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Kathua News: सनातन धर्म सभा ने विक्रमी संवत नववर्ष मनाने का किया आह्वान
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 17 Mar 2026 03:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सनातन धर्म सभा ने आने वाली 19 मार्च को विक्रमी संवत नववर्ष प्रतिपदा को धूमधाम से मनाने का आह्वान किया है। सोमवार को सभा के कठुआ अध्यक्ष दिवाकर शर्मा ने बताया कि इस दिन का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से विक्रमी संवत की शुरुआत हुई थी। महाराजा विक्रमादित्य ने इसी संवत को राज्यकाल में प्रारंभ किया था जो आज भी हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह अवसर हमारी संस्कृति और परंपराओं को याद करने का है। उन्होंने सभी मंदिरों, मठों और संत-महंतों से अपील की है कि वे अपने-अपने मंदिरों को सजाएं, प्रसाद की व्यवस्था करें और नववर्ष का स्वागत करें। उन्होंने कहा कि यह हमारा वास्तविक हिंदू नववर्ष है, जो जनवरी से नहीं बल्कि प्रतिपदा से प्रारंभ होता है।
दिवाकर शर्मा ने समाज के सभी वर्गों बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों से आग्रह किया कि वे इस दिन अपनी परंपराओं को जीवित रखें और आने वाली पीढ़ियों को भी बताएं कि हमारा नववर्ष विक्रमी संवत से शुरू होता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभा का उद्देश्य है कि लोग अपनी संस्कृति और मान्यताओं को अपनाकर समाज में एकता और धार्मिक चेतना को आगे बढ़ाएं।
वहीं, इस मौके पर गो सम्मान आह्वान अभियान से जुड़े शशि शर्मा ने कहा कि हजारों वर्ष की दासता के बाद अब वह स्थिति वापस आई है जिसमें हम अपनी संस्कृति और धर्म की परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए पहल कर सकते हैं। लिहाजा हम सबको इसके लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने गो को भारतीय संस्कृति का मूल बताते हुए कहा कि आगामी 27 अप्रैल को देश भर की 5 हजार के करीब तहसीलों में तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा जा रहा है। उन्होंने हर गो भक्त से इस अभियान का हिस्सा बनने के लिए आगे आने को कहा।
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कठुआ। सनातन धर्म सभा ने आने वाली 19 मार्च को विक्रमी संवत नववर्ष प्रतिपदा को धूमधाम से मनाने का आह्वान किया है। सोमवार को सभा के कठुआ अध्यक्ष दिवाकर शर्मा ने बताया कि इस दिन का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से विक्रमी संवत की शुरुआत हुई थी। महाराजा विक्रमादित्य ने इसी संवत को राज्यकाल में प्रारंभ किया था जो आज भी हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह अवसर हमारी संस्कृति और परंपराओं को याद करने का है। उन्होंने सभी मंदिरों, मठों और संत-महंतों से अपील की है कि वे अपने-अपने मंदिरों को सजाएं, प्रसाद की व्यवस्था करें और नववर्ष का स्वागत करें। उन्होंने कहा कि यह हमारा वास्तविक हिंदू नववर्ष है, जो जनवरी से नहीं बल्कि प्रतिपदा से प्रारंभ होता है।
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दिवाकर शर्मा ने समाज के सभी वर्गों बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों से आग्रह किया कि वे इस दिन अपनी परंपराओं को जीवित रखें और आने वाली पीढ़ियों को भी बताएं कि हमारा नववर्ष विक्रमी संवत से शुरू होता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभा का उद्देश्य है कि लोग अपनी संस्कृति और मान्यताओं को अपनाकर समाज में एकता और धार्मिक चेतना को आगे बढ़ाएं।
वहीं, इस मौके पर गो सम्मान आह्वान अभियान से जुड़े शशि शर्मा ने कहा कि हजारों वर्ष की दासता के बाद अब वह स्थिति वापस आई है जिसमें हम अपनी संस्कृति और धर्म की परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए पहल कर सकते हैं। लिहाजा हम सबको इसके लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने गो को भारतीय संस्कृति का मूल बताते हुए कहा कि आगामी 27 अप्रैल को देश भर की 5 हजार के करीब तहसीलों में तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा जा रहा है। उन्होंने हर गो भक्त से इस अभियान का हिस्सा बनने के लिए आगे आने को कहा।