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Kathua News: वेतन कटौती से थमी स्वास्थ्य व्यवस्था की धड़कन
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 02 Apr 2026 01:34 AM IST
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जीएमसी कठुआ परिसर में प्रदर्शन करते स्वास्थ्य कर्मीसंवाद
- फोटो : Archive
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फॉलोअप मरीज दरबदर, प्लास्टर कटवाने आने वालों को मिली अब सेवाएं बहाल होने का इंतजार
कर्मचारियों ने जीएमसी समेत अन्य सीएचसी में ओपीडी ब्लॉक के सामने किया धरना प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। ढाई दिन की वेतन कटौती के फैसले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की धड़कन को थाम दिया है। विरोध में उतरे स्वास्थ्य कर्मियों ने 72 घंटे की हड़ताल छेड़ दी है जिससे अस्पतालों की रफ्तार धीमी पड़ गई है और मरीजों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं।
बुधवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने जीएमसी समेत अन्य सीएचसी में ओपीडी ब्लॉक के सामने धरना प्रदर्शन कर ओपीडी और आईपीडी सहित अन्य जरूरी सेवाओं को ठप रखा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों ने भी हड़ताल को समर्थन देते हुए आंदोलन को और तेज कर दिया है। हड़ताल के पहले दिन जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर साफ दिखाई दिया। पूरा दिन जहां ओपीडी और आईपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं।
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशान फॉलोअप मरीज दिखाई दिए जो दिनभर दरबदर होते रहे। कोई प्लास्टर कटवाने से पहले ओपीडी में फॉलोअप चेकअप करवाने आया था, तो कोई ऑपरेशन के बाद आ रही दिक्कतों का डॉक्टरों से समाधान चाहता था। दिन भर यह मरीज ओपीडी के बाहर सेवाएं बहाल करने का इंतजार करते रहे।
इस दौरान जीएमसी की इमरजेंसी सेवाएं चालू रही, लेकिन वहां भी मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। सीमित स्टाफ के चलते किसी को समय पर इलाज नहीं मिल पाया तो कोई बिना इलाज के ही लौट गया। जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन ज्वाइंट एक्शन कमेटी के जिला अध्यक्ष नीरज मलागर ने सरकार के ढाई दिन के वेतन की कटौती के फैसला को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य कर्मी छुट्टी के दिन अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जीएमसी प्रशासन लगातार डयूटी रोस्टर बना रहा है तो कर्मचारी वेतन कैसे छोड़ सकते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन की आलोचना की जिसमें मंत्री ने कमेटी बनाकर हल निकालने की घोषणा की थी। महात्मा गांधी जच्चा बच्चा अस्पताल परिसर में भी स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रदर्शन किया।
हड़ताल में उतरे एनएचएम कर्मी
एनएचएम कर्मचारी स्वास्थ्य कर्मियों के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य कर्मियों को ढाई दिन का वेतन देने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने सरकार से एनएचएम कर्मियों का वेतन बढ़ाने, समय पर वेतन देने और नियमितीकरण की गुहार लगाई। डॉक्टरों का कहना है कि अगर एनएचएम कर्मचारी तीन दिन तक हड़ताल पर रहते हैं तो इसका सीधा असर उपजिला अस्पतालों और ग्रामीण इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।
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कर्मचारियों ने जीएमसी समेत अन्य सीएचसी में ओपीडी ब्लॉक के सामने किया धरना प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। ढाई दिन की वेतन कटौती के फैसले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की धड़कन को थाम दिया है। विरोध में उतरे स्वास्थ्य कर्मियों ने 72 घंटे की हड़ताल छेड़ दी है जिससे अस्पतालों की रफ्तार धीमी पड़ गई है और मरीजों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं।
बुधवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने जीएमसी समेत अन्य सीएचसी में ओपीडी ब्लॉक के सामने धरना प्रदर्शन कर ओपीडी और आईपीडी सहित अन्य जरूरी सेवाओं को ठप रखा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों ने भी हड़ताल को समर्थन देते हुए आंदोलन को और तेज कर दिया है। हड़ताल के पहले दिन जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर साफ दिखाई दिया। पूरा दिन जहां ओपीडी और आईपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं।
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अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशान फॉलोअप मरीज दिखाई दिए जो दिनभर दरबदर होते रहे। कोई प्लास्टर कटवाने से पहले ओपीडी में फॉलोअप चेकअप करवाने आया था, तो कोई ऑपरेशन के बाद आ रही दिक्कतों का डॉक्टरों से समाधान चाहता था। दिन भर यह मरीज ओपीडी के बाहर सेवाएं बहाल करने का इंतजार करते रहे।
इस दौरान जीएमसी की इमरजेंसी सेवाएं चालू रही, लेकिन वहां भी मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। सीमित स्टाफ के चलते किसी को समय पर इलाज नहीं मिल पाया तो कोई बिना इलाज के ही लौट गया। जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन ज्वाइंट एक्शन कमेटी के जिला अध्यक्ष नीरज मलागर ने सरकार के ढाई दिन के वेतन की कटौती के फैसला को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य कर्मी छुट्टी के दिन अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जीएमसी प्रशासन लगातार डयूटी रोस्टर बना रहा है तो कर्मचारी वेतन कैसे छोड़ सकते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन की आलोचना की जिसमें मंत्री ने कमेटी बनाकर हल निकालने की घोषणा की थी। महात्मा गांधी जच्चा बच्चा अस्पताल परिसर में भी स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रदर्शन किया।
हड़ताल में उतरे एनएचएम कर्मी
एनएचएम कर्मचारी स्वास्थ्य कर्मियों के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य कर्मियों को ढाई दिन का वेतन देने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने सरकार से एनएचएम कर्मियों का वेतन बढ़ाने, समय पर वेतन देने और नियमितीकरण की गुहार लगाई। डॉक्टरों का कहना है कि अगर एनएचएम कर्मचारी तीन दिन तक हड़ताल पर रहते हैं तो इसका सीधा असर उपजिला अस्पतालों और ग्रामीण इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।