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मंदिरों का संचालन संत समाज और स्थानीय हिंदू समाज के हाथों में ही होना चाहिए : विहिप
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 21 Mar 2026 02:15 AM IST
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हीरानगर में किले वाली माता मंदिर विवाद गरमाया, विहिप प्रदेश अध्यक्ष ने की महंत से मुलाकात
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। हीरानगर स्थित किले वाली माता मंदिर को लेकर चल रहा विवाद अब और अधिक गरमा गया है। मंदिर के संभावित अधिग्रहण के विरोध में शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने महंत कृष्णानंद सरस्वती महाराज से अहम मुलाकात की।
हीरानगर इकाई की विश्व हिंदू परिषद की पूरी टीम भी मौके पर मौजूद रही और सभी ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। बैठक में मंदिर प्रबंधन और उसके अधिकार को लेकर गहन चर्चा की गई। मुलाकात के बाद राजकुमार गुप्ता ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद शुरू से ही इस बात के पक्ष में रही है कि मंदिरों का संचालन संत समाज और स्थानीय हिंदू समाज के हाथों में ही होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों के संचालन में सरकार या प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि परिषद इस मुद्दे पर संतों के साथ खड़ी है और मंदिर अधिग्रहण के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, लेकिन संगठन का रुख स्पष्ट है कि मंदिरों की व्यवस्था समाज और संतों के अधीन ही रहनी चाहिए।
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कठुआ। हीरानगर स्थित किले वाली माता मंदिर को लेकर चल रहा विवाद अब और अधिक गरमा गया है। मंदिर के संभावित अधिग्रहण के विरोध में शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने महंत कृष्णानंद सरस्वती महाराज से अहम मुलाकात की।
हीरानगर इकाई की विश्व हिंदू परिषद की पूरी टीम भी मौके पर मौजूद रही और सभी ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। बैठक में मंदिर प्रबंधन और उसके अधिकार को लेकर गहन चर्चा की गई। मुलाकात के बाद राजकुमार गुप्ता ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद शुरू से ही इस बात के पक्ष में रही है कि मंदिरों का संचालन संत समाज और स्थानीय हिंदू समाज के हाथों में ही होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों के संचालन में सरकार या प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि परिषद इस मुद्दे पर संतों के साथ खड़ी है और मंदिर अधिग्रहण के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, लेकिन संगठन का रुख स्पष्ट है कि मंदिरों की व्यवस्था समाज और संतों के अधीन ही रहनी चाहिए।
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