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आयातित दवाओं के नियम बदलने की तैयारी: एक्सपायर होने की तारीख को लेकर सरकार सख्त, अब 12 महीने की वैधता जरूरी

Fri, 26 Jun 2026 02:35 PM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Fri, 26 Jun 2026 02:35 PM IST
सार

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयातित दवाओं के नियमों में बदलाव का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार, आयात के समय दवाओं में 60% शेष शेल्फ लाइफ की जगह कम से कम 12 महीने की वैधता पर्याप्त होगी। 

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revise rules for imported medicines Government gets tough on expiry dates 12-month validity now mandatory.
दवाई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय आयातित दवाओं से जुड़े नियमों में अहम बदलाव की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 31 में संशोधन का मसौदा जारी कर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य दवा क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना और मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।   

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12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना पर्याप्त होगा
22 जून को गजट अधिसूचना के जरिए जारी किए गए इस मसौदे में आयातित दवाओं के लिए मौजूदा 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, अब आयात के समय दवा की कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना पर्याप्त होगा। बता दें कि दवाओं की शेल्फ लाइफ वह समयावधि है, जिसके दौरान कोई दवा सुरक्षित और पूरी तरह से असरदार रहती है। यह अवधि दवा के निर्माण की तारीख से शुरू होकर उस पर छपी एक्सपायरी डेट तक होती है।

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हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बायोलॉजिकल उत्पादों और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के मामले में मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे। यानी इन विशेष श्रेणी की दवाओं के लिए आयात के समय 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका कारण इन दवाओं की विशेष प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यकताएं हैं।

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इससे क्या फायदा होगा?
मंत्रालय का कहना है कि इस संशोधन से दवा आपूर्ति श्रृंखला (फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन) अधिक प्रभावी बनेगी। आयातित दवाओं के पास देश में आने के समय कम से कम 12 महीने की शेष वैधता होने से उन्हें बाजार तक पहुंचाने और मरीजों तक उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे मरीजों को उपयोग योग्य शेल्फ लाइफ वाली गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिलती रहेंगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से दवाओं की अनावश्यक बर्बादी भी कम होगी, क्योंकि मौजूदा सख्त शेल्फ लाइफ नियमों के कारण कई बार दवा भंडारण और वितरण में नुकसान होता है। इससे सप्लाई मैनेजमेंट बेहतर होगा, लागत घटेगी और देश में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता भी मजबूत होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव केवल आयात के समय लागू होने वाली शेष शेल्फ लाइफ की शर्त से संबंधित है। दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े अन्य सभी नियम ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत पहले की तरह लागू रहेंगे। मंत्रालय ने सभी हितधारकों से इस मसौदे पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इच्छुक लोग निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव आधिकारिक ई-मेल पर भेज सकते हैं।

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