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Kathua News: स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, 71 फीसदी डॉक्टरों के पद खाली
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:32 AM IST
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रामकोट पीएचसी की तीन पद रिक्त, लोहाई और मल्हार के 2-2 और उच्चा पिंड, भड्डू, कोहग व मछेड़ी के 1-1 पद खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बिलावर के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट में हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में डॉक्टरों के 71 फीसदी पद खाली पड़े हैं। लोगों को इलाज के लिए दूर स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है जिससे मरीजों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार आठ पीएचसी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुल 17 पद स्वीकृत किए हैं लेकिन इसमें से 12 पद खाली पड़े हैं। इसमें पीएचसी रामकोट सबसे अधिक प्रभावित है। जिला मुख्यालय के सबसे नजदीक होने के कारण अस्पताल में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। हालांकि इस पीएचसी के लिए तीन पद स्वीकृत हैं। इसके बाद बिलावर का दूरदराज क्षेत्र लोहाई और मल्हार शामिल है। इन दोनों पीएचसी के स्वीकृत 2-2 पद रिक्त पड़े हुए हैं। लंबे समय से इन प्राथमिक केंद्रों को फार्मासिस्ट के सहारे चलाया जा रहा है। इसके अलावा उच्चा पिंड, भड्डू, कोहग, डूडू फलाल व मछेड़ी के एक-एक पद खाली हैं।
डॉक्टरों की कमी का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। कई पीएचसी बिना नियमित डॉक्टरों के चल रहे हैं जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। विशेषकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपातकालीन मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें लंबी दूरी तय कर उपजिला अस्पताल बिलावर या जीएमसी कठुआ का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाए और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाए।
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डॉक्टरों के रिक्त पदों से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। हाल ही में पीएससी ने 429 डॉक्टरों की नियुक्ति की घोषणा की है। उम्मीद है कि नई नियुक्तियों से बिलावर में डॉक्टरों की कमी को भी जल्द पूरा किया जाएगा।
- हरविंदर सिंह, बीएमओ बिलावर
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कठुआ। बिलावर के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट में हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में डॉक्टरों के 71 फीसदी पद खाली पड़े हैं। लोगों को इलाज के लिए दूर स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है जिससे मरीजों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार आठ पीएचसी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुल 17 पद स्वीकृत किए हैं लेकिन इसमें से 12 पद खाली पड़े हैं। इसमें पीएचसी रामकोट सबसे अधिक प्रभावित है। जिला मुख्यालय के सबसे नजदीक होने के कारण अस्पताल में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। हालांकि इस पीएचसी के लिए तीन पद स्वीकृत हैं। इसके बाद बिलावर का दूरदराज क्षेत्र लोहाई और मल्हार शामिल है। इन दोनों पीएचसी के स्वीकृत 2-2 पद रिक्त पड़े हुए हैं। लंबे समय से इन प्राथमिक केंद्रों को फार्मासिस्ट के सहारे चलाया जा रहा है। इसके अलावा उच्चा पिंड, भड्डू, कोहग, डूडू फलाल व मछेड़ी के एक-एक पद खाली हैं।
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डॉक्टरों की कमी का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। कई पीएचसी बिना नियमित डॉक्टरों के चल रहे हैं जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। विशेषकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपातकालीन मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें लंबी दूरी तय कर उपजिला अस्पताल बिलावर या जीएमसी कठुआ का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाए और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाए।
डॉक्टरों के रिक्त पदों से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। हाल ही में पीएससी ने 429 डॉक्टरों की नियुक्ति की घोषणा की है। उम्मीद है कि नई नियुक्तियों से बिलावर में डॉक्टरों की कमी को भी जल्द पूरा किया जाएगा।
- हरविंदर सिंह, बीएमओ बिलावर