अपहरण, फिर गोली मारकर हत्या: 35 साल बाद सरला भट हत्याकांड में नया मोड़, SIA ने 737 पन्नों की दाखिल की चार्जशीट
जम्मू-कश्मीर की एसआईए ने 1990 के सरला भट अपहरण और हत्या मामले में 35 साल बाद 737 पन्नों की चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल की है। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि यह हत्या एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा थी और मामले में कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।
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विस्तार
कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अप्रैल 1990 में अपहरण व हत्या के मामले में सोमवार को दाखिल आरोपपत्र में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक को मुख्य आरोपी बनाया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की श्रीनगर स्थित विशेष कोर्ट में दायर 737 पन्नों के आरोपपत्र में प्रतिबंधित संगठन के नेता के चार साथियों को भी आरोपी बनाया गया है। अब इन सभी पर मुकदमा चलेगा। ये आरोपपत्र प्रदेश जांच एजेंसी (एसआईए) ने दाखिल किया है।
मुखबिरी के शक में आतंकियों ने 18 अप्रैल 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट का अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दी थी। अनंतनाग जिले की रहने वाली सरला श्रीनगर के साैरा इलाके में स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (स्किम्स) में नर्स थीं। आतंकियों ने स्किम्स परिसर से उनका अपहरण किया था। अगले दिन गोलियों से छलनी शव स्किम्स से कई किलोमीटर दूर श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में मिला था।
एसआईए की चार्जशीट में यासीन मलिक जो उस समय जेकेएलएफ का स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ था, के अलावा उसके चार सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। ये आरोपी खुर्शीद अहमद चालकू, अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सोफी हैं। इनमें से शेख, सोफी और टपलू की मौत हो चुकी है। यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में बंद है।
चालकू ने चलाई थीं गोलियां, पाकिस्तान में छिपा : जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस हत्याकांड में मुख्य रूप से गोली चलाने वाला आतंकवादी खुर्शीद अहमद चालकू फरार है। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उद्घोषणा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह कश्मीर से भागकर पाकिस्तान में छिपा हुआ है।
18 अप्रैल 1990 को अपहरण कर हत्या की गई, स्किम्स श्रीनगर में नर्स थीं सरला
सरला हत्याकांड का मामला तीन दशक से अधिक समय तक एक तरह से ठंडे बस्ते में रहा। मार्च 2024 में इसे एसआईए को सौंपा गया। इसके बाद जांच एजेंसी ने जांच में तेजी लाई और पिछले दो वर्षों में कई स्थानों पर छापेमारी की। इनके आधार पर पांचों आरोपियों के खिलाफ मजबूत आरोपपत्र तैयार किया। एसआईए के प्रवक्ता ने बताया कि दशकों बाद गहन और थका देने वाली जांच के बाद तैयार इस चार्जशीट में मौखिक, दस्तावेजी, फोरेंसिक, बैलिस्टिक, मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जोड़कर केस की कड़ियां मजबूत की गई हैं।
न्याय दिलाने की दिशा में मील का पत्थर
एसआईए के प्रवक्ता ने कहा कि इस चार्जशीट का दाखिल होना आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह कदम एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देता है कि समय कभी भी आतंकवाद के लिए ढाल नहीं बन सकता।
एसआईए को सरला भट के मामले में एक बड़ी सफलता और महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। ऐसे मामले वास्तव में घाटी में हिंदू कश्मीरी पंडित समुदाय के भीतर डर का माहौल पैदा करने की वजह बने थे। इसी वजह से अंततः कश्मीर से उनका पलायन हुआ। -एसपी वैद, पूर्व डीजीपी, जम्मू-कश्मीर
कश्मीरी पंडितों में जगी नई उम्मीद
सरला हत्याकांड की चार्जशीट दाखिले होने से आतंक के दाैर में कश्मीरी पंडितों की हत्याओं से जुड़े मामलों की जांच को भी नई दिशा मिल सकती है। इस चार्जशीट ने कश्मीरी पंडितों में नई उम्मीद जगाई है।
रणबीर दंड संहिता और टाडा में चलेगा केस
रणबीर दंड संहिता (आरपीसी)
यह मामला 1990 का है। ऐसे में इसमें तत्कालीन रणबीर दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 364 (अपहरण), 341 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 201 (सबूत मिटाना) और 120-बी (आपराधिक साजिश) लगाई गई है।
टाडा
आतंकवाद और विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1987 की धारा 3(2), 3(3), 4 और 6 के तहत आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के कड़े आरोप शामिल हैं।
भारतीय हथियार अधिनियम
अवैध रूप से खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 7 और 27 के तहत भी अपराध स्थापित किए गए हैं।