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हमारी भाषा की अपनी पहचान और अपना मुकाम है : शाइदा
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अनंतनाग के निपोरा के कश्मीरी कवि अली शायदा।
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- साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कश्मीरी शायर, लेखक व आलोचक ने कहा, कश्मीरी भाषा मेरे दिल के बेहद करीब
कुलगाम। जब किसी स्थानीय भाषा को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलता है तो नई पीढ़ी का हौसला बढ़ता है। यह सम्मान उन लोगों के सोच को भी चुनौती देता है जो मानते हैं कि कश्मीरी भाषा के पाठक या खरीदार नहीं हैं। हमारी भाषा की अपनी पहचान और अपना मुकाम है।
यह शब्द मशहूर कश्मीरी शायर, लेखक और आलोचक अली शाइदा ने रविवार को बातचीत में कहे। बता दें कि अनंतनाग के निपोरा निवासी शाइदा को उनकी कश्मीरी कविता की किताब नज्दावनेक’य पोट आलाव के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान कश्मीरी भाषा श्रेणी में दिया गया। साहित्य अकादमी की आधिकारिक सूची में भी वर्ष 2025 के लिए कश्मीरी श्रेणी में अली शाइदा का नाम दर्ज है।
देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में शुमार यह पुरस्कार विजेता को 1 लाख रुपये नकद, तांबे की पट्टिका और शॉल के साथ प्रदान किया जाता है। यह सम्मान हर वर्ष भारत की 24 मान्यता प्राप्त भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए दिया जाता है।
अली शाइदा ने कहा कि यह सम्मान उनके साहित्यिक सफर के लिए एक नई प्रेरणा है। मैं कई वर्षों से लिख रहा हूं और अपने काम को इस तरह पहचाना जाना मेरे लिए खुशी की बात है। इससे मुझे आगे भी लिखते रहने और कश्मीरी भाषा से जुड़े रहने की ताकत मिलती है। यह उनकी छठी किताब है। कश्मीरी भाषा में लिखना उनके दिल के बेहद करीब है। हमारी भाषा की अपनी मजबूत परंपरा है और मैं वही लिखने की कोशिश करता हूं जो हम रोजमर्रा की जिंदगी में देखते और महसूस करते हैं।
शाइदा लंबे समय से कश्मीरी साहित्यिक हलकों में सक्रिय हैं। कविता और गद्य दोनों में उनका अहम योगदान रहा है। उनकी रचनाएं अखबारों और साहित्यिक पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रही हैं। वह क्षेत्रीय भाषा व साहित्य के प्रचार-प्रसार से जुड़े मंचों के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। संवाद
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कुलगाम। जब किसी स्थानीय भाषा को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलता है तो नई पीढ़ी का हौसला बढ़ता है। यह सम्मान उन लोगों के सोच को भी चुनौती देता है जो मानते हैं कि कश्मीरी भाषा के पाठक या खरीदार नहीं हैं। हमारी भाषा की अपनी पहचान और अपना मुकाम है।
यह शब्द मशहूर कश्मीरी शायर, लेखक और आलोचक अली शाइदा ने रविवार को बातचीत में कहे। बता दें कि अनंतनाग के निपोरा निवासी शाइदा को उनकी कश्मीरी कविता की किताब नज्दावनेक’य पोट आलाव के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान कश्मीरी भाषा श्रेणी में दिया गया। साहित्य अकादमी की आधिकारिक सूची में भी वर्ष 2025 के लिए कश्मीरी श्रेणी में अली शाइदा का नाम दर्ज है।
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देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में शुमार यह पुरस्कार विजेता को 1 लाख रुपये नकद, तांबे की पट्टिका और शॉल के साथ प्रदान किया जाता है। यह सम्मान हर वर्ष भारत की 24 मान्यता प्राप्त भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए दिया जाता है।
अली शाइदा ने कहा कि यह सम्मान उनके साहित्यिक सफर के लिए एक नई प्रेरणा है। मैं कई वर्षों से लिख रहा हूं और अपने काम को इस तरह पहचाना जाना मेरे लिए खुशी की बात है। इससे मुझे आगे भी लिखते रहने और कश्मीरी भाषा से जुड़े रहने की ताकत मिलती है। यह उनकी छठी किताब है। कश्मीरी भाषा में लिखना उनके दिल के बेहद करीब है। हमारी भाषा की अपनी मजबूत परंपरा है और मैं वही लिखने की कोशिश करता हूं जो हम रोजमर्रा की जिंदगी में देखते और महसूस करते हैं।
शाइदा लंबे समय से कश्मीरी साहित्यिक हलकों में सक्रिय हैं। कविता और गद्य दोनों में उनका अहम योगदान रहा है। उनकी रचनाएं अखबारों और साहित्यिक पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रही हैं। वह क्षेत्रीय भाषा व साहित्य के प्रचार-प्रसार से जुड़े मंचों के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। संवाद