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Kathua News: युवा पीढ़ी संस्कृत का ज्ञान नहीं रखेगी तो मिट जाएगी देश की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 28 Apr 2026 03:06 AM IST
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योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी
- फोटो : samvad
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वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय चार वेदों के यज्ञ पर योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप ने
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय चार वेदों के यज्ञ पर योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप ने वेदों पर आधारित प्रवचन दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नई पीढ़ी संस्कृत का ज्ञान नहीं रखेगी तो हमारी संस्कृति और भारतीय पहचान मिट जाएगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था की जाए।
स्वामी ने कहा कि वर्तमान सृष्टि का आरंभ लगभग 1,96,08,53,127 वर्ष पूर्व हुआ था। सृष्टि के आरंभ से पहले प्रलय काल था जब न जीव थे न कोई वस्तु। उस समय कोई गुरु भी नहीं था जो ज्ञान दे सके इसलिए वेदों के अनुसार प्रथम गुरु स्वयं परमेश्वर हैं।
उन्होंने बताया कि परमेश्वर ही गुरु के भी गुरु हैं क्योंकि वे मृत्यु से परे हैं। सृष्टि के आरंभ में परमेश्वर ने शक्ति से चार ऋषियों के हृदय में वेदों का ज्ञान संस्कृत भाषा में प्रकट किया। यही भाषा देववाणी कहलाती है। संस्कृत कोई मानव निर्मित भाषा नहीं है बल्कि ईश्वर प्रदत्त दिव्य भाषा है। भारतीय संस्कृति का संपूर्ण खजाना इसी भाषा में सुरक्षित है। उपनिषद, दर्शन, रामायण, महाभारत और गीता सभी संस्कृत में रचे गए हैं।
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कठुआ। वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय चार वेदों के यज्ञ पर योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप ने वेदों पर आधारित प्रवचन दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नई पीढ़ी संस्कृत का ज्ञान नहीं रखेगी तो हमारी संस्कृति और भारतीय पहचान मिट जाएगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था की जाए।
स्वामी ने कहा कि वर्तमान सृष्टि का आरंभ लगभग 1,96,08,53,127 वर्ष पूर्व हुआ था। सृष्टि के आरंभ से पहले प्रलय काल था जब न जीव थे न कोई वस्तु। उस समय कोई गुरु भी नहीं था जो ज्ञान दे सके इसलिए वेदों के अनुसार प्रथम गुरु स्वयं परमेश्वर हैं।
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उन्होंने बताया कि परमेश्वर ही गुरु के भी गुरु हैं क्योंकि वे मृत्यु से परे हैं। सृष्टि के आरंभ में परमेश्वर ने शक्ति से चार ऋषियों के हृदय में वेदों का ज्ञान संस्कृत भाषा में प्रकट किया। यही भाषा देववाणी कहलाती है। संस्कृत कोई मानव निर्मित भाषा नहीं है बल्कि ईश्वर प्रदत्त दिव्य भाषा है। भारतीय संस्कृति का संपूर्ण खजाना इसी भाषा में सुरक्षित है। उपनिषद, दर्शन, रामायण, महाभारत और गीता सभी संस्कृत में रचे गए हैं।

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