{"_id":"69cd78b189d27cecdd07807b","slug":"health-worker-strike-udhampur-news-c-202-1-udh1011-134286-2026-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: आपातकालीन सेवाएं बहाल पर ओपीडी बेहाल, स्वास्थ्य सेवाओं पर हड़ताल का ग्रहण, इलाज के लिए भटके मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: आपातकालीन सेवाएं बहाल पर ओपीडी बेहाल, स्वास्थ्य सेवाओं पर हड़ताल का ग्रहण, इलाज के लिए भटके मरीज
विज्ञापन
विज्ञापन
उधमपुर/रियासी/कटड़ा। जम्मू संभाग में पैरामेडिकल स्टाफ और नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की बुधवार से शुरू हुई तीन दिवसीय सामूहिक हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई। अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ओपीडी के बाहर ताले लटके नजर आए। ढाई दिन के वेतन कटौती के आदेश और वर्षों से लंबित नियमितीकरण की मांग को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन ने हजारों मरीजों को परेशान कर दिया।
रियासी के माड़ी स्थित जिला अस्पताल में सुबह होते ही स्थिति बिगड़ गई। जम्मू कश्मीर मेडिकल एम्लाइज फेडरेशन के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी ओपीडी ब्लॉक के बाहर धरने पर बैठ गए। जिला प्रधान नरेश शर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक वेतन कटौती का आदेश वापस नहीं लिया जाता और एनएचएम कर्मियों के भविष्य को लेकर ठोस नीति नहीं बनती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अस्पताल में कामकाज ठप होने से ठाकराकोट और पनासा जैसे दुर्गम क्षेत्रों से आए मरीजों को परेशान होना पड़ा। पनासा के यूनिस और ठाकराकोट के मोहम्मद कयूम ने बताया कि वे अपने परिजन के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे थे लेकिन घंटों इंतजार के बाद उन्हें बिना डॉक्टर को दिखाए घर जाना पड़ा।
डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा, एमरजेंसी पर्ची पर हुआ इलाज
जीएमसी उधमपुर में स्थिति कुछ अलग रही। यहां पैरामेडिकल और एनएचएम स्टाफ के संयुक्त प्रदर्शन के बीच डॉक्टरों ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी। पर्ची काउंटर बंद होने के बावजूद डॉक्टरों ने मेडिकल छात्रों के सहयोग से इमरजेंसी पर्ची पर ओपीडी सेवाओं का संचालन किया। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि गंभीर मरीजों की सुविधा के लिए शाम पांच बजे तक वैकल्पिक व्यवस्था जारी रही। हालांकि स्टाफ की कमी के कारण जांच और उपचार की प्रक्रिया धीमी रही। प्रदर्शन स्थल पर डॉ. धीरज शर्मा और डॉ. तमन्ना ने सरकार पर कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, जब डॉक्टर और स्टाफ हर मुश्किल घड़ी में जान जोखिम में डालकर काम करते हैं तो उनके वेतन में कटौती करना सरासर अन्याय है।
संविदा कर्मियों का छलका दर्द
धर्मनगरी कटड़ा और चिनैनी में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। कटड़ा सरकारी अस्पताल में एनएचएम कर्मियों ने नौकरी की सुरक्षा और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर दो घंटे तक प्रदर्शन किया। चिनैनी सीएचसी के बाहर प्रदर्शन कर रहे शौकत बट्ट ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कोविड जैसी महामारी में 18-20 साल तक सेवाएं दीं लेकिन आज भी भविष्य अनिश्चित है। कम वेतन में परिवार का पोषण अब नामुमकिन हो गया है। ओपीडी सेवाएं बंद रहने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी आंशिक असुविधा हुई।
विवाद की जड़ : ढाई दिन का वेतन और एनएचएम की मांगें
हड़ताल के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, स्थायी स्वास्थ्य कर्मचारियों के ढाई दिन के वेतन कटौती का आदेश जिसका विरोध लंबे समय से चल रहा है। दूसरा, एनएचएम कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण की मांग। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार बार-बार आश्वासन तो देती है लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
आज और कल बढ़ सकती है चुनौती
