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Udhampur News: दो महीने से डोर-टू-डोर सेवा ठप, टेंडर के फेर में फंसी व्यवस्था, गलियों व नालियों में कूड़ा फेंकने को लोग मजबूर
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उधमपुर। शहर को साफ-सुथरा रखने का दावा करने वाली नगर परिषद की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा पिछले दो महीने से दम तोड़ रही है। टेंडर की अवधि समाप्त होने और नए टेंडर की प्रक्रिया अधर में लटकने के कारण सभी 21 वार्डों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है।
हालात ऐसे हैं कि घरों से कचरा न उठने के कारण लोग उसे पॉलिथीन में भरकर गलियों और नालियों में फेंक रहे हैं जिससे न केवल गंदगी फैल रही है बल्कि बीमारियां पनपने का खतरा भी बढ़ गया है।
नगर परिषद नियमानुसार हर साल सफाई का टेंडर जारी करती है। इस बार सेवा प्रदाता कंपनी ने अनुबंध खत्म होने से करीब एक महीना पहले ही काम बंद कर दिया था। इसके बाद से अब तक नया टेंडर फाइनल नहीं हो पाया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि सफाई कर्मचारी सड़कों की सफाई तो कर रहे हैं लेकिन घरों का कचरा उठाने वाला कोई नहीं है।
सफाई कर्मचारियों की कमी से जूझ रही परिषद के लिए भी शहर को साफ-सुथरा बनाए रखना चुनौती बन गया है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा बंद होने के कारण कई वार्डों के कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। खुले स्थानों पर भी कचरा जमा हो गया है और नालियां कचरे से भरकर ब्लाक होने लगी हैं।
गर्मी ने बढ़ाई चिंता, मच्छरों का बढ़ा प्रकोप
मार्च का महीना शुरू होते ही पारा चढ़ने लगा है। धूप तेज होने के कारण सड़कों पर पड़े कचरे के ढेर से दुर्गंध आने लगी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही कचरा संग्रहण शुरू नहीं हुआ तो मक्खी और मच्छरों के कारण संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। विशेषकर तंग गलियों में कचरा जमा होने से पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
जनता दे रही पैसा, फिर भी सुविधा नदारद
नगर परिषद इस सेवा के बदले शहरवासियों से हर महीने चार्ज लेती है। घरेलू उपभोक्ता के लिए 100 रुपये प्रति माह तो दुकानदार या व्यापारी वर्ग से 250 रुपये प्रति माह शुल्क लिया जा रहा है। इसके बावजूद लोगों को गंदगी के बीच जीवनयापन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या समय पर शुल्क देने पर भी सुविधा नहीं मिलेगी? लोगों को घर के नजदीक ही गंदगी फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कचरे को ठिकाने लगाना सबसे बड़ी चुनौती
स्थानीय विनय कुमार के अनुसार सफाई के बाद फिर गंदगी के ढेर लग रहे हैं। घरों का कचरा गलियों में फैल रहा है। मदन लाल ने बताया कि कचरे को ठिकाने लगाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। नगर परिषद जल्द समाधान करे। विशाल गुप्ता के अनुसार गर्मी शुरू हो गई है, सड़न पर बदबू फैल रही है। जल्द सेवा बहाल हो। अशोक कुमार ने कहा कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा बंद होने से गली-मोहल्लों में फिर से कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। अगर जल्द सेवा को बहाल नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में समस्या विकराल हो जाएगी।
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद पहली अप्रैल से शहर में सेवा बहाल कर दी जाएगी। फिलहाल नगर परिषद अपने स्तर पर शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कहीं से भी शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। शहरवासियों से भी अपील है कि वे नगर परिषद का सहयोग करें तथा घरों का कचरा खुले स्थानों और नालियों में न फेंककर निर्धारित डंपिंग पॉइंट्स पर ही डालें।
-सद्दाम हुसैन, सीईओ, नगर परिषद
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हालात ऐसे हैं कि घरों से कचरा न उठने के कारण लोग उसे पॉलिथीन में भरकर गलियों और नालियों में फेंक रहे हैं जिससे न केवल गंदगी फैल रही है बल्कि बीमारियां पनपने का खतरा भी बढ़ गया है।
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नगर परिषद नियमानुसार हर साल सफाई का टेंडर जारी करती है। इस बार सेवा प्रदाता कंपनी ने अनुबंध खत्म होने से करीब एक महीना पहले ही काम बंद कर दिया था। इसके बाद से अब तक नया टेंडर फाइनल नहीं हो पाया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि सफाई कर्मचारी सड़कों की सफाई तो कर रहे हैं लेकिन घरों का कचरा उठाने वाला कोई नहीं है।
सफाई कर्मचारियों की कमी से जूझ रही परिषद के लिए भी शहर को साफ-सुथरा बनाए रखना चुनौती बन गया है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा बंद होने के कारण कई वार्डों के कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। खुले स्थानों पर भी कचरा जमा हो गया है और नालियां कचरे से भरकर ब्लाक होने लगी हैं।
गर्मी ने बढ़ाई चिंता, मच्छरों का बढ़ा प्रकोप
मार्च का महीना शुरू होते ही पारा चढ़ने लगा है। धूप तेज होने के कारण सड़कों पर पड़े कचरे के ढेर से दुर्गंध आने लगी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही कचरा संग्रहण शुरू नहीं हुआ तो मक्खी और मच्छरों के कारण संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। विशेषकर तंग गलियों में कचरा जमा होने से पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
जनता दे रही पैसा, फिर भी सुविधा नदारद
नगर परिषद इस सेवा के बदले शहरवासियों से हर महीने चार्ज लेती है। घरेलू उपभोक्ता के लिए 100 रुपये प्रति माह तो दुकानदार या व्यापारी वर्ग से 250 रुपये प्रति माह शुल्क लिया जा रहा है। इसके बावजूद लोगों को गंदगी के बीच जीवनयापन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या समय पर शुल्क देने पर भी सुविधा नहीं मिलेगी? लोगों को घर के नजदीक ही गंदगी फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कचरे को ठिकाने लगाना सबसे बड़ी चुनौती
स्थानीय विनय कुमार के अनुसार सफाई के बाद फिर गंदगी के ढेर लग रहे हैं। घरों का कचरा गलियों में फैल रहा है। मदन लाल ने बताया कि कचरे को ठिकाने लगाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। नगर परिषद जल्द समाधान करे। विशाल गुप्ता के अनुसार गर्मी शुरू हो गई है, सड़न पर बदबू फैल रही है। जल्द सेवा बहाल हो। अशोक कुमार ने कहा कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा बंद होने से गली-मोहल्लों में फिर से कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। अगर जल्द सेवा को बहाल नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में समस्या विकराल हो जाएगी।
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद पहली अप्रैल से शहर में सेवा बहाल कर दी जाएगी। फिलहाल नगर परिषद अपने स्तर पर शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कहीं से भी शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। शहरवासियों से भी अपील है कि वे नगर परिषद का सहयोग करें तथा घरों का कचरा खुले स्थानों और नालियों में न फेंककर निर्धारित डंपिंग पॉइंट्स पर ही डालें।
-सद्दाम हुसैन, सीईओ, नगर परिषद