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Kathua News: डोगरी साहित्य में कठुआ के ठाकुर खजूर सिंह को अकादमी पुरस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 17 Mar 2026 03:04 AM IST
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ठाकुर खजूर सिंह को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार संवाद
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बोले- मेरे पुरखों, बुजुर्गों की दया और आशीर्वाद का परिणाम है
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। इस वर्ष के साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा में डोगरी भाषा के लिए कठुआ जिले के प्रसिद्ध साहित्यकार ठाकुर खजूर सिंह को सम्मानित किया गया है। उनकी चर्चित कृति ठाकुर सत्सयाले को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह कविता के रूप में लिखित उनके दोहे हैं।
अबतक अपनी डोगरी पगड़ी के साथ मंच पर डुग्गर लोकगीतों पर झूमते नजर आते खजूर सिंह को इस बार लेखन के लिए सम्मान मिला है। मूल रूप बसोहली के नगरोट प्रेहता पलासी गांव के रहने वाले ठाकुर खजूर सिंह का जन्म ग्रामीण परिवेश में हुआ, जहां डोगरी भाषा और डोगरा संस्कृति उनकी सांसों में रची-बसी थी। बचपन से ही गीत-संगीत, बांसुरी और लोक परंपराओं के प्रति उनका गहरा लगाव रहा। बकौल खजूर सिंह लोक संस्कृति से अपनत्व उन्हें विरासत में मिला। परिवार की सांस्कृतिक विरासत थी और माता-पिता के साथ चाची के गीतों ने उन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि बसोहली की मिट्टी ने उन्हें कलाकारों की परंपरा से जोड़ा। वहां के चित्रकारों, गायकों और नर्तकों की कला ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। यही प्रेरणा उनकी कविताओं, गीतों और गजलों में उतर आई। खजूर सिंह की पहली पुस्तक कविताओं पर आधारित थी। इसके बाद गीतों, गजलों और आलेखों की कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं। विशेष रूप से चार किताबें डोगरी गीतों पर आधारित हैं। दो किताबें कविताओं की और दो गजलों की हैं। उनकी रचनाओं में लोकधुनों और मातृभाषा के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। पुरस्कार मिलने पर उन्होंने कहा कि मां बोली ने मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया है। यह मेरे पुरखों और बुजुर्गों की दया और आशीर्वाद का परिणाम है।
बसोहली की मिट्टी ने मुझे कलाकारों की परंपरा से जोड़ा और वही मेरी लेखनी में उतर आया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत गौरव नहीं, बल्कि पूरे समाज और डोगरी भाषा का सम्मान है। ठाकुर खजूर सिंह ने संकल्प व्यक्त किया कि वे आगे भी डोगरी भाषा और संस्कृति को गीतों और लेखन के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करते रहेंगे।
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कठुआ। इस वर्ष के साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा में डोगरी भाषा के लिए कठुआ जिले के प्रसिद्ध साहित्यकार ठाकुर खजूर सिंह को सम्मानित किया गया है। उनकी चर्चित कृति ठाकुर सत्सयाले को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह कविता के रूप में लिखित उनके दोहे हैं।
अबतक अपनी डोगरी पगड़ी के साथ मंच पर डुग्गर लोकगीतों पर झूमते नजर आते खजूर सिंह को इस बार लेखन के लिए सम्मान मिला है। मूल रूप बसोहली के नगरोट प्रेहता पलासी गांव के रहने वाले ठाकुर खजूर सिंह का जन्म ग्रामीण परिवेश में हुआ, जहां डोगरी भाषा और डोगरा संस्कृति उनकी सांसों में रची-बसी थी। बचपन से ही गीत-संगीत, बांसुरी और लोक परंपराओं के प्रति उनका गहरा लगाव रहा। बकौल खजूर सिंह लोक संस्कृति से अपनत्व उन्हें विरासत में मिला। परिवार की सांस्कृतिक विरासत थी और माता-पिता के साथ चाची के गीतों ने उन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया।
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उन्होंने बताया कि बसोहली की मिट्टी ने उन्हें कलाकारों की परंपरा से जोड़ा। वहां के चित्रकारों, गायकों और नर्तकों की कला ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। यही प्रेरणा उनकी कविताओं, गीतों और गजलों में उतर आई। खजूर सिंह की पहली पुस्तक कविताओं पर आधारित थी। इसके बाद गीतों, गजलों और आलेखों की कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं। विशेष रूप से चार किताबें डोगरी गीतों पर आधारित हैं। दो किताबें कविताओं की और दो गजलों की हैं। उनकी रचनाओं में लोकधुनों और मातृभाषा के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। पुरस्कार मिलने पर उन्होंने कहा कि मां बोली ने मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया है। यह मेरे पुरखों और बुजुर्गों की दया और आशीर्वाद का परिणाम है।
बसोहली की मिट्टी ने मुझे कलाकारों की परंपरा से जोड़ा और वही मेरी लेखनी में उतर आया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत गौरव नहीं, बल्कि पूरे समाज और डोगरी भाषा का सम्मान है। ठाकुर खजूर सिंह ने संकल्प व्यक्त किया कि वे आगे भी डोगरी भाषा और संस्कृति को गीतों और लेखन के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करते रहेंगे।