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हिंदी केवल भाषा नहीं, लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का सशक्त माध्यम : कविंद्र गुप्ता
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लद्दाख के उपराज्यपाल ने नेपाल दूतावास में आयोजित विश्व हिंदी दिवस सम्मेलन में लिया भाग, स्रोत –
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- लद्दाख के उपराज्यपाल ने नेपाल दूतावास में आयोजित विश्व हिंदी दिवस सम्मेलन में लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में विश्व हिंदी परिषद की ओर से नेपाल दूतावास के सहयोग से आयोजित विश्व हिंदी दिवस सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
उपराज्यपाल ने हिंदी भाषा की शक्ति, पहचान और वैश्विक स्तर पर बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित करने वाले इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिंदी भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों, संस्कृतियों और भावनाओं को जोड़ती है। उन्होंने इस सफल आयोजन और भाषाई-सांस्कृतिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए नेपाल दूतावास, नई दिल्ली की सराहना की।
कविंद्र गुप्ता ने कहा कि कई दशकों तक हिंदी को प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में वह मान्यता नहीं मिल पाई जिसकी वह हकदार थी। इससे युवा पीढ़ी का भाषा से जुड़ाव भी प्रभावित हुआ। हालांकि, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी का आत्मविश्वासपूर्ण उपयोग, शासन में इसका बढ़ता प्रयोग और डिजिटल मीडिया में इसकी मजबूत उपस्थिति एक सकारात्मक और उत्साहजनक परिवर्तन को दर्शाती है।
भारत और नेपाल के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्ते अत्यंत घनिष्ठ हैं। हिंदी ने वर्षों से भारत-नेपाल के बीच जन-जन के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि साझा परंपराएं, साहित्यिक विरासत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान आपसी समझ और मित्रता को लगातार सुदृढ़ करते रहे हैं।
उपराज्यपाल ने लद्दाख को एक बहुभाषी और बहु सांस्कृतिक क्षेत्र बताते हुए कहा कि यहां भाषा के महत्व को गहराई से समझा जाता है। उन्होंने कहा कि हिंदी लद्दाख में एक प्रभावी संपर्क भाषा के रूप में कार्य करती है, जो संचार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है। समय की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने शिक्षा, प्रशासन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी के अधिक उपयोग का आह्वान किया, ताकि युवा पीढ़ी भाषा से जुड़ी रहे और इसके विकास में योगदान दे।
कविंद्र गुप्ता ने हिंदी विद्वानों, लेखकों और भाषा प्रेमियों-विशेष रूप से नेपाल के को हिंदी के माध्यम से भारत-नेपाल संबंधों को सशक्त करने में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदी दिवस भारत की समृद्ध भाषाई विरासत और सांस्कृतिक पहचान की एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में विश्व हिंदी परिषद की ओर से नेपाल दूतावास के सहयोग से आयोजित विश्व हिंदी दिवस सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
उपराज्यपाल ने हिंदी भाषा की शक्ति, पहचान और वैश्विक स्तर पर बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित करने वाले इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिंदी भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों, संस्कृतियों और भावनाओं को जोड़ती है। उन्होंने इस सफल आयोजन और भाषाई-सांस्कृतिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए नेपाल दूतावास, नई दिल्ली की सराहना की।
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कविंद्र गुप्ता ने कहा कि कई दशकों तक हिंदी को प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में वह मान्यता नहीं मिल पाई जिसकी वह हकदार थी। इससे युवा पीढ़ी का भाषा से जुड़ाव भी प्रभावित हुआ। हालांकि, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी का आत्मविश्वासपूर्ण उपयोग, शासन में इसका बढ़ता प्रयोग और डिजिटल मीडिया में इसकी मजबूत उपस्थिति एक सकारात्मक और उत्साहजनक परिवर्तन को दर्शाती है।
भारत और नेपाल के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्ते अत्यंत घनिष्ठ हैं। हिंदी ने वर्षों से भारत-नेपाल के बीच जन-जन के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि साझा परंपराएं, साहित्यिक विरासत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान आपसी समझ और मित्रता को लगातार सुदृढ़ करते रहे हैं।
उपराज्यपाल ने लद्दाख को एक बहुभाषी और बहु सांस्कृतिक क्षेत्र बताते हुए कहा कि यहां भाषा के महत्व को गहराई से समझा जाता है। उन्होंने कहा कि हिंदी लद्दाख में एक प्रभावी संपर्क भाषा के रूप में कार्य करती है, जो संचार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है। समय की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने शिक्षा, प्रशासन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी के अधिक उपयोग का आह्वान किया, ताकि युवा पीढ़ी भाषा से जुड़ी रहे और इसके विकास में योगदान दे।
कविंद्र गुप्ता ने हिंदी विद्वानों, लेखकों और भाषा प्रेमियों-विशेष रूप से नेपाल के को हिंदी के माध्यम से भारत-नेपाल संबंधों को सशक्त करने में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदी दिवस भारत की समृद्ध भाषाई विरासत और सांस्कृतिक पहचान की एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है।