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मनरेगा योजना नहीं, सामाजिक न्याय और श्रम की गरिमा है : भल्ला
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मीरां साहिब। प्रदेश कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम के बैनर तले जन संपर्क अभियान जारी रखा। मीरा साहिब ब्लाक के गांव तूतडे़ व महेशियां गांव में कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने जनसभाओं को संबोधित किया। भल्ला ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, श्रम की गरिमा और समावेशी विकास का प्रतीक है। इस योजना के साथ महात्मा गांधी का नाम जोड़ना ग्रामीण आत्मनिर्भरता, गरीबों के सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के उनके आदर्शों के प्रति एक सचेत श्रद्धांजलि है।
भल्ला ने कहा कि नाम बदलकर इस विरासत को कमजोर करने का कोई भी प्रयास ग्रामीण कल्याण की चिंता के बजाय राजनीतिक मानसिकता और वैचारिक को दर्शाता है।
जिला अध्यक्ष जम्मू ग्रामीण नीरज कुंदन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने के किसी भी प्रयास के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के दृढ़ रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक, अधिकार-आधारित कानून है जो महात्मा गांधी के मूल्यों - श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और समावेशी ग्रामीण विकास का प्रतीक है।
पीसीसी के महासचिव अमृत बाली ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा स्वतंत्र भारत में सबसे परिवर्तनकारी कानूनों में से एक है, जिसने ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाया और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत किया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वेतन में सुधार, कार्य दिवस बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के बजाय, भाजपा सरकार योजना का नाम बदलकर राजनीति करने में लगी हुई है।
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भल्ला ने कहा कि नाम बदलकर इस विरासत को कमजोर करने का कोई भी प्रयास ग्रामीण कल्याण की चिंता के बजाय राजनीतिक मानसिकता और वैचारिक को दर्शाता है।
जिला अध्यक्ष जम्मू ग्रामीण नीरज कुंदन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने के किसी भी प्रयास के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के दृढ़ रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक, अधिकार-आधारित कानून है जो महात्मा गांधी के मूल्यों - श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और समावेशी ग्रामीण विकास का प्रतीक है।
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पीसीसी के महासचिव अमृत बाली ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा स्वतंत्र भारत में सबसे परिवर्तनकारी कानूनों में से एक है, जिसने ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाया और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत किया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वेतन में सुधार, कार्य दिवस बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के बजाय, भाजपा सरकार योजना का नाम बदलकर राजनीति करने में लगी हुई है।