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Udhampur News: हड़ताल से सफाई व्यवस्था ध्वस्त, कचरे से गलियों के मुहाने तक हुए बंद
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उधमपुर। अस्थायी कर्मियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पिछले 17 दिनों से जारी है। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सड़कें पहले से ही गंदगी से पटी हुई थीं, अब गलियों के मुहाने तक कचरे के अंबार से बंद होने लगे हैं और लोगों की आवाजाही से लेकर दुकानदारों का दुकानों पर बैठकर कारोबार करना मुश्किल हो गया है। अमरनाथ यात्रा और बरसात से ठीक पहले शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर बनी इस संकट की स्थिति से चिंतित शहरवासियों का धैर्य भी अब जवाब देने लगा है।
उनका कहना है कि हम कर्मचारियों की मांगों का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता ने शहरवासियों को गंभीर संकट में डाल लिया है। अगर जल्द सरकार ने समस्या का समाधान नहीं निकाला तो मजबूर होकर उन्हें भी सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
गौरतलब है कि लगातार 17 दिन से चल रही सफाई कर्मियों की हड़ताल ने पूरे शहर की सफाई व्यवस्था को चौपट कर दिया है। जानकारी के अनुसार उधमपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 टन कचरा निकलता है। पिछले 17 दिनों में करीब 500 टन कचरा विभिन्न स्थानों पर जमा हो चुका है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई गलियों के प्रवेश द्वार तक कचरे से पटने लगे हैं। कई जगहों पर राहत पाने के लिए लोग कचरे को आग के हवाले कर रहे हैं लेकिन इससे राहत की बजाय सार्वजनिक सेहत और पर्यावरण के लिए भी संकट पैदा होने का जोखिम बढ़ने लगा है। इस बीच हो रही बारिश से यह कचरा सड़कों पर भी जगह-जगह फैल गया है और ओवरफ्लो होकर बह रही नालियों से लोगों के घरों तक पहुंचने लगा है।
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इधर, हड़ताली सफाई कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेगी तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। उधमपुर यूनियन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि फिलहाल सोमवार को मुख्यमंत्री के साथ बैठक पर उम्मीद टिकी है। शहरवासियों से भी अपील की गई कि सफाई कर्मियों को न्याय दिलाने के लिए कुछ दिन और धैर्य बनाए रखें।
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शहर की सड़कों से लेकर गली मोहल्लों तक में गंदगी के ढेर लग गए हैं। नालियां गंदगी से भरकर ब्लाॅक हो रहीं हैं। यही गंदगी बारिश के पानी के साथ मिलकर नदी नालों में पहुंच कर उन्हें भी प्रदूषित कर कर रही हैं। इसका जल्द समाधान होना चाहिए।
-शेखर शर्मा, शहरवासी
समय के साथ-साथ शहर में गंदगी के ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इनसे उठती दुर्गंध आम शहरवासियों के साथ ही राहगीरों को भी परेशान कर रही है। बाहर से आने वाले लोग शहर की खराब स्थिति देखकर नकारात्मक संदेश लेकर जा रहे हैं। प्रशासन और कर्मचारियों के बीच जल्द बातचीत होनी चाहिए।
-करतार चंद, शहरवासी
कचरे के इस संकट से कोरोना, डेंगू, डायरिया, चिकनगुनिया जैसे रोगों के फैलने का डर पैदा हो गया है। बाजारों में कचरे के ढेरों के बीच खाने-पीने की चीजों का कारोबार हो रहा है। स्वच्छता बनाए रखना असंभव हो गया है।
-गुलजार मोहम्मद, स्थानीय निवासी
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घरों के बाहर और गलियों में कचरे के ढेर लग गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। दुर्गंध के कारण घरों की खिड़कियां खोलना मुश्किल हो गया है। हम कर्मचारियों की मांगों का सम्मान करते हैं, लेकिन शहरवासियों को हो रही परेशानी को दूर करने का भी प्रयास करना चाहिए।
-विश्बंर नाथ, स्थानीय निवासी
सफाई कर्मचारियों की मांगे जायज हैं और सरकार को जल्द इनका हल निकालना चाहिए। इससे शहरवासियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर जल्द सरकार ने इसका समाधान नहीं किया तो शहर के कारोबारी भी प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
-जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष, व्यापार मंडल उधमपुर
हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों से संवाद किया जा रहा है ताकि यात्रा के शुरू होने से पहले शहरी क्षेत्र को कचरे से मुक्त बनाया जा सके। फिलहाल कचरे की समस्या को दूर करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
-सद्दाम हुसैन, सीईओ नगर परिषद
उनका कहना है कि हम कर्मचारियों की मांगों का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता ने शहरवासियों को गंभीर संकट में डाल लिया है। अगर जल्द सरकार ने समस्या का समाधान नहीं निकाला तो मजबूर होकर उन्हें भी सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
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गौरतलब है कि लगातार 17 दिन से चल रही सफाई कर्मियों की हड़ताल ने पूरे शहर की सफाई व्यवस्था को चौपट कर दिया है। जानकारी के अनुसार उधमपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 टन कचरा निकलता है। पिछले 17 दिनों में करीब 500 टन कचरा विभिन्न स्थानों पर जमा हो चुका है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई गलियों के प्रवेश द्वार तक कचरे से पटने लगे हैं। कई जगहों पर राहत पाने के लिए लोग कचरे को आग के हवाले कर रहे हैं लेकिन इससे राहत की बजाय सार्वजनिक सेहत और पर्यावरण के लिए भी संकट पैदा होने का जोखिम बढ़ने लगा है। इस बीच हो रही बारिश से यह कचरा सड़कों पर भी जगह-जगह फैल गया है और ओवरफ्लो होकर बह रही नालियों से लोगों के घरों तक पहुंचने लगा है।
इधर, हड़ताली सफाई कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेगी तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। उधमपुर यूनियन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि फिलहाल सोमवार को मुख्यमंत्री के साथ बैठक पर उम्मीद टिकी है। शहरवासियों से भी अपील की गई कि सफाई कर्मियों को न्याय दिलाने के लिए कुछ दिन और धैर्य बनाए रखें।
शहर की सड़कों से लेकर गली मोहल्लों तक में गंदगी के ढेर लग गए हैं। नालियां गंदगी से भरकर ब्लाॅक हो रहीं हैं। यही गंदगी बारिश के पानी के साथ मिलकर नदी नालों में पहुंच कर उन्हें भी प्रदूषित कर कर रही हैं। इसका जल्द समाधान होना चाहिए।
-शेखर शर्मा, शहरवासी
समय के साथ-साथ शहर में गंदगी के ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इनसे उठती दुर्गंध आम शहरवासियों के साथ ही राहगीरों को भी परेशान कर रही है। बाहर से आने वाले लोग शहर की खराब स्थिति देखकर नकारात्मक संदेश लेकर जा रहे हैं। प्रशासन और कर्मचारियों के बीच जल्द बातचीत होनी चाहिए।
-करतार चंद, शहरवासी
कचरे के इस संकट से कोरोना, डेंगू, डायरिया, चिकनगुनिया जैसे रोगों के फैलने का डर पैदा हो गया है। बाजारों में कचरे के ढेरों के बीच खाने-पीने की चीजों का कारोबार हो रहा है। स्वच्छता बनाए रखना असंभव हो गया है।
-गुलजार मोहम्मद, स्थानीय निवासी
घरों के बाहर और गलियों में कचरे के ढेर लग गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। दुर्गंध के कारण घरों की खिड़कियां खोलना मुश्किल हो गया है। हम कर्मचारियों की मांगों का सम्मान करते हैं, लेकिन शहरवासियों को हो रही परेशानी को दूर करने का भी प्रयास करना चाहिए।
-विश्बंर नाथ, स्थानीय निवासी
सफाई कर्मचारियों की मांगे जायज हैं और सरकार को जल्द इनका हल निकालना चाहिए। इससे शहरवासियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर जल्द सरकार ने इसका समाधान नहीं किया तो शहर के कारोबारी भी प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
-जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष, व्यापार मंडल उधमपुर
हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों से संवाद किया जा रहा है ताकि यात्रा के शुरू होने से पहले शहरी क्षेत्र को कचरे से मुक्त बनाया जा सके। फिलहाल कचरे की समस्या को दूर करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
-सद्दाम हुसैन, सीईओ नगर परिषद