50 Years of Emergency: शरद पवार का दावा- इंदिरा गांधी ने माफी मांगी थी; कहा- दुर्भाग्यपूर्ण था 1975 का आपातकाल
आपातकाल की 50वीं बरसी पर शरद पवार ने कहा कि आपातकाल दुर्भाग्यपूर्ण समय था, लेकिन इंदिरा गांधी ने इसके लिए माफी मांगी थी। साथ ही उन्होंने इस दौरान दिवंगत मजदूर नेता जॉर्ज फर्नांडीस को भी याद किया। पवार ने कहा कि आपातकाल के दौरान फर्नांडीस को अंडरग्राउंड होना पड़ा था।
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आपातकाल की 50वीं बरसी के मौके पर देश में भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी अपने चरम पर है। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने 50 साल पहले लगाए गए आपातकाल को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन साथ में यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसके लिए माफी भी मांगी थी। मुंबई में श्रमिक संगठनों की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए पवार ने कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना सबसे जरूरी कर्तव्य है और आज भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
इंदिरा गांधी ने मांगी थी माफी
पवार ने कहा कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस के कई नेताओं में असंतोष था। उन्होंने यह भी याद किया कि बाद में इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू करने के लिए माफी मांग ली थी। साथ ही शरद पवार ने बताया कि आपातकाल के बाद कांग्रेस दो हिस्सों में बंटी थी, कांग्रेस (इंदिरा) और कांग्रेस (सोशलिस्ट)।
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पवार ने कहा कि उस दौरान उन्होंने कांग्रेस (एस) का साथ दिया था। हालांकि वे मानसिक रूप से तैयार नहीं थे, फिर भी इंदिरा कांग्रेस और कांग्रेस (एस) ने मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई। पवार ने कहा कि 1978 में उनके नेतृत्व में सरकार बनी, जिसमें आपातकाल का विरोध करने वाले लोग शामिल थे।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
पवार ने वर्तमान केंद्र सरकार (भाजपा) की आलोचना करते हुए कहा कि आज भी सरकार की आलोचना पसंद नहीं की जाती। मीडिया में सरकार की आलोचना करने वालों को धमकियां मिलती हैं। उन्होंने कहा कि घोषित और अघोषित आपातकाल में फर्क होता है, लेकिन असर एक जैसा होता है।
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जॉर्ज फर्नांडीस को किया याद
अपने बयान में पवार ने दिवंगत जॉर्ज फर्नांडीस को याद करते हुए कहा कि वे एक मजदूर नेता से केंद्र सरकार में मंत्री तक बने। उन्होंने 1967 में मुंबई से कांग्रेस के दिग्गज एसके पाटिल को हराया था, जिन्हें 'मुंबई का राजा' कहा जाता था। पवार ने बताया कि आपातकाल के दौरान फर्नांडीस को अंडरग्राउंड होना पड़ा था और उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए बहुत संघर्ष किया। इसके साथ ही कार्यक्रम के अंत में शरद पवार ने नागरिकों से लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की और कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।