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Srinagar: पीओके में बवाल की गूंज श्रीनगर में, नरसंहार के खिलाफ लाल चौक पर लगे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 12 Jun 2026 01:13 AM IST
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सार
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में स्थानीय नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचार और नरसंहार के खिलाफ यहां जो आवाज उठी उसमें आक्रोश साफ था।
श्रीनगर में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते एटीवीके के कार्यकर्ता। संवाद
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर का ऐतिहासिक लाल चौक वीरवार को पाकिस्तान विरोधी नारों से गूंज उठा। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में स्थानीय नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचार और नरसंहार के खिलाफ यहां जो आवाज उठी उसमें आक्रोश साफ था। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद और पीओके में खून-खराबा बंद करो के नारे लगाकर पाकिस्तान के असली चेहरे को दुनिया के सामने बेनकाब किया।
ये वही लाल चौक है जहां कभी पाकिस्तान के प्रति हमदर्दी दिखती थी और आतंक व अलगाववाद के केंद्र के रूप में जाना जाता था। वीरवार को लाल चाैक के पास घंटाघर के सामने एकत्रित प्रदर्शनकारियों के हाथों में जो बैनर थे उन पर रावलकोट नरसंहार और मासूमों पर जुल्म बंद करो जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों में पाकिस्तान और उसकी सेना के प्रति गुस्सा था। ये गुस्सा पीओके में अपनी बुनियादी मांगें मांग रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई बर्बर गोलीबारी को लेकर था।
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विरोध-प्रदर्शन कश्मीर में आतंकी हमलों के पीड़ितों के संगठन (एटीवीके) के बैनर तले किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं एटीवीके की चेयरपर्सन तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तानी सरकार और वहां के सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रावलकोट में स्थानीय लोग केवल अपने हक की बात कर रहे थे लेकिन पाकिस्तान की तानाशाह सरकार और सेना ने आवाज को दबाने के लिए रावलकोट को खून के समंदर में तब्दील कर दिया। पाकिस्तान की तानाशाही हुकूमत ने मासूमों पर गोलियों की बरसात की है।
तस्लीमा ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, आप किस कश्मीर के लोगों को उकसा रहे थे और किसे कट्टरपंथी बनाना चाहते थे? आपकी असलियत अब पूरा कश्मीर और पूरी दुनिया जान चुकी है। उन्होंने कहा कि अब मासूमों की आवाज को गोलियों के दम पर दबाया नहीं जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल की अपील
प्रदर्शनकारी श्रीनगर में यूएन के दफ्तर के बाहर भी एकत्रित हुए। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है और वहां सिर्फ सैन्य तानाशाही चल रही है। तस्लीमा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे पीओके में रह रहे नागरिकों पर हो रहे इस गंभीर अत्याचार का तुरंत संज्ञान लें और वहां जारी खून-खराबे को रुकवाएं। उन्होंने कहा, स्थिति का निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।