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Rajouri News: सीएचसी कंडी में दवाइयों की कमी, निजी जांच और अवैध वसूली के आरोपों पर बीएमओ को नोटिस

संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी Updated Wed, 10 Jun 2026 02:43 AM IST
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तीन दिन में मांगा जवाब, रिकॉर्ड और दस्तावेज भी तलब


वायरल वीडियो के बाद हरकत में आए सीएमओ राजोरी


संवाद न्यूज एजेंसी
राजोेरी। सीएचसी कंडी में दवाइयों की कमी, निजी जांच और अवैध वसूली के आरोपों पर सीएमओ ने बीएमओ को नोटिस किया है। यह नोटिस अवैध धन वसूली के आरोपों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर लिया गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एम एल राणा ने कहा कि वायरल वीडियो के बाद बीएमओ को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से आरोप की शिकायतें सामने आई हैं। अस्पताल में सरकारी स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को आरएल इंजेक्शन, पैरासिटामोल सहित अन्य आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई गई। इस कारण मरीजों को निजी दुकानों से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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नोटिस में उल्लेख किया गया है कि अस्पताल में एक्स-रे मशीन और नियुक्त एक्स-रे तकनीशियन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों में भेजे जाने के आरोप लगे हैं। इसके अलावा अस्पताल परिसर में एक्स-रे सेवाओं के लिए मरीजों से 200 रुपये तक वसूलने की शिकायत भी सामने आई है। यह शिकायतें सत्य पाए जाने पर सरकारी निर्देशों और मरीजों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
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सीएमओ कार्यालय की ओर से की गई प्रारंभिक जांच में ड्रग एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम (डीवीडीएमएस) पोर्टल पर संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में आवश्यक दवाइयों और उपभोग्य सामग्रियों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध दर्शाया गया है। ऐसे में मरीजों को दवाइयां न मिलने के आरोपों ने स्टॉक प्रबंधन, वितरण व्यवस्था, निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोटिस में कहा गया है कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के रूप में दवाइयों की निर्बाध उपलब्धता, उनके उचित वितरण, कर्मचारियों की प्रभावी निगरानी, रिकॉर्ड संधारण, डायग्नोस्टिक सेवाओं के सुचारु संचालन तथा मरीजों से किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली रोकने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की है।
रिकॉर्ड और दस्तावेज भी तलब
सीएमओ ने बीएमओ को विस्तृत दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इनमें दवा स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड, ओपीडी और आपातकालीन रजिस्टर, डीवीडीएमएस स्टॉक रिपोर्ट, खरीद और उपयोग संबंधी रिकॉर्ड, एक्स-रे मशीन उपयोग रजिस्टर, लैब जांच रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर, रेफरल रिकॉर्ड, शुल्क संग्रह संबंधी दस्तावेज और शिकायतों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा शामिल है। इसके अतिरिक्त संबंधित अवधि के दौरान दवाइयों, डायग्नोस्टिक सेवाओं और किसी भी शुल्क संग्रह के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नाम और पदनाम भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।



रिकॉर्ड से छेड़छाड़ पर चेतावनी
नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि मामले की जांच पूरी होने तक कोई भी रिकॉर्ड, रजिस्टर, डीवीडीएमएस प्रविष्टि, स्टॉक विवरण या अन्य सरकारी दस्तावेज नष्ट, परिवर्तित, हटाया या छिपाया नहीं जाना चाहिए। सीएमओ ने कहा कि निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में यह माना जाएगा कि संबंधित अधिकारी के पास अपने बचाव में कुछ कहने को नहीं है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
छह बिंदुओं पर मांगा स्पष्टीकरण
सरकारी स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को आवश्यक दवाइयां और इंजेक्शन क्यों नहीं दिए गए?
मरीजों को निजी स्रोतों से दवाइयां खरीदने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा?
अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद निजी केंद्रों में एक्स-रे जांच के लिए क्यों भेजा गया?
अस्पताल परिसर में एक्स-रे के नाम पर कोई राशि वसूली गई या नहीं, यदि हां तो किसके आदेश पर?
दवाइयों के वितरण, जांच सेवाओं और निगरानी में किसी प्रकार की लापरवाही या प्रशासनिक विफलता हुई या नहीं?
संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए?
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