ति को खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है। आज पूरा देश और नारी शक्ति यह निर्णय तो देखेगी ही, लेकिन इससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।



'2023 में सभी ने अधिनियम को स्वीकार किया था'
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना। उसमें कोई राजनीतिक रंग नहीं लगा, यह अच्छी चीज है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसे रोकना है? जो लोग यहां आबादी का विषय उठाते हैं, अमित शाह अपने भाषण में इसका जिक्र करेंगे कि हमने जनगणना के लिए क्या-क्या किया है? ये बातें हम रखेंगे। लेकिन जब हम 2023 में चर्चा कर रहे थे, तब इसे जल्दी लागू करने की बात कर रहे थे, लेकिन कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 2029 में यह किया जा सकता है। अब अगर 2029 में यह संभव नहीं होगा, तो हम माता-बहनों में यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि यह संभव भी है।

उन्होंने कहा कि जब मैं संगठन का एक कार्यकर्ता था, तब चर्चा होती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं क्योंकि उन्हें वहां अपना पद जाने का डर नहीं लगता है। हम सुरक्षित हैं, इसलिए दे दो। इसलिए पंचायत में आरक्षण 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। मैं एक और बात कहता हूं कि जिसने 30 साल पहले इसका विरोध किया, वह राजनीतिक गलियारों से नीचे नहीं गया, लेकिन जमीनी स्तर पर आज वही बहनें मुखर हैं। लाखों बहनें जो काम कर चुकी हैं, वे आज मुखरित हैं। वे कहती हैं कि हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो, जो संसद में होती है।

'परिसीमन प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी'
इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि हमारी एक्टिविस्ट और संविधान के जानकारों से बात हुई। यहां बैठकर हमारे संविधान ने किसी को टुकड़ों में सोचने का अधिकार नहीं दिया। एक राष्ट्र के रूप में विचार करना हमारा दायित्व है। चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हम एक साथ सोच सकते हैं और एक साथ निर्णय ले सकते हैं। सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए बवंडर खड़ा किया जा रहा है। मैं इस सदन से कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो या उत्तर, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य, परिसीमन प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी। यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ, वह अनुपात उनके समय से चला आ रहा है और उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा। अगर गारंटी कहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादे की बात करें तो वादा करता हूं। जब नीयत साफ है तो हमें शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।

'हम उस अहंकार में न रहें कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे'
पीएम ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक बात है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा, यह लिखकर ले लो। क्योंकि इसका अलग पहलू हो जाता है। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए। जैसे ही यह पारित हो जाए। मैं सबका आभार प्रकट करने के लिए तैयार हूं। ले लो क्रेडिट। हम सरकारी खर्चे से जिसकी फोटो आप (विपक्ष) कहेगा उसकी फोटो छपवा देंगे। सामने से क्रेडिट का प्लान चेंज। आपको दे रहा हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि हम भ्रम में न रहें, हम उस अहंकार में न रहें कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। जी नहीं। यह उसका हक है। हमने कई दशकों से उसे रोका है। आज उसका प्रायश्चित कर के उस पाप से मुक्ति पाने का यह मौका है।



'हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह निर्णय भारत का कमिटमेंट है, सांस्कृतिक कमिटमेंट है। इसी कमिटमेंट के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी। हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है। सामर्थ्य में कोई कमी नहीं है। वे अच्छा योगदान देंगे। जितनी हमारी बहनें हैं, उन्होंने बहुत अच्छे काम से सदन को समृद्ध किया है। देश में वर्तमान में 650 से ज्यादा पंचायतें हैं। करीब पौने तीन सौ महिलाएं इसमें योगदान दे रही हैं। 2700 ब्लॉक पंचायत ऐसी हैं, जिनका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। शहरों में मेयर हों या स्टैंडिंग कमेटी का काम देखने वाली महिलाएं। जब यह अनुभव सदन के साथ जुड़ेगा तो यह अनेक गुना ताकत बढ़ा देगा। एक लंबी प्रतीक्षा के बाद यह अवसर है कि हम पुरानी मर्यादाओं से बाहर निकलें और हिम्मत के साथ आगे बढ़ें और नारी शक्ति की सहभागिता को सुनिश्चित करें।

काला टीका लगाने के धन्यवाद- पीएम मोदी
पीएम ने अपील की कि इसे सर्व सहमति से आगे बढ़ाना चाहिए। सर्वसम्मति से जब हम आगे बढ़ते हैं तो ट्रेजरी बेंच पर भी दबाव बनता है। सामूहिक शक्ति से हमें अनेक अच्छे परिणाम मिलते हैं। मैं इतना ही कहूंगा कि इसको राजनीति के तराजू से न तौलें। हम जब भी कुछ निर्णय लेते हैं उसका आधा जिम्मा जो उठा रहे हैं, उनका भी कुछ हक बनता है। संख्या के संबंध में भी पहले कहते थे कि जो संख्या थी, उसे बढ़ाने की बात ही चलती थी। अपने यहां जब कोई भी शुभ काम होता है, उसे नजर न लग जाए, उसे काला टीका लगता है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए।

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