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Rajouri News: शिक्षकों के स्थानांतरण में भेदभाव का आरोप, अफसरों से हस्तक्षेप की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
Updated Sat, 25 Oct 2025 01:58 AM IST
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राजोेरी। जिले में वार्षिक स्थानांतरण अभियान ने विवाद खड़ा कर दिया है। शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, पक्षपात और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। आधिकारिक नीति के अनुसार हार्ड जोन में कार्यकाल पूरा करने वाले शिक्षकों को सॉफ्ट जोन में स्थानांतरित किया जाना था। कई शिक्षकों का दावा है कि इस नियम को चुनिंदा तरीके से लागू किया गया है जिससे कई योग्य कर्मचारियों को नजरअंदाज कर दिया है।
शिकायतों के बीच राजोेरी के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) ने प्रधानाचार्यों और क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों की एक छह-सदस्यीय समिति गठित कर अभ्यावेदनों की समीक्षा और योग्य मामलों में संशोधनों की सिफारिश करनी थी। शिक्षकों का आरोप है कि बाद में जारी किए गए संशोधन आदेशों से ज्यादातर उन लोगों को फायदा हुआ है जो पहले से ही सॉफ्ट जोन में तैनात हैं जिससे पक्षपात का संदेह और गहरा गया है। शिक्षक मोहम्मद शब्बीर ने बताया कि ऐसा लगता है कि यह प्रक्रिया कई लोगों की कीमत पर कुछ लोगों की मदद करने के लिए बनाई गई है।
संशोधित तबादलों की कोई सूची सार्वजनिक न किए जाने से आक्रोश और बढ़ गया है। इसके बजाय अधिकारियों ने कथित तौर पर मामले-दर-मामला आधार पर अलग-अलग आदेश जारी किए। शिक्षकों का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता को कमजोर करता है। शिक्षक जावेद इकबाल ने कहा कि हमें एक निष्पक्ष, खुली प्रक्रिया की उम्मीद थी - लेकिन चुनिंदा संशोधन चुपचाप किए जा रहे हैं। शिक्षकों ने जम्मू स्कूल शिक्षा निदेशालय और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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शिकायतों के बीच राजोेरी के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) ने प्रधानाचार्यों और क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों की एक छह-सदस्यीय समिति गठित कर अभ्यावेदनों की समीक्षा और योग्य मामलों में संशोधनों की सिफारिश करनी थी। शिक्षकों का आरोप है कि बाद में जारी किए गए संशोधन आदेशों से ज्यादातर उन लोगों को फायदा हुआ है जो पहले से ही सॉफ्ट जोन में तैनात हैं जिससे पक्षपात का संदेह और गहरा गया है। शिक्षक मोहम्मद शब्बीर ने बताया कि ऐसा लगता है कि यह प्रक्रिया कई लोगों की कीमत पर कुछ लोगों की मदद करने के लिए बनाई गई है।
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संशोधित तबादलों की कोई सूची सार्वजनिक न किए जाने से आक्रोश और बढ़ गया है। इसके बजाय अधिकारियों ने कथित तौर पर मामले-दर-मामला आधार पर अलग-अलग आदेश जारी किए। शिक्षकों का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता को कमजोर करता है। शिक्षक जावेद इकबाल ने कहा कि हमें एक निष्पक्ष, खुली प्रक्रिया की उम्मीद थी - लेकिन चुनिंदा संशोधन चुपचाप किए जा रहे हैं। शिक्षकों ने जम्मू स्कूल शिक्षा निदेशालय और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।