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Udhampur News: 26 वर्ष से कैथा-चिगली सड़क की मरम्मत नहीं, 2000 लोग परेशान
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रामनगर। कैथा से चिगली-किया को जोड़ने वाली लगभग आठ किलोमीटर सड़क बदहाली का शिकार है। इस कारण वाहन चालकों और ग्रामीणों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग ने करीब 26 वर्ष पहले निर्माण कार्य शुरू करवाया था। इसके बाद सड़क की सार नहीं ली गई।
मार्ग पर बलोता, चिगला, बेरिया, कुलतिया, मनयाल, कुलताड़ और कांचा सहित विभिन्न गांवों के करीब 2000 लोग पूरी तरह निर्भर हैं। सड़क की खराब हालत के कारण निजी वाहन चालक गांवों में जाने से दूरी बना रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो तो उन्हें मजबूरन आठ किलोमीटर तक पैदल चलकर बसंतगढ़-रामनगर मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद ही वाहन की सुविधा मिल पाती है।
ग्रामीण मदन लाल, देस राज, प्रीतम सिंह, प्रेम सिंह, शाम लाल और अन्य ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत शुरू नहीं की गई तो आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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सात वर्ष पहले हुआ था अधूरा काम
स्थानीय निवासियों के अनुसार करीब सात वर्ष पहले विभाग ने चिगली पुल से आगे लगभग दो किलोमीटर तक तारकोल बिछाने का कार्य किया था। इसके बाद काम को अचानक बंद कर दिया गया। स्थिति यह है कि तारकोल कहीं भी दिखाई नहीं देता है। ग्रामीणों ने रामनगर प्रशासन और विधायक राहत देने की मांग की है।
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एकमात्र यात्री वाहन का संचालन हो सकता है बंद
जर्जर मार्ग पर चलने वाले एकमात्र यात्री वाहन के चालक संदीप कुमार ने दर्द बयां करते हुए बताया कि वह एक वर्ष से मेटाडोर चला रहे हैं। नुकीले पत्थरों के कारण वाहनों के टायर फट रहे हैं। कमाई कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है। इसके अतिरिक्त बरसात में कीचड़ और पानी भरने से हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। यदि मरम्मत कार्य नहीं किया गया तो मजबूरन वाहन संचालन पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है।
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26 साल बीतने के बाद भी सड़क की हालत नहीं सुधरी। हर सरकार और विभाग ने केवल आश्वासन दिए लेकिन समस्या जस की तस बनी है।
-हिम राज, ग्रामीण
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यह सड़क गांवों की जीवनरेखा है। मरीजों, छात्रों और किसानों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
-खीम राज, ग्रामीण
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लगभग एक माह पूर्व कार्यभार संभाला है। कैथा से चिगली-कैया तक लगभग आठ किलोमीटर मार्ग की खराब स्थिति की जानकारी संज्ञान में है। मरम्मत और सुधार कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही आवश्यक कार्य आरंभ किया जाएगा।
- देवेंद्र भारती, एईई, लोक निर्माण विभाग
मार्ग पर बलोता, चिगला, बेरिया, कुलतिया, मनयाल, कुलताड़ और कांचा सहित विभिन्न गांवों के करीब 2000 लोग पूरी तरह निर्भर हैं। सड़क की खराब हालत के कारण निजी वाहन चालक गांवों में जाने से दूरी बना रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो तो उन्हें मजबूरन आठ किलोमीटर तक पैदल चलकर बसंतगढ़-रामनगर मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद ही वाहन की सुविधा मिल पाती है।
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ग्रामीण मदन लाल, देस राज, प्रीतम सिंह, प्रेम सिंह, शाम लाल और अन्य ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत शुरू नहीं की गई तो आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
सात वर्ष पहले हुआ था अधूरा काम
स्थानीय निवासियों के अनुसार करीब सात वर्ष पहले विभाग ने चिगली पुल से आगे लगभग दो किलोमीटर तक तारकोल बिछाने का कार्य किया था। इसके बाद काम को अचानक बंद कर दिया गया। स्थिति यह है कि तारकोल कहीं भी दिखाई नहीं देता है। ग्रामीणों ने रामनगर प्रशासन और विधायक राहत देने की मांग की है।
एकमात्र यात्री वाहन का संचालन हो सकता है बंद
जर्जर मार्ग पर चलने वाले एकमात्र यात्री वाहन के चालक संदीप कुमार ने दर्द बयां करते हुए बताया कि वह एक वर्ष से मेटाडोर चला रहे हैं। नुकीले पत्थरों के कारण वाहनों के टायर फट रहे हैं। कमाई कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है। इसके अतिरिक्त बरसात में कीचड़ और पानी भरने से हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। यदि मरम्मत कार्य नहीं किया गया तो मजबूरन वाहन संचालन पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है।
26 साल बीतने के बाद भी सड़क की हालत नहीं सुधरी। हर सरकार और विभाग ने केवल आश्वासन दिए लेकिन समस्या जस की तस बनी है।
-हिम राज, ग्रामीण
यह सड़क गांवों की जीवनरेखा है। मरीजों, छात्रों और किसानों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
-खीम राज, ग्रामीण
लगभग एक माह पूर्व कार्यभार संभाला है। कैथा से चिगली-कैया तक लगभग आठ किलोमीटर मार्ग की खराब स्थिति की जानकारी संज्ञान में है। मरम्मत और सुधार कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही आवश्यक कार्य आरंभ किया जाएगा।
- देवेंद्र भारती, एईई, लोक निर्माण विभाग