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ये क्या! लाल किले का वजन घट गया, पर क्यों और कैसे?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 01 Jun 2018 03:02 PM IST
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लाल किला
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आपको जानकर हैरत हो सकती है कि मुगलकालीन ऐतिहासिक लाल किले का वजन कम हो गया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे हुआ ये नायाब कारनामा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने लाल किले की छत पर से 25 लाख किलोग्राम मिट्टी और धूल को हटा दिया है जो पिछले कुछ सालों के दौरान वहां जम गई थी।
एएसआई की टीम को कई जगहों पर दो मीटर जितनी ऊंची धूल की परतें मिली। एएसआई ने कहा कि काम समय के साथ पूरा हो गया क्योंकि किले के प्रचीर पर जमा हो गए धूल के वजन में उसके ढह जाने का खतरा था। यह किले का वह हिस्सा है जहां से प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देते हैं।
पेंटिंग को ढंके प्लास्टर हटेंगे
लाल किले में हो रहा यह मरम्मत कार्य सात महीने तक चलेगा। इस कार्यक्रम के तहत यहां पीने के पानी की सुविधा और सार्वजनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा टीम किले के अंदर कई दीवारों से प्लास्टर की परतों को भी हटाएगी, जिनके पीछे मुगलकाल की पेंटिंग लगी है। प्लास्टर की ये परतें धीरे-धीरे हटाई जाएंगी ताकि पेंटिंग को नुकसान न पहुंचे। इस पूरी परियोजना की लागत करीब 60 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
लाल किले में हो रहा यह मरम्मत कार्य सात महीने तक चलेगा। इस कार्यक्रम के तहत यहां पीने के पानी की सुविधा और सार्वजनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा टीम किले के अंदर कई दीवारों से प्लास्टर की परतों को भी हटाएगी, जिनके पीछे मुगलकाल की पेंटिंग लगी है। प्लास्टर की ये परतें धीरे-धीरे हटाई जाएंगी ताकि पेंटिंग को नुकसान न पहुंचे। इस पूरी परियोजना की लागत करीब 60 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
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एएसआई के दिल्ली सर्किल के प्रभारी एनके पाठक ने कहा, "लाहोरी गेट पर जमा मिट्टी की नमी के कारण किले की दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही थीं। अब तक गेट के दोनों तरफ से 25 लाख किलोग्राम मिट्टी हटा दी गई है। अब गेट पर सैंडस्टोन के स्लैब लगाए जाएंगे, ताकि नमी दीवार के अंदर न घुस पाए।"
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नजर रखने के लिए डलवाई मिट्टी
लगभग 100 साल पहले अंग्रेजों ने ऊंचाई बढ़ाने के लिए लाहौरी गेट और दिल्ली गेट के चारों ओर मिट्टी डलवाई थी ताकि चांदनी चौक पर नजर रखने के लिए उनके पास एक सुविधाजनक बिंदु हो। तब से यह मिट्टी वहां पड़ी हुई है और बीते कई दशकों के दौरान उस पर कई और परतें जम गई।
लगभग 100 साल पहले अंग्रेजों ने ऊंचाई बढ़ाने के लिए लाहौरी गेट और दिल्ली गेट के चारों ओर मिट्टी डलवाई थी ताकि चांदनी चौक पर नजर रखने के लिए उनके पास एक सुविधाजनक बिंदु हो। तब से यह मिट्टी वहां पड़ी हुई है और बीते कई दशकों के दौरान उस पर कई और परतें जम गई।