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नशा तस्करों और नार्को आतंकियों के सबसे गहरे ठिकानों से भी ढूंढ निकालेंगे : सिन्हा
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पुलवामा में पदयात्रा के दौरान उपराज्यपाल। संवाद
- फोटो : Samvad
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उपराज्यपाल ने पुलवामा में नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत दी चेतावनी
कहा- हमारा मिशन सिर्फ गिरफ्तारियां नहीं, बल्कि नार्को-आतंक के साम्राज्य को पूरी तरह से तबाह करना है
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। उपराज्यपाल ने मनोज सिन्हा ने मंगलवार का नार्को-टेरर के पूरे तंत्र को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नशा तस्कर और नार्को आतंकी कहीं भी छिप जाएं उन्हें उनकी सबसे गहरी पनाहगाहों में भी ढूंढ निकालेंगे। अब वे और ज्यादा समय तक छिप नहीं सकते। कानून लागू करने वाली एजेंसियां उनके पीछे लगी हुई हैं।
उपराज्यपाल ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में नशे के खिलाफ लोगों के आंदोलन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद सिर्फ गिरफ्तारियां करना नहीं बल्कि नार्को-टेरर के साम्राज्य को पूरी तरह तबाह कर उसकी जड़ों को ही उखाड़ फेंकना है। नशा तस्कर युवाओं का भविष्य बर्बाद करके मुनाफा कमाते हैं। आतंकी संगठन उस पैसे का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए करते हैं। नशीले पदार्थों का हर सौदा न केवल किसी युवा की जिंदगी तबाह करता है बल्कि बेगुनाहों की हत्याओं के लिए पैसे भी मुहैया कराता है। वही पैसा जम्मू-कश्मीर में बेगुनाहों के खिलाफ आतंकवादियों को हथियार मुहैया कराता है।
उपराज्यपाल ने कहा कि कई दशकों तक जम्मू-कश्मीर में नशा तस्करी को महज एक स्थानीय अपराध माना जाता था लेकिन अब लोगों को यह समझना होगा कि नशा तस्कर और आतंकवादी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमारी लड़ाई एक विशाल नार्को-टेरर नेटवर्क के खिलाफ है। इसीलिए मेरा संकल्प अटल है और वादा पक्का है कि जम्मू-कश्मीर की धरती से नशीले पदार्थों के तस्करों और बेचने वालों को पूरी तरह खत्म कर देंगे।
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अकेले पुलवामा में ही हाल के दिनों में 11,000 से ज्यादा स्थानीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। 48 नशा तस्करों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। 56 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि हम सीधे आतंक की जड़ों पर वार कर रहे हैं।
मिलकर करना होगा आखिरी वार
उपराज्यपाल ने कहा कि नार्को टेरर को खत्म करने के लिए हम सभी को मिलकर आखिरी वार करना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में प्रदेश में जन-चेतना जागृत हुई है। बारामुला में हजारों लोग नशे के खिलाफ आए आए। जम्मू, सांबा, उधमपुर, कठुआ, श्रीनगर और दूसरे जिलों में भी युवाओं और उनके माता-पिता को इस लड़ाई के लिए पूरी तरह से समर्पित देखा। सबसे खास बात ये है कि पिछले 39 दिनों में अलग-अलग जिलों में पड़ोसी एक-दूसरे का सहारा बने हैं।
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11 अप्रैल से अब तक
-897 नशीले पदार्थों के तस्करों और बेचने वालों की गिरफ्तारी
-18 तस्करों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश
-382 तस्करों और बेचने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस और 386 वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द
-49 अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं और 45 संपत्तियों को ढहा दिया गया है।
5,045 दवा दुकानों का निरीक्षण किया गया दोनों संभागों में
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- 225 दवा दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए
- 27 दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए
- छह दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं
- प्रदेश भर में 3,93,000 कार्यक्रम आयोजित किए गए
इन जागरूकता और आउटरीच गतिविधियों में लाखों लोगों ने भाग लिया। जमीनी स्तर पर निगरानी और पुनर्वास को मजबूत करने के लिए जम्मू और कश्मीर में 6,646 ग्रामीण महिला समितियां और 2,997 युवा क्लब बनाए गए हैं ताकि नशीले पदार्थों की तस्करी को रोका जा सके और नशे की लत में फंसे लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। हर दिन 100 से ज्यादा हेल्पलाइन कॉल आ रही हैं और अब तक 52,000 से ज्यादा मरीज़ों को नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज मिल चुका है।
