कौन आया, कहां बसा और कैसे बने दस्तावेज?: कश्मीर में आबादी के बदलते समीकरण की होगी पड़ताल, नावलेकर समिति का गठन
नावलेकर समिति 10 से 12 अगस्त तक जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आवाजाही, घुसपैठ, विदेशी नागरिकों की पहचान, दस्तावेजों और असामान्य बसावट से जुड़े जनसांख्यिकीय बदलावों की जमीनी पड़ताल करेगी।
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जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आवाजाही से अवैध बस्तियों तक जनसांख्यिकी बदलाव का अब पूरा हिसाब होगा। असामान्य रूप से बदल रहे जनसांख्यिकीय स्वरूप, रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठ का अध्ययन करने के लिए गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति हर कड़ी की पड़ताल करेगी।
समिति सीमा पार आवाजाही से लेकर असामान्य बसावट, विदेशी नागरिकों की पहचान, दस्तावेज की सत्यता और आबादी में बदलाव तक का अध्ययन करेगी। रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपी जाएगी। 10 से 12 अगस्त तक समिति संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचकर स्थानीय लोगों से बात करेगी और सुरक्षा एजेंसियों से भी जानकारी जुटाएगी।
आईबी-एलओसी पर खास नजर
समिति सीमा पार गतिविधियों और अवैध घुसपैठ के कारणों का अध्ययन कर सीमा प्रबंधन मजबूत करने का सुझाव मंत्रालय को देगी। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से लगे कठुआ, सांबा और नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लगे राजोरी, पुंछ, कुपवाड़ा व बारामुला जैसे क्षेत्र में भी जा सकती है।
- सीमा पार से कितने लोग आए।
- यहां आने के बाद ठिकाना कहां बनाया।
- स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान कैसे हुई।
- कहां से कौन से दस्तावेज तैयार हुए और उनकी आगे की आवाजाही किस तरह हुई।
जम्मू से घाटी तक माइग्रेशन कॉरिडोर की चुनौती
जम्मू-कश्मीर में सीमा से अंदरूनी इलाकों तक घुसपैठ की बड़ी समस्या आज भी है। इसलिए समिति सीमा क्षेत्र से जम्मू, जम्मू से कश्मीर घाटी तक बनने वाले माइग्रेशन कॉरिडोर की चुनौती से निपटने की कोशिश करेगी। हाल में रियासी, रामबन और कठुआ में विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन से जुड़े मामलों ने इसकी गंभीरता को बढ़ा दिया है।
केस स्टडी बनेंगी जम्मू की अवैध बस्तियां
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य कहते हैं कि जम्मू शहर और उसके आसपास लंबे समय से विदेशी नागरिकों और असामान्य बसावट को लेकर सुरक्षा एजेंसियां कार्रवाई करती रही हैं। ऐसे में समिति के अध्ययन में किराये के मकान, मजदूर बस्तियां, निर्माण क्षेत्र, छोटे कारोबार और ऐसे इलाकों में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी केस स्टडी बनेगी। यहां समिति प्रशासन से यह डेटा मांग सकती है कि पिछले वर्षों में कितने विदेशी नागरिकों की पहचान हुई, कितने लोगों का सत्यापन हुआ, कितनों की राष्ट्रीयता की पुष्टि हुई और कितने मामलों में निर्वासन की कार्रवाई की गई।
बस घुसपैठ नहीं, पूरे नेटवर्क पर नजर
जनसांख्यिकी बदलाव के जानकार आर संदीपन बताते हैं कि समिति बस घुसपैठ नहीं, पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाएगी। सूत्रों के अनुसार इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों से घुसपैठ, पहचान, दस्तावेज, बसावट और आवाजाही की जानकारी मांगी गई है।
समिति का आगामी एजेंडा
पंजाब (भारत-पाक सीमा) : ड्रोन से होने वाली हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के साथ सीमावर्ती गांवों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव और प्रवासियों के फर्जी प्रमाण पत्र की जांच।