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Udhampur News: 42 मीटर लंबे पुल के निर्माण पर स्थगन याचिका कोर्ट ने खारिज की
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उधमपुर। जिले के ठाठली पंजर (मोंगरी) क्षेत्र में 50 हजार से अधिक लोगों की आबादी को राहत देने वाले 42 मीटर लंबे मोटर योग्य पुल के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। उप-न्यायाधीश की अदालत ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर की गई अस्थायी निषेधाज्ञा याचिका को खारिज कर दिया है।
मामले के अनुसार 7 सितंबर 2025 को हुई भारी बारिश और भूस्खलन के कारण ठाठली स्थित पुराना 18 मीटर लंबा पुल पूरी तरह बह गया था। इससे मोंगरी ब्लॉक का जिला मुख्यालय उधमपुर से संपर्क टूट गया था और आपातकालीन स्थिति में हवाई मार्ग से राहत सामग्री पहुंचानी पड़ी थी। स्थिति को देखते हुए पुल विशेषज्ञों की सिफारिश पर पुल का स्पैन बढ़ाकर 42 मीटर करने और इसे नए सिरे से संरेखित करने का फैसला लिया गया।
स्थानीय निवासी लवकेश और मुल्ख राज ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि लोक निर्माण, पीएमजीएसवाई विभाग और ठेकेदार उनकी निजी भूमि पर अवैध रूप से पुल का निर्माण कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि निर्माण के कारण उनकी भूमि और वृक्षों को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, पीएमजीएसवाई विभाग की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 14 मार्च 2026 को राजस्व विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण और सीमांकन किया गया था। जांच में पाया गया कि संरेखण के लिए याचिकाकर्ताओं की केवल 1.5 मरला जमीन की आवश्यकता है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद पाया कि यह परियोजना व्यापक जनहित और 50,000 से अधिक निवासियों की सुरक्षा से जुड़ी है। अदालत ने विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) परियोजना के कार्य में बाधा डालने या देरी करने वाला कोई भी स्थगन आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जनहित की तुलना में याचिकाकर्ताओं को कोई अपूरणीय क्षति नहीं हो रही है और उन्हें नियमानुसार भूमि का मुआवजा दिया जा रहा है। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने दाखिल याचिका को निरस्त कर दिया। इससे पुल के निर्माण कार्य की गति और तेज होने की उम्मीद है।
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मामले के अनुसार 7 सितंबर 2025 को हुई भारी बारिश और भूस्खलन के कारण ठाठली स्थित पुराना 18 मीटर लंबा पुल पूरी तरह बह गया था। इससे मोंगरी ब्लॉक का जिला मुख्यालय उधमपुर से संपर्क टूट गया था और आपातकालीन स्थिति में हवाई मार्ग से राहत सामग्री पहुंचानी पड़ी थी। स्थिति को देखते हुए पुल विशेषज्ञों की सिफारिश पर पुल का स्पैन बढ़ाकर 42 मीटर करने और इसे नए सिरे से संरेखित करने का फैसला लिया गया।
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स्थानीय निवासी लवकेश और मुल्ख राज ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि लोक निर्माण, पीएमजीएसवाई विभाग और ठेकेदार उनकी निजी भूमि पर अवैध रूप से पुल का निर्माण कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि निर्माण के कारण उनकी भूमि और वृक्षों को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, पीएमजीएसवाई विभाग की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 14 मार्च 2026 को राजस्व विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण और सीमांकन किया गया था। जांच में पाया गया कि संरेखण के लिए याचिकाकर्ताओं की केवल 1.5 मरला जमीन की आवश्यकता है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद पाया कि यह परियोजना व्यापक जनहित और 50,000 से अधिक निवासियों की सुरक्षा से जुड़ी है। अदालत ने विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) परियोजना के कार्य में बाधा डालने या देरी करने वाला कोई भी स्थगन आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जनहित की तुलना में याचिकाकर्ताओं को कोई अपूरणीय क्षति नहीं हो रही है और उन्हें नियमानुसार भूमि का मुआवजा दिया जा रहा है। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने दाखिल याचिका को निरस्त कर दिया। इससे पुल के निर्माण कार्य की गति और तेज होने की उम्मीद है।