उपराज्यपाल ने कहा कि जैसे-जैसे यह 100-दिवसीय अभियान आगे बढ़ रहा है, हमें इसकी गति को और तेज करना होगा। सतर्क रहें और एकजुट रहें। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को याद दिलाना चाहता हूं कि एक तस्कर को रोकने से एक जान बचती है और बचाई गई हर जान घाटी में आतंकवाद को कमजोर करती है। साथ मिलकर, हम जम्मू-कश्मीर में नशे की जंजीरों को तोड़ेंगे, आतंकवाद को खत्म करेंगे, और अपनी सड़कों, घरों और भविष्य को रोशन करेंगे। एक महीने पहले, हमने नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर का सपना देखा था। आज, हम यह साबित कर रहे हैं कि यह सपना सच हो सकता है।
कहा- हमारा मिशन सिर्फ गिरफ्तारियां नहीं, बल्कि नार्को-आतंक के साम्राज्य को पूरी तरह से तबाह करना है
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। उपराज्यपाल ने मनोज सिन्हा ने मंगलवार का नार्को-टेरर के पूरे तंत्र को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नशा तस्कर और नार्को आतंकी कहीं भी छिप जाएं उन्हें उनकी सबसे गहरी पनाहगाहों में भी ढूंढ निकालेंगे। अब वे और ज्यादा समय तक छिप नहीं सकते। कानून लागू करने वाली एजेंसियां उनके पीछे लगी हुई हैं।
उपराज्यपाल ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में नशे के खिलाफ लोगों के आंदोलन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद सिर्फ गिरफ्तारियां करना नहीं बल्कि नार्को-टेरर के साम्राज्य को पूरी तरह तबाह कर उसकी जड़ों को ही उखाड़ फेंकना है। नशा तस्कर युवाओं का भविष्य बर्बाद करके मुनाफा कमाते हैं। आतंकी संगठन उस पैसे का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए करते हैं। नशीले पदार्थों का हर सौदा न केवल किसी युवा की जिंदगी तबाह करता है बल्कि बेगुनाहों की हत्याओं के लिए पैसे भी मुहैया कराता है। वही पैसा जम्मू-कश्मीर में बेगुनाहों के खिलाफ आतंकवादियों को हथियार मुहैया कराता है।
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उपराज्यपाल ने कहा कि कई दशकों तक जम्मू-कश्मीर में नशा तस्करी को महज एक स्थानीय अपराध माना जाता था लेकिन अब लोगों को यह समझना होगा कि नशा तस्कर और आतंकवादी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमारी लड़ाई एक विशाल नार्को-टेरर नेटवर्क के खिलाफ है। इसीलिए मेरा संकल्प अटल है और वादा पक्का है कि जम्मू-कश्मीर की धरती से नशीले पदार्थों के तस्करों और बेचने वालों को पूरी तरह खत्म कर देंगे।
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मिलकर करना होगा आखिरी वार
उपराज्यपाल ने कहा कि नार्को टेरर को खत्म करने के लिए हम सभी को मिलकर आखिरी वार करना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में प्रदेश में जन-चेतना जागृत हुई है। बारामुला में हजारों लोग नशे के खिलाफ आए आए। जम्मू, सांबा, उधमपुर, कठुआ, श्रीनगर और दूसरे जिलों में भी युवाओं और उनके माता-पिता को इस लड़ाई के लिए पूरी तरह से समर्पित देखा। सबसे खास बात ये है कि पिछले 39 दिनों में अलग-अलग जिलों में पड़ोसी एक-दूसरे का सहारा बने हैं।
11 अप्रैल से अब तक
-897 नशीले पदार्थों के तस्करों और बेचने वालों की गिरफ्तारी
-18 तस्करों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश
-382 तस्करों और बेचने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस और 386 वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द
-49 अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं और 45 संपत्तियों को ढहा दिया गया है।
5,045 दवा दुकानों का निरीक्षण किया गया दोनों संभागों में
- 225 दवा दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए
- 27 दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए
- छह दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं
- प्रदेश भर में 3,93,000 कार्यक्रम आयोजित किए गए
इन जागरूकता और आउटरीच गतिविधियों में लाखों लोगों ने भाग लिया। जमीनी स्तर पर निगरानी और पुनर्वास को मजबूत करने के लिए जम्मू और कश्मीर में 6,646 ग्रामीण महिला समितियां और 2,997 युवा क्लब बनाए गए हैं ताकि नशीले पदार्थों की तस्करी को रोका जा सके और नशे की लत में फंसे लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। हर दिन 100 से ज्यादा हेल्पलाइन कॉल आ रही हैं और अब तक 52,000 से ज्यादा मरीज़ों को नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज मिल चुका है।
उपराज्यपाल ने कहा कि जैसे-जैसे यह 100-दिवसीय अभियान आगे बढ़ रहा है, हमें इसकी गति को और तेज करना होगा। सतर्क रहें और एकजुट रहें। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को याद दिलाना चाहता हूं कि एक तस्कर को रोकने से एक जान बचती है और बचाई गई हर जान घाटी में आतंकवाद को कमजोर करती है। साथ मिलकर, हम जम्मू-कश्मीर में नशे की जंजीरों को तोड़ेंगे, आतंकवाद को खत्म करेंगे, और अपनी सड़कों, घरों और भविष्य को रोशन करेंगे। एक महीने पहले, हमने नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर का सपना देखा था। आज, हम यह साबित कर रहे हैं कि यह सपना सच हो सकता है।