{"_id":"69d1855d201381ae370c9ad4","slug":"srinagar-judicial-officers-gave-training-mominabad-srinagar-news-c-10-lko1027-877778-2026-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: न्यायिक अधिकारियों को दिया निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई के लिए प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: न्यायिक अधिकारियों को दिया निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई के लिए प्रशिक्षण
विज्ञापन
श्रीनगर में लगी न्यायाधीशों की कार्यशाला। स्रोत आयोजक
विज्ञापन
- श्रीनगर के मोमिनाबाद स्थित जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी में आयोजित किया कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कश्मीर प्रांत के न्यायिक अधिकारियों के लिए मोमिनाबाद स्थित जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी में न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने में ट्रायल जजों की भूमिका और जिम्मेदारियां विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम न्यायिक अकादमी के मुख्य संरक्षक, मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली के संरक्षण में और शासी समिति के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति शहजाद अजीम ने अपने उद्घाटन भाषण में नागरिकों और न्यायपालिका के बीच पहले संपर्क माध्यम के रूप में ट्रायल अदालतों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां न्याय में देरी का अर्थ है न्याय से वंचित होना है। वहीं जल्दबाजी में दिए गए न्याय से निष्पक्षता पर कोई आंच न आए इसके लिए भी उतनी ही सावधानी बरती जानी चाहिए।
उन्होंने न्यायिक अधिकारियों की भूमिका को एक पवित्र अमानत बताया और उनसे प्रौद्योगिकी को अपनाने, देरी को कम करने तथा निष्पक्षता, दक्षता और मानवीय गरिमा को बनाए रखने का आग्रह किया। न्यायिक अकादमी के निदेशक, नसीर अहमद डार ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और इस बात पर प्रकाश डाला कि इस कार्यक्रम का विषय संविधान के अनुच्छेद 21 के मूल में निहित है जो न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई के अधिकार की गारंटी देता है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था, विशेष रूप से उन अधिकारियों के लिए जिन्होंने वकालत में पूर्व अनुभव के बिना ही सेवा में प्रवेश किया है।
पहला तकनीकी सत्र कश्मीर विश्वविद्यालय की डॉ. सैयद आसिमा रिफाई की ओर से संचालित किया गया, जिसका मुख्य केंद्र बिंदु निष्पक्ष सुनवाई का संवैधानिक अधिदेश था। उन्होंने प्राचीन कानूनी परंपराओं से लेकर आधुनिक संवैधानिक न्यायशास्त्र तक इसके विकास क्रम को रेखांकित किया जिसमें ऐसे ऐतिहासिक निर्णय भी शामिल थे जिन्होंने निष्पक्षता और औचित्य सुनिश्चित करने हेतु कानून की ओर से स्थापित प्रक्रिया के दायरे का विस्तार किया।
पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अब्दुल राशिद मलिक की ओर से संचालित दूसरा सत्र ट्रायल अदालतों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर केंद्रित था। उन्होंने देरी, केस प्रबंधन, सुनवाई स्थगित करना पक्षद्रोही गवाह और प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की तथा न्यायिक तत्परता और कुशल अदालत प्रबंधन पर विशेष जोर दिया।
मानवीय पहलू को पहचानना अत्यंत आवश्यक
समापन सत्र की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बीए किरमानी ने की। उन्होंने न्यायिक आचरण, नैतिकता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि न्यायाधीशों के लिए संस्थागत अखंडता को बनाए रखना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और प्रत्येक मामले में मानवीय पहलू को पहचानना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव सत्र के साथ हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और चुनौतियों पर चर्चा की।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कश्मीर प्रांत के न्यायिक अधिकारियों के लिए मोमिनाबाद स्थित जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी में न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने में ट्रायल जजों की भूमिका और जिम्मेदारियां विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम न्यायिक अकादमी के मुख्य संरक्षक, मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली के संरक्षण में और शासी समिति के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति शहजाद अजीम ने अपने उद्घाटन भाषण में नागरिकों और न्यायपालिका के बीच पहले संपर्क माध्यम के रूप में ट्रायल अदालतों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां न्याय में देरी का अर्थ है न्याय से वंचित होना है। वहीं जल्दबाजी में दिए गए न्याय से निष्पक्षता पर कोई आंच न आए इसके लिए भी उतनी ही सावधानी बरती जानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने न्यायिक अधिकारियों की भूमिका को एक पवित्र अमानत बताया और उनसे प्रौद्योगिकी को अपनाने, देरी को कम करने तथा निष्पक्षता, दक्षता और मानवीय गरिमा को बनाए रखने का आग्रह किया। न्यायिक अकादमी के निदेशक, नसीर अहमद डार ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और इस बात पर प्रकाश डाला कि इस कार्यक्रम का विषय संविधान के अनुच्छेद 21 के मूल में निहित है जो न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई के अधिकार की गारंटी देता है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था, विशेष रूप से उन अधिकारियों के लिए जिन्होंने वकालत में पूर्व अनुभव के बिना ही सेवा में प्रवेश किया है।
पहला तकनीकी सत्र कश्मीर विश्वविद्यालय की डॉ. सैयद आसिमा रिफाई की ओर से संचालित किया गया, जिसका मुख्य केंद्र बिंदु निष्पक्ष सुनवाई का संवैधानिक अधिदेश था। उन्होंने प्राचीन कानूनी परंपराओं से लेकर आधुनिक संवैधानिक न्यायशास्त्र तक इसके विकास क्रम को रेखांकित किया जिसमें ऐसे ऐतिहासिक निर्णय भी शामिल थे जिन्होंने निष्पक्षता और औचित्य सुनिश्चित करने हेतु कानून की ओर से स्थापित प्रक्रिया के दायरे का विस्तार किया।
पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अब्दुल राशिद मलिक की ओर से संचालित दूसरा सत्र ट्रायल अदालतों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर केंद्रित था। उन्होंने देरी, केस प्रबंधन, सुनवाई स्थगित करना पक्षद्रोही गवाह और प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की तथा न्यायिक तत्परता और कुशल अदालत प्रबंधन पर विशेष जोर दिया।
मानवीय पहलू को पहचानना अत्यंत आवश्यक
समापन सत्र की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बीए किरमानी ने की। उन्होंने न्यायिक आचरण, नैतिकता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि न्यायाधीशों के लिए संस्थागत अखंडता को बनाए रखना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और प्रत्येक मामले में मानवीय पहलू को पहचानना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव सत्र के साथ हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और चुनौतियों पर चर्चा की।