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Kathua News: संजीवनी बूटी लाए हनुमान, दर्शकों ने लगाए जय श्रीराम के जयकारे
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 31 Mar 2026 02:58 AM IST
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बसोहली के धार महानपुर में रामलीला के दृश्य प्रस्तुत करते कलाकार जागरूक पाठक
- फोटो : samvad
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। चैत्र नवरात्र से धार-महानपुर में शुरू होने वाली रामलीला का मंचन जारी है। अंतिम दौर की ओर बढ़ रहे इस आयोजन में रामलीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। इसके चलते रामलीला के कलाकारों ने अपनी अदाकारी, संवाद और भाव-भंगिमा से दर्शकों को ऐसा अनुभव कराया मानो वे स्वयं युद्धक्षेत्र में उपस्थित हों।
बीती रविवार की रात रामलीला मंचन में दर्शकों ने धर्मयुद्ध के रोमांचक प्रसंगों का सजीव चित्रण देखा। मंचन की शुरुआत लक्ष्मण मूर्छा के दृश्य से हुई, जिसमें लंकापति रावण पुत्र मेघनाथ के प्रहार से लक्ष्मण भूमि पर गिरकर अचेत हो जाते हैं। इस संकट की घड़ी में हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने का दायित्व सौंपा जाता है। पर्वत उठाकर संजीवनी बूटी लाने का दृश्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा।
इसके बाद मेघनाथ वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। राम के आदेश पर लक्ष्मण ने मेघनाथ का सामना किया और धर्म-अधर्म के संघर्ष में अंततः मेघनाथ का वध हुआ। इस दृश्य ने दर्शकों को युद्ध की गंभीरता और धर्म की विजय का संदेश दिया। मंचन का चरम बिंदु कुंभकर्ण वध रहा। रावण का भाई कुंभकर्ण अपनी विशाल काया और प्रचंड शक्ति के साथ रणभूमि में उतरा। राम और वानर सेना के साथ हुए भीषण युद्ध में अंततः कुंभकर्ण का वध हुआ। इस प्रसंग ने दर्शकों को धर्म की अजेय शक्ति का बोध कराया और उन्होंने जय श्री राम का उद्घोष कर अपनी खुशी का इजहार किया।
आयोजक अर्जुन सिंह ने बताया कि पिछले दस दिन से जारी रामलीला मंचन के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की इस धरा पर की गई लीला का प्रदर्शन किया गया है जिसे दर्शकों ने खूब सराहा है। उन्होंने बताया कि सोमवार को रामलीला मंचन के अंतिम दिन रावण वध और भगवान के राजतिलक का दृश्य पेश किया जाएगा। इसके साथ ही रामलीला का आयोजन संपन्न होगा।
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कठुआ। चैत्र नवरात्र से धार-महानपुर में शुरू होने वाली रामलीला का मंचन जारी है। अंतिम दौर की ओर बढ़ रहे इस आयोजन में रामलीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। इसके चलते रामलीला के कलाकारों ने अपनी अदाकारी, संवाद और भाव-भंगिमा से दर्शकों को ऐसा अनुभव कराया मानो वे स्वयं युद्धक्षेत्र में उपस्थित हों।
बीती रविवार की रात रामलीला मंचन में दर्शकों ने धर्मयुद्ध के रोमांचक प्रसंगों का सजीव चित्रण देखा। मंचन की शुरुआत लक्ष्मण मूर्छा के दृश्य से हुई, जिसमें लंकापति रावण पुत्र मेघनाथ के प्रहार से लक्ष्मण भूमि पर गिरकर अचेत हो जाते हैं। इस संकट की घड़ी में हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने का दायित्व सौंपा जाता है। पर्वत उठाकर संजीवनी बूटी लाने का दृश्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा।
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इसके बाद मेघनाथ वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। राम के आदेश पर लक्ष्मण ने मेघनाथ का सामना किया और धर्म-अधर्म के संघर्ष में अंततः मेघनाथ का वध हुआ। इस दृश्य ने दर्शकों को युद्ध की गंभीरता और धर्म की विजय का संदेश दिया। मंचन का चरम बिंदु कुंभकर्ण वध रहा। रावण का भाई कुंभकर्ण अपनी विशाल काया और प्रचंड शक्ति के साथ रणभूमि में उतरा। राम और वानर सेना के साथ हुए भीषण युद्ध में अंततः कुंभकर्ण का वध हुआ। इस प्रसंग ने दर्शकों को धर्म की अजेय शक्ति का बोध कराया और उन्होंने जय श्री राम का उद्घोष कर अपनी खुशी का इजहार किया।
आयोजक अर्जुन सिंह ने बताया कि पिछले दस दिन से जारी रामलीला मंचन के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की इस धरा पर की गई लीला का प्रदर्शन किया गया है जिसे दर्शकों ने खूब सराहा है। उन्होंने बताया कि सोमवार को रामलीला मंचन के अंतिम दिन रावण वध और भगवान के राजतिलक का दृश्य पेश किया जाएगा। इसके साथ ही रामलीला का आयोजन संपन्न होगा।