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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   737-page charge sheet filed in Sarla Bhat murder case after 35 years.

अपहरण, फिर गोली मारकर हत्या: 35 साल बाद सरला भट हत्याकांड में नया मोड़, SIA ने 737 पन्नों की दाखिल की चार्जशीट

Mon, 29 Jun 2026 04:25 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Mon, 29 Jun 2026 04:25 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर की एसआईए ने 1990 के सरला भट अपहरण और हत्या मामले में 35 साल बाद 737 पन्नों की चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल की है। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि यह हत्या एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा थी और मामले में कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।

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737-page charge sheet filed in Sarla Bhat murder case after 35 years.
सरला भट हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) कश्मीर ने वर्ष 1990 में एसकेआईएमएस की स्टाफ नर्स सरला भट के अपहरण, यातना और हत्या के मामले में 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट श्रीनगर की विशेष अदालत में दाखिल की है। एजेंसी ने इसे जम्मू-कश्मीर में पुराने आतंकी मामलों की जांच में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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एसआईए के अनुसार यह मामला 18 मार्च 2024 को जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक के आदेश पर एजेंसी को सौंपा गया था। इसके बाद जांच के दौरान गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, फोरेंसिक और बैलिस्टिक रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा अन्य जांच सामग्री के आधार पर चार्जशीट तैयार की गई।

18 अप्रैल 1990 को सरला भट का श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल के पास से अपहरण किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि उन्हें यातनाएं देने के बाद श्रीनगर के ओमर कॉलोनी, मालबाग इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

एसआईए ने अपनी जांच में आरोप लगाया है कि यह घटना जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। एजेंसी ने इस मामले में तत्कालीन जेकेएलएफ प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक, खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की भूमिका का उल्लेख किया है। इनमें से अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी और गुलाम मोहम्मद टपलू की मृत्यु हो चुकी है, जबकि यासीन मलिक एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं, फरार आरोपी खुर्शीद अहमद चाल्कू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता टाडा और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। एसआईए का यह भी दावा है कि सरला भट को मुखबिर बताए जाने का आरोप जांच में सही नहीं पाया गया और इसे हत्या को उचित ठहराने के लिए गढ़ी गई कहानी बताया गया है।

एसआईए ने कहा कि करीब 35 वर्ष बाद चार्जशीट दाखिल होना इस बात का संदेश है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में समय बीत जाने के बावजूद कानून अपना काम करता है और दोषियों को न्याय के दायरे में लाने के प्रयास जारी रहेंगे।

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