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Kathua News: सेवा चरण-तीन पनबिजली परियोजना के लिए कवायद तेज
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 31 Mar 2026 03:00 AM IST
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सेवा परियोजना का जलाशय फाइल फोटो
- फोटो : Family
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अप्रैल के अंत तक पीपीपी मोड से तैयार होगी संशोधित डीपीआर
लेन देन सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू
2013 से ठप है परियोजना
फोटो सहित
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सेवा चरण-तीन पनबिजली परियोजना के लिए कवायद तेज हो गई है। अगले महीने तक इसकी संशोधित डीपीआर आईआईटी रुड़की से बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद परियोजना लागत पर फैसला लेकर सरकार इसे पीपीपी मोड पर शुरू करने की तैयारी में है। फिलहाल लेन देन सलाहकार की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
प्रदेश सरकार की यह पनबिजली परियोजना अगस्त 2013 में भारी बारिश के बीच नहर को हुए नुकसान के बाद से ठप पड़ी है। परियोजना का निर्माण वर्ष 1993 में शुरू कर 25 जून 2002 को चालू किया गया था। बाढ़ और भूस्खलन के चलते नहर का एक हिस्सा टूट गया था जिसके बाद कई वर्ष तक टरबाइन तक पानी पहुंचने का जरिया ही बंद रहा। वर्षों बाद जब सरकार ने सुध ली तो पता चला कि परियोजना ही खंडहर बन चुकी है। इसके बाद से बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप है।
प्रदेश सरकार ने बसोहली विधायक ठाकुर दर्शन सिंह के सवाल पर सदन में जवाब दिया कि परियोजना की मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए आईआईटी रुड़की को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य सौंपा गया। वर्ष 2022 में सौंपी गई डीपीआर में कुल लागत 66.43 करोड़ रुपये आंकी गई। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया। नई सरकार बनी तो सितंबर 2025 में डीपीआर का संशोधन कार्य दोबारा आईआईटी रुड़की को सौंपा गया और संशोधित रिपोर्ट अप्रैल 2026 के अंत तक आने की संभावना है। 7 अप्रैल 2025 को सीआईटीएजी (शासन में नवाचार और परिवर्तन केंद्र) की बैठक में निर्णय लिया गया कि परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत लिया जाएगा। इसके लिए लेन-देन सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह सलाहकार निविदा दस्तावेज तैयार कर उपयुक्त डेवलपर का चयन करेगा।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि परियोजना के संचालन में कोई प्रशासनिक देरी नहीं है। यह केवल प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के कारण बंद है। संशोधित डीपीआर के बाद डेवलपर चयनित कर विकास कार्य शुरू किया जाएगा और परियोजना को जल्द ही दोबारा संचालन में लाने का प्रयास किया जाएगा। इस परियोजना के दोबारा शुरू होने से प्रदेश सरकार को नौ मेगावॉट बिजली अपने ही स्त्रोतों से हासिल हो सकेगी। यह बिजली स्थानीय विकास के साथ साथ औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी।
कोट
हट्ट गांव में स्थित सेवा तीन पनबिजली परियोजना क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर बिजली संकट को कम कर सकती है। 13 साल से ठप पड़ी इस परियोजना को लेकर सरकार का ध्यान लाने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि डीपीआर मिलते ही सरकार इसे मंजूरी देकर काम शुरू करवा देगी।
- ठाकुर दर्शन सिंह, विधायक बसोहली
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लेन देन सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू
2013 से ठप है परियोजना
फोटो सहित
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सेवा चरण-तीन पनबिजली परियोजना के लिए कवायद तेज हो गई है। अगले महीने तक इसकी संशोधित डीपीआर आईआईटी रुड़की से बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद परियोजना लागत पर फैसला लेकर सरकार इसे पीपीपी मोड पर शुरू करने की तैयारी में है। फिलहाल लेन देन सलाहकार की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
प्रदेश सरकार की यह पनबिजली परियोजना अगस्त 2013 में भारी बारिश के बीच नहर को हुए नुकसान के बाद से ठप पड़ी है। परियोजना का निर्माण वर्ष 1993 में शुरू कर 25 जून 2002 को चालू किया गया था। बाढ़ और भूस्खलन के चलते नहर का एक हिस्सा टूट गया था जिसके बाद कई वर्ष तक टरबाइन तक पानी पहुंचने का जरिया ही बंद रहा। वर्षों बाद जब सरकार ने सुध ली तो पता चला कि परियोजना ही खंडहर बन चुकी है। इसके बाद से बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप है।
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प्रदेश सरकार ने बसोहली विधायक ठाकुर दर्शन सिंह के सवाल पर सदन में जवाब दिया कि परियोजना की मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए आईआईटी रुड़की को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य सौंपा गया। वर्ष 2022 में सौंपी गई डीपीआर में कुल लागत 66.43 करोड़ रुपये आंकी गई। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया। नई सरकार बनी तो सितंबर 2025 में डीपीआर का संशोधन कार्य दोबारा आईआईटी रुड़की को सौंपा गया और संशोधित रिपोर्ट अप्रैल 2026 के अंत तक आने की संभावना है। 7 अप्रैल 2025 को सीआईटीएजी (शासन में नवाचार और परिवर्तन केंद्र) की बैठक में निर्णय लिया गया कि परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत लिया जाएगा। इसके लिए लेन-देन सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह सलाहकार निविदा दस्तावेज तैयार कर उपयुक्त डेवलपर का चयन करेगा।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि परियोजना के संचालन में कोई प्रशासनिक देरी नहीं है। यह केवल प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के कारण बंद है। संशोधित डीपीआर के बाद डेवलपर चयनित कर विकास कार्य शुरू किया जाएगा और परियोजना को जल्द ही दोबारा संचालन में लाने का प्रयास किया जाएगा। इस परियोजना के दोबारा शुरू होने से प्रदेश सरकार को नौ मेगावॉट बिजली अपने ही स्त्रोतों से हासिल हो सकेगी। यह बिजली स्थानीय विकास के साथ साथ औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी।
कोट
हट्ट गांव में स्थित सेवा तीन पनबिजली परियोजना क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर बिजली संकट को कम कर सकती है। 13 साल से ठप पड़ी इस परियोजना को लेकर सरकार का ध्यान लाने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि डीपीआर मिलते ही सरकार इसे मंजूरी देकर काम शुरू करवा देगी।
- ठाकुर दर्शन सिंह, विधायक बसोहली