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Kathua News: पानी की किल्लत से लोग परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 17 Mar 2026 03:05 AM IST
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पानी की समस्या से जूझ रही इलाके की 200 के करीब आबादी
रामकोट। तहसील रामकोट की पंचायत कछेड़ के मुदाल में पेयजल किल्लत से लोग परेशान हैं। तहसील मुख्यालय रामकोट से यह इलाका करीब पांच किलोमीटर दूर है। 15 साल पहले यहां संबंधी विभाग की ओर से लगभग हर घर में नल तो लगाए गए हैं लेकिन तीन साल से उनमें पेयजल आपूर्ति ठप है। इस कारण इलाके की 200 के करीब आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है।
स्थानीय पूर्व नायब सरपंच जगदेव सिंह ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत इलाके में पाइप लाइन तो बिछाई गई लेकिन पानी के स्रोत नजदीक नहीं होने के कारण लोगों के घरों तक पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है और मौजूदा समय में ज्यादातर नजदीकी प्राकृतिक स्रोत मैं भी पानी कम हो गया है और इस कारण लोग पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन परियोजना भी लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम रही है। वह संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार पानी की समस्या सुलझाने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद पेयजल व्यवस्था ठप है।
पंचायत कछेड़ से पूर्व सरपंच रमेश चंद्र, राजेंद्र प्रसाद, स्वर्ण सिंह, मास्टर बलदेव सिंह, पूर्व नायब सरपंच जगदेव सिंह, अमीरचंद, सूबेदार हुकुम सिंह, दर्शन सिंह आदि ने बताया कि गांव के नजदीक कोई प्राकृतिक जल स्रोत भी उपलब्ध नहीं है, जिस कारण लोग एक से दो किलोमीटर दूरी तक पैदल चलकर सिर पर पानी ढोने के लिए मजबूर हैं।
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स्थानीय पूर्व नायब सरपंच जगदेव सिंह ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत इलाके में पाइप लाइन तो बिछाई गई लेकिन पानी के स्रोत नजदीक नहीं होने के कारण लोगों के घरों तक पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है और मौजूदा समय में ज्यादातर नजदीकी प्राकृतिक स्रोत मैं भी पानी कम हो गया है और इस कारण लोग पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन परियोजना भी लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम रही है। वह संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार पानी की समस्या सुलझाने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद पेयजल व्यवस्था ठप है।
पंचायत कछेड़ से पूर्व सरपंच रमेश चंद्र, राजेंद्र प्रसाद, स्वर्ण सिंह, मास्टर बलदेव सिंह, पूर्व नायब सरपंच जगदेव सिंह, अमीरचंद, सूबेदार हुकुम सिंह, दर्शन सिंह आदि ने बताया कि गांव के नजदीक कोई प्राकृतिक जल स्रोत भी उपलब्ध नहीं है, जिस कारण लोग एक से दो किलोमीटर दूरी तक पैदल चलकर सिर पर पानी ढोने के लिए मजबूर हैं।