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Srinagar News: कश्मीरियों पर हमले का विरोध, पीडीपी ने किया प्रदर्शन
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PDP supporters hold placards and raise slogans during a protest in Srinagar against the assault
- फोटो : katra news
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- पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पार्टी मुख्यालय से नहीं निकलने दिया, महबूबा ने जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उत्तराखंड में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमले के विरोध में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय के गेट पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें गेट से आगे नहीं जाने दिया। इस पर भी पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रोष जताया।
शनिवार सुबह से ही पीडीपी का मुख्यालय, शेर-ए-कश्मीर पार्क और आसपास के इलाके पुलिस छावनी बने नजर आए। पीडीपी कार्यकर्ता जुटते गए और सुबह करीब 11 बजे उन्होंने प्रदर्शन के लिए मुख्यालय से बाहर निकलने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया।
पीडीपी के नेताओं ने गेट पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया और कश्मीरियों की सुरक्षा की मांग की। पीडीपी नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में रोजगार की कमी है। नौकरियां मिल नहीं रहीं। यहां के युवा जब मेहनत कर दो पैसे कमाने दूसरे राज्यों में जाते हैं तो उन्हें मारा-पीटा जाता है। उपद्रवी उनकी रील बनाते हैं, उन्हें वायरल करते हैं और वहां की सरकार केवल मूक दर्शक बनी रहती है। यूटी के मुख्यमंत्री को आगे बढ़कर केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से बात कर कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करानी चाहिए।
पीडीपी के श्रीनगर जिला अध्यक्ष अब्दुल कयूम भट्ट ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता मुख्यालय से बाहर जाकर प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी। जो लोग बाहर कश्मीर के लोगों पर हमला करते हैं वे आजाद घूम रहे हैं। जो लोग शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हमलों के खिलाफ विरोध जताना चाहते हैं, उन्हें रोका जा रहा है।
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क्या कश्मीरियों को भी नए भारत में रहने की इजाजत है : महबूबा
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को एक्स पर कहा कि जब उत्तराखंड में एक युवा कश्मीरी शॉल बेचने वाले को लगभग पीट-पीटकर मार डाला जाता है तो कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आता। जब पीडीपी ऐसे अत्याचारों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की कोशिश करती है तो मार्च को कुचलने के लिए पूरी पुलिस मशीनरी लगा दी जाती है। कश्मीरियों को जम्मू-कश्मीर में पिंजरे में बंद कर दिया गया है। जब वे ईमानदारी से रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर निकलते हैं तो उन्हें पीटा जाता है। जब जीने को भी अपराध मान लिया जाए तो कश्मीरी यहां से कहां जाएं। क्या उन्हें नए भारत में रहने की भी इजाजत है।
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श्रीनगर। उत्तराखंड में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमले के विरोध में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय के गेट पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें गेट से आगे नहीं जाने दिया। इस पर भी पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रोष जताया।
शनिवार सुबह से ही पीडीपी का मुख्यालय, शेर-ए-कश्मीर पार्क और आसपास के इलाके पुलिस छावनी बने नजर आए। पीडीपी कार्यकर्ता जुटते गए और सुबह करीब 11 बजे उन्होंने प्रदर्शन के लिए मुख्यालय से बाहर निकलने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया।
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पीडीपी के नेताओं ने गेट पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया और कश्मीरियों की सुरक्षा की मांग की। पीडीपी नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में रोजगार की कमी है। नौकरियां मिल नहीं रहीं। यहां के युवा जब मेहनत कर दो पैसे कमाने दूसरे राज्यों में जाते हैं तो उन्हें मारा-पीटा जाता है। उपद्रवी उनकी रील बनाते हैं, उन्हें वायरल करते हैं और वहां की सरकार केवल मूक दर्शक बनी रहती है। यूटी के मुख्यमंत्री को आगे बढ़कर केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से बात कर कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करानी चाहिए।
पीडीपी के श्रीनगर जिला अध्यक्ष अब्दुल कयूम भट्ट ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता मुख्यालय से बाहर जाकर प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी। जो लोग बाहर कश्मीर के लोगों पर हमला करते हैं वे आजाद घूम रहे हैं। जो लोग शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हमलों के खिलाफ विरोध जताना चाहते हैं, उन्हें रोका जा रहा है।
क्या कश्मीरियों को भी नए भारत में रहने की इजाजत है : महबूबा
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को एक्स पर कहा कि जब उत्तराखंड में एक युवा कश्मीरी शॉल बेचने वाले को लगभग पीट-पीटकर मार डाला जाता है तो कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आता। जब पीडीपी ऐसे अत्याचारों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की कोशिश करती है तो मार्च को कुचलने के लिए पूरी पुलिस मशीनरी लगा दी जाती है। कश्मीरियों को जम्मू-कश्मीर में पिंजरे में बंद कर दिया गया है। जब वे ईमानदारी से रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर निकलते हैं तो उन्हें पीटा जाता है। जब जीने को भी अपराध मान लिया जाए तो कश्मीरी यहां से कहां जाएं। क्या उन्हें नए भारत में रहने की भी इजाजत है।
