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Udhampur News: जालंधरा देवी मंदिर का 10.80 लाख से होगा कायाकल्प
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उधमपुर। 10वीं सदी की प्राचीन धरोहर जालंधरा देवी मंदिर के संरक्षण की कवायद तेज हो गई है। उधमपुर के लड्डन-कोटली क्षेत्र में स्थित इस प्राचीन मंदिर की मरम्मत और पुनर्स्थापन कार्य के लिए 10.80 लाख रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही इस ऐतिहासिक धरोहर को संवारने का रास्ता साफ हो गया है।
जालंधरा देवी मंदिर उधमपुर क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी पुरानी स्थापत्य शैली के लिए भी जाना जाता है। पत्थरों से निर्मित इस मंदिर में प्राचीन निर्माण कला और शिल्पकारी की झलक देखने को मिलती है, जो उस दौर की वास्तुकला को दर्शाती है।
इतिहासकारों के अनुसार जालंधरा देवी मंदिर का निर्माण प्राचीन काल की मंदिर निर्माण परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है। मंदिर की संरचना, पत्थरों का उपयोग और कलात्मक शैली इसे क्षेत्र की अन्य ऐतिहासिक धरोहरों से अलग पहचान देते हैं। मंदिर परिसर लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है। समय के प्रभाव के कारण मंदिर के कुछ हिस्सों को मरम्मत और संरक्षण की आवश्यकता महसूस हो रही थी। अब टेंडर जारी होने के बाद मंदिर की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कार्य किए जाएंगे। इसमें क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, संरक्षण और पुनर्स्थापन से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
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मंदिर संरक्षण की प्रक्रिया शुरू होने से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह है। रामलाल, राजकुमार, विजय कुमार, चंद्र प्रकाश व अन्य लोगों का कहना है कि प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। इससे न केवल क्षेत्र की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई कि जालंधरा देवी मंदिर के पुनर्स्थापन से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को अधिक बढ़ावा मिलेगा। संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास और प्राचीन वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
कोट
मंदिर की मरम्मत और पुनर्स्थापन कार्य के लिए टेंडर जारी हो गया है। इसकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा।
-शम्मी गुप्ता, एईई, लोक निर्माण विभाग
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जालंधरा देवी मंदिर उधमपुर क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी पुरानी स्थापत्य शैली के लिए भी जाना जाता है। पत्थरों से निर्मित इस मंदिर में प्राचीन निर्माण कला और शिल्पकारी की झलक देखने को मिलती है, जो उस दौर की वास्तुकला को दर्शाती है।
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इतिहासकारों के अनुसार जालंधरा देवी मंदिर का निर्माण प्राचीन काल की मंदिर निर्माण परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है। मंदिर की संरचना, पत्थरों का उपयोग और कलात्मक शैली इसे क्षेत्र की अन्य ऐतिहासिक धरोहरों से अलग पहचान देते हैं। मंदिर परिसर लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है। समय के प्रभाव के कारण मंदिर के कुछ हिस्सों को मरम्मत और संरक्षण की आवश्यकता महसूस हो रही थी। अब टेंडर जारी होने के बाद मंदिर की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कार्य किए जाएंगे। इसमें क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, संरक्षण और पुनर्स्थापन से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
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मंदिर संरक्षण की प्रक्रिया शुरू होने से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह है। रामलाल, राजकुमार, विजय कुमार, चंद्र प्रकाश व अन्य लोगों का कहना है कि प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। इससे न केवल क्षेत्र की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई कि जालंधरा देवी मंदिर के पुनर्स्थापन से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को अधिक बढ़ावा मिलेगा। संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास और प्राचीन वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
कोट
मंदिर की मरम्मत और पुनर्स्थापन कार्य के लिए टेंडर जारी हो गया है। इसकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा।
-शम्मी गुप्ता, एईई, लोक निर्माण विभाग