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Srinagar News: रावलपोरा-बाग-ए-मेहताब नहर रोड पर 50 साल पुराने पेड़ काटे
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श्रीनगर के रावलपोरा में काटे पेड़। संवाद
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- लोगों ने बताया आपराधिक कृत्य, विधायक से की दखल देने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। शहर के बाहरी इलाके रावलपोरा-बाग-ए-मेहताब नहर रोड पर दशकों पुराने शहतूत के पेड़ों की कटाई से पर्यावरण प्रेमियों में गहरी चिंता पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे कंक्रीट टाइलें बिछाने के जारी काम के दौरान कई पुराने पेड़ों को काट दिया गया। इनमें कुछ पेड़ों की उम्र लगभग 50 वर्ष बताई जा रही है।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई को क्षेत्र की हरित विरासत पर सीधा हमला करार देते हुए इसे आपराधिक कृत्य बताया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर कश्मीर की हरियाली लगातार कम होती जा रही है जो भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, यह सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं बल्कि दशकों में तैयार हुई प्राकृतिक धरोहर का नुकसान है जिसकी भरपाई आसान नहीं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पेड़ों की आगे की कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए और यह जांच की जाए कि आखिर किन परिस्थितियों में इतने पुराने पेड़ों को हटाने का फैसला लिया गया।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विधायक से तत्काल हस्तक्षेप करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नेटिजंस का कहना है कि देश के कई हिस्सों में सड़क विकास के दौरान पुराने पेड़ों को बचाने के उपाय किए जाते हैं लेकिन कश्मीर में विकास अक्सर हरियाली की कीमत पर किया जा रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। शहर के बाहरी इलाके रावलपोरा-बाग-ए-मेहताब नहर रोड पर दशकों पुराने शहतूत के पेड़ों की कटाई से पर्यावरण प्रेमियों में गहरी चिंता पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे कंक्रीट टाइलें बिछाने के जारी काम के दौरान कई पुराने पेड़ों को काट दिया गया। इनमें कुछ पेड़ों की उम्र लगभग 50 वर्ष बताई जा रही है।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई को क्षेत्र की हरित विरासत पर सीधा हमला करार देते हुए इसे आपराधिक कृत्य बताया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर कश्मीर की हरियाली लगातार कम होती जा रही है जो भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
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एक स्थानीय निवासी ने कहा, यह सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं बल्कि दशकों में तैयार हुई प्राकृतिक धरोहर का नुकसान है जिसकी भरपाई आसान नहीं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पेड़ों की आगे की कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए और यह जांच की जाए कि आखिर किन परिस्थितियों में इतने पुराने पेड़ों को हटाने का फैसला लिया गया।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विधायक से तत्काल हस्तक्षेप करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नेटिजंस का कहना है कि देश के कई हिस्सों में सड़क विकास के दौरान पुराने पेड़ों को बचाने के उपाय किए जाते हैं लेकिन कश्मीर में विकास अक्सर हरियाली की कीमत पर किया जा रहा है।