सीआईके की बड़ी कार्रवाई: श्रीनगर में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, भारी मात्रा में उपकरण जब्त, सात गिरफ्तार
श्रीनगर में सीआईके ने फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर सात लोगों को गिरफ्तार किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं और करोड़ों रुपये के हेरफेर की जांच जारी है।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग (सीआईके) ने सात लोगों को गिरफ्तार कर हाईटेक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यह कॉल सेंटर ऑनलाइन धोखाधड़ी से विदेशी व स्थानीय लोगों को निशाना बना रहा था। मामले में करोड़ों रुपये के हेरफेर की आशंका है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों में नुमैर, जाहिद, इकबाल, फैक, सलीम, मुश्ताक व मुख्तार शामिल हैं। एसएसपी सीआईके ताहिर अशरफ भट्टी ने बताया कि तकनीकी विशेषज्ञों और फील्ड ऑपरेटिव्स की टीमें बनाकर सूचनाएं जुटाई गईं।
श्रीनगर के रंगरेट औद्योगिक क्षेत्र में एक मुख्य ऑपरेशनल हब की पहचान की गई। टीम ने बुधवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में दबिश दी। इसमें सात संदिग्धों को पकड़ा गया। बड़ी मात्रा में डिजिटल और संचार उपकरण जब्त किए गए हैं। इनमें 13 मोबाइल, नाै लैपटॉप, वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) सिस्टम, सिम कार्ड, नेटवर्किंग डिवाइस और डिजिटल स्टोरेज मीडिया शामिल हैं।
करोड़ों के हेरफेर का अंदेशा, गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश जारी : अब तक हुए लेनदेन में कई करोड़ रुपये का हेरफेर हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
बाकी संदिग्धों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। जब्त उपकरणों की फॉरेंसिक जांच चल रही है। पीड़ितों की पहचान करने के साथ पैसों के लेनदेन का पता लगाया जा रहा है। एसएसपी ने बताया कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है जिसमें देश-विदेश के तार भी जुड़े हुए हैं।
एसए, यूके और कनाडा तक फैला है नेटवर्क :
एसएसपी ने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों का नेटवर्क यूएसए, यूके और कनाडा तक फैला हुआ है। ये लोग बाहर बैठे नागरिकों को निशाना बनाने में माहिर थे। यह गैंग अंतरराष्ट्रीय काॅल मास्किंग की तकनीक इस्तेमाल कर रहा था। यह तकनीक ग्राहकों और व्यावसायिक प्रदाताओं के वास्तविक फोन नंबरों को एक निर्दिष्ट नंबर से छिपाने में मदद करती है। साथ ही मनाेवैज्ञानिक दबाव बनाकर व किसी और की पहचान से लोगों के साथ धोखाधड़ी की जा रही थी। गैंग आधुनिक डिजिटल व क्रिप्टोकरेंसी चैनलों के जरिये पैसे की हेराफेरी करता था।
सर्वर रूटिंग व स्पूफिंग के जरिये ठगी
एसएसपी भट्टी ने कहा कि आरोपियों ने वीओआईपी आधारित सिस्टम का इस्तेमाल कर एक गुप्त बिना रजिस्टर्ड कॉल सेंटर का ढांचा खड़ा कर लिया था। इससे वे अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबर बना पाते थे। सर्वर रूटिंग और स्पूफिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर अपनी असली जगह छिपाते थे और पीड़ितों के सामने खुद को असली सेवा प्रदाता के तौर पर पेश करते थे।
इस कॉल सेंटर के जरिये ही अंतरराष्ट्रीय कॉल की जाती थी और उन्हें आगे भेजा जाता था। पीड़ितों को निशाना बनाने के लिए एक फर्जी याहू मेल डॉटकॉम वेबसाइट और गूगल विज्ञापनों का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपी कई देशों के लोगों से संगठित कॉल ऑपरेशन और ऑनलाइन फिशिंग विज्ञापनों के जरिये संपर्क करते थे। जैसे ही कोई पीड़ित विज्ञापन पर क्लिक करता था उसकी स्क्रीन पर टोल-फ्री नंबर दिखाई देता था। यह नंबर संदिग्धों की ओर से चलाया जाता था।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होती थी रकम :
एसएसपी ने बताया कि इसके बाद पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए जाते थे जिनमें म्यूल अकाउंट (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट शामिल थे। इस अवैध कमाई को छिपाने के लिए इसे कई बार अलग-अलग खातों में घुमाया जाता, बदला जाता और फिर निकाल लिया जाता। धोखाधड़ी से हासिल किए गए पैसे को फिर बैंकिंग चैनलों, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिये ट्रांसफर किया जाता था और म्यूल अकाउंट के जरिए आगे भेजा जाता था। इस पूरे मामले में कैश का कोई लेनदेन नहीं होता जिससे यह साफ होता है कि यह अपराध पूरी तरह से डिजिटल और बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया है।