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अध्ययन: पृथ्वी की खिसकती प्लेटों की चाल ने जलवायु को सबसे ज्यादा बदला, महासागरों की भूमिका आई सामने

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 24 Jan 2026 05:02 AM IST
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सार

नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गति ने वायुमंडलीय कार्बन और जलवायु बदलाव को करोड़ों वर्षों तक नियंत्रित किया।

Study Finds Shifting Tectonic Plates Played a Major Role in Shaping Earth's Climate
भूवैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार
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पृथ्वी के इतिहास में जलवायु ने कई बार अत्यधिक ठंडे आइसहाउस दौर से लेकर बेहद गर्म ग्रीनहाउस अवस्थाओं तक की यात्रा की है। अब तक वैज्ञानिक इन बदलावों को मुख्य रूप से वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड के उतार चढ़ाव से जोड़ते रहे हैं, लेकिन एक नया अध्ययन बताता है कि इस कार्बन का स्रोत और उसे नियंत्रित करने वाली ताकतें कहीं अधिक जटिल हैं।

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पृथ्वी की सतह के नीचे खिसकती टेक्टोनिक प्लेटें जलवायु परिवर्तन में पहले से कहीं बड़ी भूमिका निभा रही हैं। खासकर वे स्थान जहां प्लेटें अलग होती हैं। जर्नल कम्युनिकेशन्स, अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित इस नए शोध में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पृथ्वी की टेक्टोनिक्स प्लेटों ने पिछले 540 मिलियन वर्षों में वैश्विक जलवायु को किस तरह आकार दिया। अध्ययन के अनुसार कार्बन केवल वहीं नहीं निकलता जहां टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं, बल्कि उन क्षेत्रों में भी बड़ी मात्रा में भूमिका निभाता है जहां प्लेटें एक-दूसरे से दूर खिसकती हैं। जहां टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं, वहां ज्वालामुखियों की कतारें बनती हैं, जिन्हें ज्वालामुखीय चाप कहा जाता है। इन ज्वालामुखियों से जुड़ी पिघलन प्रक्रिया चट्टानों में लंबे समय से बंद कार्बन को मुक्त कर वायुमंडल में छोड़ती है। शोध के अनुसार वे क्षेत्र जहां टेक्टोनिक प्लेटें फैलती हैं भूगर्भीय समय में पृथ्वी के कार्बन चक्र को चलाने में कहीं अधिक अहम रहे हैं।
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समुद्र की तलछट की अहम भूमिका
इन मॉडलों की मदद से शोधकर्ताओं ने पिछले 540 मिलियन वर्षों में पृथ्वी के प्रमुख ग्रीनहाउस और आइसहाउस कालखंडों की भविष्यवाणी की। ग्रीनहाउस दौर में जब पृथ्वी अधिक गर्म थी कार्बन का उत्सर्जन, उसके अवशोषण से अधिक रहा। इसके उलट आइसहाउस काल में महासागरों द्वारा कार्बन को तलछट में कैद करने की प्रक्रिया हावी रही, जिससे वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड कम हुआ और वैश्विक ठंडक बढ़ी।

समुद्री सूक्ष्म जीवों ने कार्बन उत्सर्जन पर डाला प्रभाव
इतिहास में ज्वालामुखीय चापों से निकलने वाले कार्बन को सबसे बड़ा स्रोत माना गया, लेकिन शोध बताता है कि यह भूमिका मुख्य रूप से पिछले 120 मिलियन वर्षों में ही प्रमुख हुई। इसका कारण प्लैंक्टिक कैल्सिफायर्स नामक सूक्ष्म समुद्री जीव हैं, जो घुले हुए कार्बन को कैल्साइट में बदलकर समुद्र तल पर जमा करते हैं। ये जीव लगभग 200 मिलियन वर्ष पहले विकसित हुए और करीब 150 मिलियन वर्ष पहले महासागरों में व्यापक रूप से फैल गए। इन्हीं के कारण बाद के काल में ज्वालामुखीय चापों से निकलने वाला कार्बन अधिक दिखाई देता है। इससे पहले, मध्य-महासागरीय रिज और महाद्वीपीय दरारों से निकलने वाला कार्बन वायुमंडल पर ज्यादा असर डालता था।

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