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Srinagar News: देश का पहला ब्लैक-नेक्ड क्रेन महोत्सव शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। देश के पहले ब्लैक-नेक्ड क्रेन महोत्सव का उद्घाटन मंगलवार को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया। महोत्सव का उद्देश्य दुर्लभ अल्पाइन सारस के संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को टिकाऊ आजीविका और समुदाय आधारित इको-टूरिज्म से जोड़ना है। चार दिवसीय इस महोत्सव में भारत और विदेशों के संरक्षणविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
महोत्सव को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल कहा कि ब्लैक-नेक्ड क्रेन का संरक्षण लद्दाख की आर्द्रभूमियों, घासभूमियों और उच्च पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों के जुड़ा है। उन्होंने कहा कि त्सो कार और हानले जैसे क्षेत्र केवल वन्यजीवों के महत्वपूर्ण आवास ही नहीं हैं, बल्कि जैव विविधता, जल प्रणालियों और चरवाहा समुदायों की आजीविका को भी सहारा देते हैं।
उन्होंने जिम्मेदार बर्डवॉचिंग, प्रकृति पर्यटन, वन्यजीव फोटोग्राफी, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने की संभावना जताई। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने ब्लैक-नेक्ड क्रेन से संबंधित कई ज्ञानवर्धक और संरक्षण की पुस्तक का विमोचन किया। भारत डाक के सहयोग से ब्लैक-नेक्ड क्रेन पर विशेष डाक आवरण और विशेष रद्दीकरण (पोस्टल कैंसिलेशन) भी जारी किया गया। यह महोत्सव लद्दाख के अद्वितीय वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को स्थानीय समुदायों के कल्याण और सतत विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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दुनिया में करीब 1600 ब्लैक-नेक्ड क्रेन
दुनिया में लगभग 16,000 ब्लैक-नेक्ड क्रेन होने का अनुमान है। यह विश्व की एकमात्र अल्पाइन क्रेन प्रजाति है, जो अत्यधिक ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण वातावरण में रहने के लिए अनुकूलित है। भारत में लद्दाख ही इस प्रजाति का एकमात्र प्रजनन क्षेत्र है, जिससे इसके संरक्षण में केंद्र शासित प्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। लद्दाख प्रशासन ने ब्लैक-नेक्ड क्रेन को लद्दाख का राजकीय पक्षी भी घोषित किया है।
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लेह। देश के पहले ब्लैक-नेक्ड क्रेन महोत्सव का उद्घाटन मंगलवार को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया। महोत्सव का उद्देश्य दुर्लभ अल्पाइन सारस के संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को टिकाऊ आजीविका और समुदाय आधारित इको-टूरिज्म से जोड़ना है। चार दिवसीय इस महोत्सव में भारत और विदेशों के संरक्षणविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
महोत्सव को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल कहा कि ब्लैक-नेक्ड क्रेन का संरक्षण लद्दाख की आर्द्रभूमियों, घासभूमियों और उच्च पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों के जुड़ा है। उन्होंने कहा कि त्सो कार और हानले जैसे क्षेत्र केवल वन्यजीवों के महत्वपूर्ण आवास ही नहीं हैं, बल्कि जैव विविधता, जल प्रणालियों और चरवाहा समुदायों की आजीविका को भी सहारा देते हैं।
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उन्होंने जिम्मेदार बर्डवॉचिंग, प्रकृति पर्यटन, वन्यजीव फोटोग्राफी, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने की संभावना जताई। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने ब्लैक-नेक्ड क्रेन से संबंधित कई ज्ञानवर्धक और संरक्षण की पुस्तक का विमोचन किया। भारत डाक के सहयोग से ब्लैक-नेक्ड क्रेन पर विशेष डाक आवरण और विशेष रद्दीकरण (पोस्टल कैंसिलेशन) भी जारी किया गया। यह महोत्सव लद्दाख के अद्वितीय वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को स्थानीय समुदायों के कल्याण और सतत विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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दुनिया में करीब 1600 ब्लैक-नेक्ड क्रेन
दुनिया में लगभग 16,000 ब्लैक-नेक्ड क्रेन होने का अनुमान है। यह विश्व की एकमात्र अल्पाइन क्रेन प्रजाति है, जो अत्यधिक ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण वातावरण में रहने के लिए अनुकूलित है। भारत में लद्दाख ही इस प्रजाति का एकमात्र प्रजनन क्षेत्र है, जिससे इसके संरक्षण में केंद्र शासित प्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। लद्दाख प्रशासन ने ब्लैक-नेक्ड क्रेन को लद्दाख का राजकीय पक्षी भी घोषित किया है।