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ईरान और अमेरिका की सुलह को नाकाम कहना गलत : महबूबा
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पुलवामा में कार्यक्रम के दौरान महबूबा मुफ्ती। संवाद
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- पीडीपी अध्यक्ष में बातचीत को जटिल और लंबी चलने वाली प्रक्रिया बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को नाकामी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बातचीत को एक जटिल और लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया बताया, जिसके नतीजे आने में समय लगता है। उनकी यह टिप्पणी वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत के ताजा दौर में कोई खास सफलता न मिलने की खबरों के बीच आई है।
पुलवामा में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत कई सालों से अटकी हुई है और उन्होंने तुरंत नतीजों की उम्मीद न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने और संवेदनशीलता वाली बातचीत का हल रातों-रात नहीं निकल सकता।
उन्होंने कहा, मैं इसे नाकामी नहीं मानती। यह एक जटिल मामला है जो सालों से चल रहा है। ऐसी कूटनीतिक कोशिशों की प्रगति का आकलन करने में सब्र रखना बहुत जरूरी है। बातचीत के दौरान तेहरान ने अमेरिका की मांगों के आगे पूरी तरह से घुटने नहीं टेके। उनके मुताबिक, दोनों पक्ष बातचीत में अपने-अपने मजबूत रुख के साथ उतरे थे जिसकी वजह से तुरंत कोई समझौता नहीं हो पाया।
मुफ्ती ने कहा कि बातचीत से तुरंत नतीजों की उम्मीद करना अवास्तविक होगा। अगर आपको लगता है कि इसे एक ही रात में सफल हो जाना चाहिए, तो आप गलत हैं। बातचीत से आखिरकार सकारात्मक नतीजे निकल सकते हैं।
मणिपुर में दो मासूम बच्चों की हत्या बेहद निंदनीय
महबूबा ने रविवार को कहा कि मणिपुर में सैन्य श्रेणी के हथियार से दो मासूम बच्चों की हत्या बेहद निंदनीय और भयावह है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि सत्ता में बैठे लोग इस पर चुप्पी साधे हुए हैं और कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वे बुनियादी मानवाधिकारों और न्याय से ऊपर राजनीतिक अभियानों को प्राथमिकता देते हैं। लोगों को उपेक्षित समझा जाता है और केवल चुनाव के समय ही उन्हें लुभाया जाता है। संकट के समय उनकी सुरक्षा को आसानी से नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को नाकामी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बातचीत को एक जटिल और लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया बताया, जिसके नतीजे आने में समय लगता है। उनकी यह टिप्पणी वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत के ताजा दौर में कोई खास सफलता न मिलने की खबरों के बीच आई है।
पुलवामा में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत कई सालों से अटकी हुई है और उन्होंने तुरंत नतीजों की उम्मीद न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने और संवेदनशीलता वाली बातचीत का हल रातों-रात नहीं निकल सकता।
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उन्होंने कहा, मैं इसे नाकामी नहीं मानती। यह एक जटिल मामला है जो सालों से चल रहा है। ऐसी कूटनीतिक कोशिशों की प्रगति का आकलन करने में सब्र रखना बहुत जरूरी है। बातचीत के दौरान तेहरान ने अमेरिका की मांगों के आगे पूरी तरह से घुटने नहीं टेके। उनके मुताबिक, दोनों पक्ष बातचीत में अपने-अपने मजबूत रुख के साथ उतरे थे जिसकी वजह से तुरंत कोई समझौता नहीं हो पाया।
मुफ्ती ने कहा कि बातचीत से तुरंत नतीजों की उम्मीद करना अवास्तविक होगा। अगर आपको लगता है कि इसे एक ही रात में सफल हो जाना चाहिए, तो आप गलत हैं। बातचीत से आखिरकार सकारात्मक नतीजे निकल सकते हैं।
मणिपुर में दो मासूम बच्चों की हत्या बेहद निंदनीय
महबूबा ने रविवार को कहा कि मणिपुर में सैन्य श्रेणी के हथियार से दो मासूम बच्चों की हत्या बेहद निंदनीय और भयावह है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि सत्ता में बैठे लोग इस पर चुप्पी साधे हुए हैं और कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वे बुनियादी मानवाधिकारों और न्याय से ऊपर राजनीतिक अभियानों को प्राथमिकता देते हैं। लोगों को उपेक्षित समझा जाता है और केवल चुनाव के समय ही उन्हें लुभाया जाता है। संकट के समय उनकी सुरक्षा को आसानी से नजरअंदाज कर दिया जाता है।