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Kathua News: डोगरी शिक्षा में उदासीनता, स्कूली स्तर पर वैकल्पिक व उच्च शिक्षा में कम रुझान
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 01 Apr 2026 02:03 AM IST
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- नीति और व्यवहार में अंतर के कारण हाशिए पर जा रही है डोगरी शिक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुूआ। नई शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने की बात कही गई है लेकिन जिले में डोगरी शिक्षा की स्थिति इसके विपरीत है। स्कूल के स्तर पर यह केवल अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाई जा रही है जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों का रुझान काफी कम है।
जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी केवल कृष्ण के अनुसार जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों में डोगरी पढ़ाने की व्यवस्था की है लेकिन इसे अनिवार्य विषय नहीं बनाया गया। विभाग ने प्रयास स्वरूप कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं और सभी सरकारी व निजी स्कूलों में डोगरी की कक्षाओं का संचालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद कॉलेज स्तर पर स्थिति चिंताजनक है।
कठुआ के राजकीय डिग्री कॉलेज में इस बार प्रथम वर्ष में केवल 8 विद्यार्थियों ने डोगरी मुख्य विषय में दाखिला लिया है जबकि 30 विद्यार्थियों को अनिवार्य डोगरी पढ़ाई जा रही है। राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में हालात और खराब हैं यहां मुख्य विषय के रूप में एक भी दाखिला नहीं हुआ। केवल 10 छात्राओं ने इसे माइनर विषय के रूप में चुना है।
कोट
भाषा, संस्कृति और कला किसी क्षेत्र की पहचान होती है लेकिन कठुआ में मातृभाषा डोगरी के प्रति रुझान लगातार घट रहा है। इसका प्रमुख कारण रोजगार की सीमित संभावनाएं और स्कूल स्तर पर डोगरी का अनिवार्य न होना है। निजी स्कूलों से आने वाले अधिकांश विद्यार्थी डोगरी से पूरी तरह अनजान रहते हैं जिससे कॉलेज स्तर पर इसे पढ़ना उनके लिए कठिन हो जाता है।
- मीना शर्मा, डोगरी विभागाध्यक्ष, राजकीय डिग्री कॉलेज
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कठुूआ। नई शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने की बात कही गई है लेकिन जिले में डोगरी शिक्षा की स्थिति इसके विपरीत है। स्कूल के स्तर पर यह केवल अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाई जा रही है जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों का रुझान काफी कम है।
जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी केवल कृष्ण के अनुसार जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों में डोगरी पढ़ाने की व्यवस्था की है लेकिन इसे अनिवार्य विषय नहीं बनाया गया। विभाग ने प्रयास स्वरूप कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं और सभी सरकारी व निजी स्कूलों में डोगरी की कक्षाओं का संचालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद कॉलेज स्तर पर स्थिति चिंताजनक है।
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कठुआ के राजकीय डिग्री कॉलेज में इस बार प्रथम वर्ष में केवल 8 विद्यार्थियों ने डोगरी मुख्य विषय में दाखिला लिया है जबकि 30 विद्यार्थियों को अनिवार्य डोगरी पढ़ाई जा रही है। राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में हालात और खराब हैं यहां मुख्य विषय के रूप में एक भी दाखिला नहीं हुआ। केवल 10 छात्राओं ने इसे माइनर विषय के रूप में चुना है।
कोट
भाषा, संस्कृति और कला किसी क्षेत्र की पहचान होती है लेकिन कठुआ में मातृभाषा डोगरी के प्रति रुझान लगातार घट रहा है। इसका प्रमुख कारण रोजगार की सीमित संभावनाएं और स्कूल स्तर पर डोगरी का अनिवार्य न होना है। निजी स्कूलों से आने वाले अधिकांश विद्यार्थी डोगरी से पूरी तरह अनजान रहते हैं जिससे कॉलेज स्तर पर इसे पढ़ना उनके लिए कठिन हो जाता है।
- मीना शर्मा, डोगरी विभागाध्यक्ष, राजकीय डिग्री कॉलेज