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Women's Day: 28 साल का शिक्षण सफर, लाखों दिलों में उजाला, त्सेवांग डोलमा ने बदल दी सरकारी स्कूलों की कहानी

जैनब संधू, संवाद न्यूज एजेंसी लेह Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 08 Mar 2026 11:22 AM IST
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सार

लेह की शिक्षिका त्सेवांग डोलमा 28 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित सेवाकार्य कर रही हैं और उनके योगदान के लिए उन्हें 2025 में जिला पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Women's Day Special Tsewang Dolma A dedicated teacher guiding a new generation
शिक्षिका त्सेवांग डोलमा बच्चों के साथ - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लद्दाख की समर्पित शिक्षिका त्सेवांग डोलमा की प्रेरणादायक यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिबद्धता, धैर्य और सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। 28 वर्षों के शिक्षण अनुभव के साथ, त्सेवांग डोलमा ने वर्ष 1997 में शिक्षा विभाग में अपनी सेवा शुरू की और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2025 में जिला पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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वर्तमान में लेह जिले के चुमाथंग गांव के एक सरकारी हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका के रूप में कार्यरत डोलमा का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार बच्चों के समग्र विकास के लिए व्यावहारिक और सैद्धांतिक शिक्षा के बीच संतुलन बहुत आवश्यक है। उनके अनुसार सैद्धांतिक शिक्षा हमें बुनियादी ज्ञान देती है, जबकि व्यावहारिक शिक्षा यह सिखाती है कि उस ज्ञान का जीवन में कैसे उपयोग किया जाए। यह संतुलन बच्चों में आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करता है, जिसे 21वीं सदी के कौशल के रूप में जाना जाता है।
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डोलमा बताती हैं कि आजकल शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों को अपनाकर पढ़ाई को अधिक प्रभावी बना रहे हैं। कक्षा में चर्चा, प्रोजेक्ट, गतिविधियां और वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक सार्थक और दीर्घकालिक बनाया जा रहा है।

Women's Day Special Tsewang Dolma A dedicated teacher guiding a new generation
शिक्षिका त्सेवांग डोलमा बच्चों के साथ - फोटो : सोशल मीडिया

लद्दाख की शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए वह कहती हैं कि शिक्षा विभाग नियमित रूप से शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और एक्सपोजर कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही सरकार सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसके कारण अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है और स्कूलों में नामांकन में भी वृद्धि हुई है।

वह कहती हैं आज लद्दाख के सरकारी स्कूल बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से सुसज्जित हैं। इसी कारण माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के लिए अधिक विश्वास दिखा रहे हैं। लेह के आइबेक्स कॉलोनी में लद्दाख मॉडल स्कूल की स्थापना और विभिन्न गांवों में ऐसे मॉडल स्कूलों का खुलना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

डोलमा बताती हैं कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं, जो बच्चों के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव होते हैं, में लद्दाख के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। उनके अनुसार इस सफलता का मुख्य आधार बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के मजबूत आधार को तैयार करना है।

जिला पुरस्कार प्राप्त करने पर वह इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्कूल स्टाफ और समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम मानती हैं। अपने करियर में उन्होंने शिक्षक, जोनल रिसोर्स पर्सन, क्लासरूम रिसोर्स पर्सन तथा प्राथमिक और मिडिल स्कूल की प्रमुख जैसी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है, जिसने उन्हें शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने का व्यापक अनुभव दिया।

डोलमा की अपनी शैक्षणिक यात्रा लेह जिले के साबू गांव से शुरू हुई, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। नौ भाई-बहनों वाले बड़े परिवार में वह आठवें स्थान पर थीं। बाद में उन्होंने लेह के प्राइमरी स्कूल हाउसिंग कॉलोनी में अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनकी बड़ी बहन, जो चिकित्सा विभाग में कार्यरत थीं, और उनके बहनोई, जो एक राजपत्रित अधिकारी थे, ने उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वह याद करती हैं कि उस समय सरकारी स्कूलों में अंग्रेज़ी भाषा का एक्सपोज़र बहुत कम था और छठी कक्षा से ही अंग्रेज़ी पढ़ाई शुरू होती थी, जिससे कॉलेज में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने और शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

विवाह के बाद भी उन्हें अपने पति, ससुराल पक्ष और बच्चों का पूरा सहयोग मिला, जिससे वह पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने पेशेवर दायित्वों को संतुलित कर सकीं।

अपने पूरे करियर के दौरान डोलमा ने हमेशा बच्चों के लिए सुरक्षित, खुशहाल और सहयोगी सीखने का वातावरण बनाने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि स्कूल केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं बल्कि मूल्य, सामाजिक व्यवहार, नैतिक और शारीरिक शक्ति तथा आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं।

यदि हम मजबूत प्रारंभिक शिक्षा और गतिविधि आधारित सीखने पर ध्यान दें, तो हम बच्चों को आत्मविश्वासी और संवेदनशील नागरिक बनने में मदद कर सकते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में अपनी इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए त्सेवांग डोलमा गतिविधि आधारित शिक्षा, मजबूत आधारभूत शिक्षा और बच्चों के समग्र विकास के लिए लगातार काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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