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Kathua News: श्रद्धालुओं को धरती माता के महत्व का उपदेश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 03 May 2026 02:10 AM IST
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स्वामी राम स्वरूप, योगाचार्य
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वेद मंदिर में जारी 78 दिवसीय यज्ञानुष्ठान जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के दौरान योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद मंत्रों की व्याख्या की। उन्होंने श्रद्धालुओं को पृथ्वी माता के महत्व का उपदेश दिया।
उन्होंने बताया कि हमारी पृथ्वी चारों दिशाओं पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में अन्न, फल-फूल और जड़ी-बूटियों का उत्पादन करती है। यही पृथ्वी सभी जीवों का पालन-पोषण करती है और हमें दूध देने वाले पशु, अन्न और सुख-सुविधाएं प्रदान करती है।
स्वामी जी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने इसी मातृभूमि पर महान कर्म किए और सुख पाया। उन्होंने असुरों को पराजित कर धर्म की रक्षा की। ऐसी सुखदायी पृथ्वी हमें बल, तेज और ऐश्वर्य प्रदान करती है।
उन्होंने अथर्ववेद मंत्र 12/1/12 का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर ने मनुष्यों को उपदेश दिया है माता भूमिः पुत्रो अहम् पृथिव्याः अर्थात् पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं। इसलिए हमें पृथ्वी की रक्षा करनी चाहिए।
स्वामी जी ने बताया कि लगभग 1 अरब 96 करोड़ वर्ष पूर्व जब ईश्वर ने इस पवित्र भूमि की रचना की थी, तब मनुष्यों को आर्य और अनार्य की संज्ञा दी गई थी। उस समय आज की तरह अलग-अलग धर्म और मत-मतान्तर नहीं थे। उन्होंने बताया कि आर्य का अर्थ है उत्तम और सज्जन मनुष्य है जबकि अनार्य का अर्थ है असुर वृत्ति वाले दुष्ट मनुष्य है।
उन्होंने कहा कि हमें धन, सुख और शांति प्राप्त करने के लिए विद्वानों की शरण में जाकर वेद ज्ञान सुनना चाहिए। यही मार्ग हमें ईश्वर के बनाए नियमों को समझने और जीवन को श्रेष्ठ बनाने में सहायक होगा।
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कठुआ। वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के दौरान योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद मंत्रों की व्याख्या की। उन्होंने श्रद्धालुओं को पृथ्वी माता के महत्व का उपदेश दिया।
उन्होंने बताया कि हमारी पृथ्वी चारों दिशाओं पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में अन्न, फल-फूल और जड़ी-बूटियों का उत्पादन करती है। यही पृथ्वी सभी जीवों का पालन-पोषण करती है और हमें दूध देने वाले पशु, अन्न और सुख-सुविधाएं प्रदान करती है।
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स्वामी जी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने इसी मातृभूमि पर महान कर्म किए और सुख पाया। उन्होंने असुरों को पराजित कर धर्म की रक्षा की। ऐसी सुखदायी पृथ्वी हमें बल, तेज और ऐश्वर्य प्रदान करती है।
उन्होंने अथर्ववेद मंत्र 12/1/12 का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर ने मनुष्यों को उपदेश दिया है माता भूमिः पुत्रो अहम् पृथिव्याः अर्थात् पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं। इसलिए हमें पृथ्वी की रक्षा करनी चाहिए।
स्वामी जी ने बताया कि लगभग 1 अरब 96 करोड़ वर्ष पूर्व जब ईश्वर ने इस पवित्र भूमि की रचना की थी, तब मनुष्यों को आर्य और अनार्य की संज्ञा दी गई थी। उस समय आज की तरह अलग-अलग धर्म और मत-मतान्तर नहीं थे। उन्होंने बताया कि आर्य का अर्थ है उत्तम और सज्जन मनुष्य है जबकि अनार्य का अर्थ है असुर वृत्ति वाले दुष्ट मनुष्य है।
उन्होंने कहा कि हमें धन, सुख और शांति प्राप्त करने के लिए विद्वानों की शरण में जाकर वेद ज्ञान सुनना चाहिए। यही मार्ग हमें ईश्वर के बनाए नियमों को समझने और जीवन को श्रेष्ठ बनाने में सहायक होगा।