हड़ताल शुक्रवार तक जारी रहने वाली है। यदि सरकार और जॉइंट एक्शन कमेटी के बीच बातचीत का कोई परिणाम नहीं निकलता है तो आने वाले दो दिन में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और पैरामेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण टीकाकरण, सामान्य जांच और लैब टेस्ट जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए हैं। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया है लेकिन कर्मचारी अब केवल ठोस आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फिलहाल कर्मियों और सरकार के बीच विवाद में मरीज पिसने को मजबूर हैं।
Trending Videos
रियासी के माड़ी स्थित जिला अस्पताल में सुबह होते ही स्थिति बिगड़ गई। जम्मू कश्मीर मेडिकल एम्लाइज फेडरेशन के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी ओपीडी ब्लॉक के बाहर धरने पर बैठ गए। जिला प्रधान नरेश शर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक वेतन कटौती का आदेश वापस नहीं लिया जाता और एनएचएम कर्मियों के भविष्य को लेकर ठोस नीति नहीं बनती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अस्पताल में कामकाज ठप होने से ठाकराकोट और पनासा जैसे दुर्गम क्षेत्रों से आए मरीजों को परेशान होना पड़ा। पनासा के यूनिस और ठाकराकोट के मोहम्मद कयूम ने बताया कि वे अपने परिजन के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे थे लेकिन घंटों इंतजार के बाद उन्हें बिना डॉक्टर को दिखाए घर जाना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा, एमरजेंसी पर्ची पर हुआ इलाज
जीएमसी उधमपुर में स्थिति कुछ अलग रही। यहां पैरामेडिकल और एनएचएम स्टाफ के संयुक्त प्रदर्शन के बीच डॉक्टरों ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी। पर्ची काउंटर बंद होने के बावजूद डॉक्टरों ने मेडिकल छात्रों के सहयोग से इमरजेंसी पर्ची पर ओपीडी सेवाओं का संचालन किया। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि गंभीर मरीजों की सुविधा के लिए शाम पांच बजे तक वैकल्पिक व्यवस्था जारी रही। हालांकि स्टाफ की कमी के कारण जांच और उपचार की प्रक्रिया धीमी रही। प्रदर्शन स्थल पर डॉ. धीरज शर्मा और डॉ. तमन्ना ने सरकार पर कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, जब डॉक्टर और स्टाफ हर मुश्किल घड़ी में जान जोखिम में डालकर काम करते हैं तो उनके वेतन में कटौती करना सरासर अन्याय है।
संविदा कर्मियों का छलका दर्द
धर्मनगरी कटड़ा और चिनैनी में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। कटड़ा सरकारी अस्पताल में एनएचएम कर्मियों ने नौकरी की सुरक्षा और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर दो घंटे तक प्रदर्शन किया। चिनैनी सीएचसी के बाहर प्रदर्शन कर रहे शौकत बट्ट ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कोविड जैसी महामारी में 18-20 साल तक सेवाएं दीं लेकिन आज भी भविष्य अनिश्चित है। कम वेतन में परिवार का पोषण अब नामुमकिन हो गया है। ओपीडी सेवाएं बंद रहने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी आंशिक असुविधा हुई।
विवाद की जड़ : ढाई दिन का वेतन और एनएचएम की मांगें
हड़ताल के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, स्थायी स्वास्थ्य कर्मचारियों के ढाई दिन के वेतन कटौती का आदेश जिसका विरोध लंबे समय से चल रहा है। दूसरा, एनएचएम कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण की मांग। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार बार-बार आश्वासन तो देती है लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
आज और कल बढ़ सकती है चुनौती
हड़ताल शुक्रवार तक जारी रहने वाली है। यदि सरकार और जॉइंट एक्शन कमेटी के बीच बातचीत का कोई परिणाम नहीं निकलता है तो आने वाले दो दिन में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और पैरामेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण टीकाकरण, सामान्य जांच और लैब टेस्ट जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए हैं। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया है लेकिन कर्मचारी अब केवल ठोस आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फिलहाल कर्मियों और सरकार के बीच विवाद में मरीज पिसने को मजबूर हैं।