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Rajouri News: दलदल से गुजरकर स्कूल पहुंचने को मजबूर शिक्षक
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राजोरी। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कई जगहों पर शिक्षक रोजाना दलदल, कीचड़ और खराब रास्तों से होकर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं। यह समस्या खासतौर पर उन इलाकों में अधिक देखने को मिल रही है जहां सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है।
राजोरी के कोटरंका के ख्वास तहसील के दूर दराज के कोटचढ़वाल गांव को जाने वाली सड़क पर बरसात या नमी वाले मौसम में स्कूल तक जाने वाले रास्ते पूरी तरह कीचड़ में बदल जाते हैं। कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें शिक्षक घुटनों तक कीचड़ में चलकर स्कूल पहुंचते दिख रहे हैं। कई जगह तो स्थिति इतनी खराब है कि जूते हाथ में लेकर या नंगे पैर चलना पड़ता है। शिक्षकों के लिए रोजाना समय पर स्कूल पहुंचना चुनौती बन जाता है। कपड़े और जूते खराब हो जाते हैं, फिसलने और चोट लगने का खतरा बना रहता है। कई बार शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि उन्हें 1–2 किलोमीटर तक ऐसे रास्तों से गुजरना पड़ता है जहां कोई पक्का मार्ग नहीं है। यह समस्या सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं है। छात्र भी स्कूल आने से कतराते हैं। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है।
स्थानीय लोगों और शिक्षकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और नालियों का निर्माण लंबे समय से लंबित है। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल तक पक्की सड़क बनाई जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था हो। बच्चों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित किया जाए। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सिर्फ किताबें और शिक्षक ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचा भी उतना ही जरूरी है। जब शिक्षक ही दलदल से गुजरकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हों तो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कोट
पीएमजीएसवाई डिवीज़न राजोरी के एक्सईएन को कड़े निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द कोटरंका-कोयचढ़वाल सड़क पर गिरी पस्सी हटाकर सड़क साफ की जाए ताकि शिक्षकों या बच्चों को परेशानी न झेलनी पड़े। भविष्य मे सड़क साफ रहे इसे हर हाल मे सुनिश्चित किया जाएगा।
-दिलमीर, एडीसी कोटरंका
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राजोरी के कोटरंका के ख्वास तहसील के दूर दराज के कोटचढ़वाल गांव को जाने वाली सड़क पर बरसात या नमी वाले मौसम में स्कूल तक जाने वाले रास्ते पूरी तरह कीचड़ में बदल जाते हैं। कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें शिक्षक घुटनों तक कीचड़ में चलकर स्कूल पहुंचते दिख रहे हैं। कई जगह तो स्थिति इतनी खराब है कि जूते हाथ में लेकर या नंगे पैर चलना पड़ता है। शिक्षकों के लिए रोजाना समय पर स्कूल पहुंचना चुनौती बन जाता है। कपड़े और जूते खराब हो जाते हैं, फिसलने और चोट लगने का खतरा बना रहता है। कई बार शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि उन्हें 1–2 किलोमीटर तक ऐसे रास्तों से गुजरना पड़ता है जहां कोई पक्का मार्ग नहीं है। यह समस्या सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं है। छात्र भी स्कूल आने से कतराते हैं। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है।
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स्थानीय लोगों और शिक्षकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और नालियों का निर्माण लंबे समय से लंबित है। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल तक पक्की सड़क बनाई जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था हो। बच्चों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित किया जाए। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सिर्फ किताबें और शिक्षक ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचा भी उतना ही जरूरी है। जब शिक्षक ही दलदल से गुजरकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हों तो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कोट
पीएमजीएसवाई डिवीज़न राजोरी के एक्सईएन को कड़े निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द कोटरंका-कोयचढ़वाल सड़क पर गिरी पस्सी हटाकर सड़क साफ की जाए ताकि शिक्षकों या बच्चों को परेशानी न झेलनी पड़े। भविष्य मे सड़क साफ रहे इसे हर हाल मे सुनिश्चित किया जाएगा।
-दिलमीर, एडीसी कोटरंका